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बंगाल के 'साइलेंट वोटर' पर पीएम मोदी और ममता बनर्जी में खुली जुबानी जंग

बंगाल में चुनाव है और महिला वोट पर दांव है. महिला सुरक्षा पर ममता और पीएम मोदी में जुबानी जंग अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले ही छिड़ गई थी. महिला वोटरों को लुभाने और महिला सुरक्षा के मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए ममता ने कोलकाता में रैली की.

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'साइलेंट वोटर' पर जंग
'साइलेंट वोटर' पर जंग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पश्चिम बंगाल के 'साइलेंट वोटर' पर जंग
  • बीजेपी-टीएमसी का महिला वोट पर जोर
  • 'गुजरात-यूपी में महिलाओं पर अत्याचार'

महिला सुरक्षा के नाम पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. आज भी ममता बनर्जी ने महिला सुरक्षा को लेकर गुजरात और यूपी का नाम लिया और कहा कि बंगाल के मुकाबले वहां अपराध ज्यादा है.

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बंगाल में चुनाव है और महिला वोट पर दांव है. महिला सुरक्षा पर ममता और पीएम मोदी में जुबानी जंग अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले ही छिड़ गई थी. महिला वोटरों को लुभाने और महिला सुरक्षा के मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए ममता ने कोलकाता में रैली की. इस दौरान ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में दिए भाषण पर घेरा. ममता बनर्जी ने कहा, बोलते हैं बंगाल में लड़कियां सुरक्षित नहीं. गुजरात में हर दिन 1944 मर्डर हुए. रेप के मामले में गुजरात और उत्तर प्रदेश आगे हैं. ये सरकारी आंकड़े कहते हैं.
 
बहरहाल, बीजेपी हों या टीएमसी दोनों मिशन महिला वोट पर निकल पड़ी हैं. 2021 के विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है. इसके मुताबिक पश्चिम बंगाल में 7 करोड़ 32 लाख वोटर हैं. इनमें पुरुष वोटर 3 करोड़ 73 लाख हैं जबकि महिला वोटर 3 करोड़ 59 लाख हैं. 

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी महिलाओं को तरजीह देती रही हैं और इसी के तहत उन्होंने इस बार 50 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. दूसरी तरफ बीजेपी ने भी राज्य में अपनी महिला मोर्चा को सड़कों पर उतार दिया है.

बंगाल में 2011 के बाद से ही महिला वोटर सरकार बनाने और बदलने की ताकत रखती हैं. बीजेपी और टीएमसी हों या कांग्रेस-लेफ्ट का गठबंधन, सब जानते हैं कि अब महिलाएं ज्यादा संख्या में वोट के लिए निकल रही हैं जो खेल बदलने वाला साबित हो रहा है.

महिला वोट का गणित

2011 के विधानसभा चुनाव में बंगाल की 84.45 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था और ममता बनर्जी की सरकार बनाई थी. 2014 लोकसभा चुनाव में 82.06 फीसदी महिलाओं ने वोट में भागीदारी निभाई दी. तब टीएमसी को 42 में से 34 और बीजेपी को 2 सीट मिली थी. 2016 विधानसभा चुनावों में भी ममता बनर्जी की जीत हुई थी और तब 83.13 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था. 2019 में बंगाल की तस्वीर बदलने वाला लोकसभा चुनाव हुआ जिसमें महिलाओं ने 81.7 फीसदी मतदान किया. इस चुनाव में बीजेपी को 18 और टीएमसी को 22 सीटें मिलीं...और उसे कुल 12 सीटों का नुकसान हुआ.

हालांकि 2019 में ममता ने 41 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया था. इनमें नुसरत जहां, मिमी चक्रवर्ती और महुआ मोइत्रा समेत 9 महिला सांसद चुनकर आईं. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देने के लिए ममता ने सौगत रॉय जैसे वरिष्ठ नेता के बजाए महुआ मोइत्रा को चुना जो पहली बार चुनकर आई थीं.

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महिलाओं के नाम पर योजनाएं 

ममता ने कन्याश्री, रूपाश्री और मातृत्व शिशु देखभाल जैसी योजनाओं से भी महिलाओं को लुभाने की पूरी कोशिश की है. टीएमसी ने ममता की जीत के लिए बंगाल की बेटी ही चाहिए का नारा बुलंद किया है.

बीजेपी का दांव, महिला वोट पर भरोसा

दूसरी तरफ, बीजेपी 85 साल की बुजुर्ग महिला की पिटाई का मुद्दा उठाकर महिला सुरक्षा पर ममता को घेर रही है. वहीं ममता यूपी के हाथरस और बिहार में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले गिना रही हैं.

बीजेपी को भरोसा है कि महिलाएं इस बार ममता के लिए नहीं बल्कि पीएम मोदी की बेदाग और कर्मठ छवि को देखकर वोट करेंगी. बिहार चुनावों में जीत के बाद पीएम मोदी ने दावा किया था कि महिलाएं बीजेपी की वो साइलेंट वोटर हैं जो हमेशा उसे जीत की दहलीज तक पहुंचाती हैं. पीएम का कहना था कि बीजेपी के पास साइलेंट वोटर का ऐसा वर्ग है वो उसे बार-बार वोट दे रहा है. ये साइलेंट वोटर्स हैं देश की माताएं-बहनें देश की नारी शक्ति.

बीजेपी को उम्मीद है कि केंद्र की उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से वो महिला वोटरों को अपने पक्ष में करने में कामयाब होगी.

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(साथ में कोलकाता से प्रेमा राजाराम)

 

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