पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए हलचल शुरू हो गई है. कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में गठबंधन को लेकर चर्चाएं जारी हैं और इस बीच 193 सीटों को लेकर पार्टी ने आपस में बंटवारा कर लिया है. इन 193 सीटों में से 101 पर लेफ्ट पार्टियां और 92 पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी. बाकी सीटों के लिए अगली बैठक में फैसला किया जाएगा.
बता दें कि कांग्रेस ने 2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी वाममोर्चा के साथ गठबंधन किया था. इस चुनाव में माकपा 148 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 26 सीटों पर उसे जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें उसे 44 सीटों पर जीत मिली थी.
इसके अलावा वामदलों के सहयोगी के तौर पर ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ कर दो सीटें जीती हासिल की थी. सीपीआई 11 सीटों पर चुनाव लड़कर 1 सीट जीती थी. इसके अलावा रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी 19 सीटों पर चुनाव लड़कर 3 सीटें जीती थी.
इस तरह से देखें तो 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वाम मोर्चे के गठबंधन में सबसे अधिक फायदा कांग्रेस को ही हुआ था. कांग्रेस पार्टी ने मात्र 92 सीटों पर चुनाव लड़कर 44 सीटें जीती, जबकि वामपंथी दल 202 सीटों पर चुनाव लड़कर मात्र 32 सीटें ही जीत पाए थे. 44 सीटें जीतने के कारण कांग्रेस को विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी मिला था. इसके बाद कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन टूट गया था और 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी.
वहीं, इस बार कांग्रेस और लेफ्ट ने फैसला किया था कि साल 2016 के चुनाव में जीती हुई अपनी-अपनी सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट के प्रत्याशी उतरेंगे. इस तरह कांग्रेस को अपनी जीती हुई 44 सीटों के साथ 92 सीटें मिली है और लेफ्ट को अपनी जीती हुई 33 सीटों के साथ 101 सीटें मिली है.
इसके बाद बाकी बची सीटों पर अभी पेच फंसा हुआ है, जिस पर दोनों दलों के साथ सहमति बनने बाद बंटवारे का ऐलान होगा. इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस इस बार बंगाल में पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों पर किस्मत आजमाएंगी.