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बंगाल: मेदिनीपुर में भिड़े भाजपा-TMC के कार्यकर्ता, 8 घायल, अस्पताल में भर्ती

बीजेपी ने आरोप लगाया है कि जब उनके पार्टी कार्यकर्ता एक कैंडिडेट का नामांकन करवा कर लौट रहे थे, तभी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनपर हमला बोल दिया.

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बंगाल में राजनीति तेज होती जा रही हैं (फाइल फोटो)
बंगाल में राजनीति तेज होती जा रही हैं (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर मारपीट का आरोप लगाया
  • तृणमूल कांग्रेस, भाजपा पर लगा रही है आरोप
  • 8 घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है
  • 4 घायल, भाजपा से संबंध रखते हैं

जैसे-जैसे बंगाल चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे ही दो प्रमुख पार्टियों भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और हाथापाई की खबरें सामने आ रही हैं. बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के हतिहालका में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भिडंत हो गई. इस भिड़त में आठ लोगों के घायल हो गए हैं.

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बीजेपी ने आरोप लगाया है कि जब उनके पार्टी कार्यकर्ता एक कैंडिडेट का नामांकन करवा कर लौट रहे थे, तभी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनपर हमला बोल दिया.

वहीं तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जब भाजपा कार्यकर्ता, एक लोकल कैंडिडेट का नॉमिनेशन करके लौट रहे थे, तभी उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया. फिलहाल, मिली सूचना के अनुसार 8 लोगों को मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया है. इन आठ घायलों में से चार लोग भाजपा से हैं. 

इससे पहले मंगलवार को ही बंगाल के मालदा जिले में भाजपा के एक बूथ कार्यकर्ता को गोली मार दी गई. ये घटना मालदा जिले के मोतबारी (Mothabari) की है, जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. घायल भाजपा कार्यकर्ता के भाई ने कहा ''जैसे ही मुझे सूचना मिली, मैं तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा. मैंने उसे पूछा कि ये किसने किया? उसने TMC के चौबीलाल और अन्य कार्यकर्ताओं का नाम लिया.''

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बता दें कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा के आरोप हमेशा लगते रहे हैं. बीजेपी ने तो इसे चुनावी मुद्दा बनाया है और पार्टी का दावा है कि बंगाल में उनके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को राजनीतिक हिंसा के तहत मार दिया गया. बीजेपी सीधे पर इन घटनाओं के लिए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाती है जबकि तृणमूल नेता कहते हैं कि किसी भी मौत होती है तो बीजेपी नेता वहां जाकर उसे अपना कार्यकर्ता बता देते हैं. बहरहाल, अब जबकि मतदान की तारीख एकदम नजदीक हैं तो ऐसे में हिंसा होना सुरक्षा एजेंसियों और चुनाव आयोग के लिए भी बड़ी चुनौती है.

 

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