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पश्चिम बंगाल को सत्ता को बचाए रखने लिए ममता बनर्जी ने 'दुआरे-दुआरे पश्चिम बोंगो सरकार' (हर द्वार बंगाल सरकार) अभियान का आगाज मंगलवार को किया है. दो महीने के तक चलने वाले इस अभियान के जरिए ममता सरकार की अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को शहर से लेकर गांव के हर घर तक पहुंचाने की रणनीति है. पीएम मोदी की आयुष्मान भारत योजना के जवाब में ममता की 'स्वास्थ्य साथी' योजना सहित 11 योजनाओं का लाभ इस अभियान के लगाए गए कैंपों से उठा सकते हैं.
ममता सरकार के द्वारा राज्य के ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम-पालिकाओं के वार्डों में करीब 20 हजार शिविरों का आयोजन किया गया है. दुआरे-दुआरे सरकार कैंपेन के पहले दिन मंगलवार को शिविरों में लोग अपनी शिकायतों को दर्ज कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़े दिखे. हावड़ा जिले के अमता ब्लॉक 1 में अमता बालिका विद्यालय के शिविर में खड़ी 72 साल की तरुण हमीर ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, 'मेरे कार्ड में कुछ गलती के कारण हमें कोई पेंशन नहीं मिल रही है. इसके लिए हमने आवेदन भी किया था, लेकिन सही नहीं हुआ. इसलिए मैं अब इसे सही कराने के लिए यहां आई हूं.'
सरकार के दुआरे-दुआरे सरकार कार्यक्रम के माध्यम से अपनी समस्याओं को हल करने के लिए तरुण हमीर जैसे कई लोग इन शिविरों में पहुंच रहे हैं. हावड़ा के जिला मजिस्ट्रेट मुक्ता आर्य ने बताया, 'हम इस कार्यक्रम के जरिए 11 सेवाएं लोगों को दे रहे हैं. सबसे पहले, एक शिकायत काउंटर है. किसी भी प्रकार की शिकायतों के लिए, आप अपना आवेदन जमा कर सकते हैं. ऐसे में अगर कोई अपना आवेदन नहीं लिख सकता है तो उसकी हम लिखने में मदद करते हैं. स्वास्थ्य साथी योजना के साथ-साथ खाद्य साथी, कन्याश्री, रूपश्री, शिक्षाश्री सहित एससी-एसटी और ओबीसी समुदाय से जुड़े लोगों के जाति प्रमाण पत्र भी जारी देने जैसी सेवाएं दे रहे हैं.
मुक्ता आर्य ने बताया कि स्वास्थ्य साथी योजना का लाभ सभी राज्य के लोगों को देना है. परिवार की हर महिला मुखिया के नाम से स्वास्थ्य साथी योजना का कार्ड बनेगा. ऐसे में अगर कोई अन्य स्वास्थ्य योजना में नामांकित नहीं है, वह इस कार्ड का लाभ उठा सकता है.' स्वास्थ्य साथी योजना का कार्ड लेने शिविर में आई स्थानीय निवासी पिंकी प्रमाणिक ने बताया, 'हमने पहले भी बहुत से लोगों से संपर्क किया था ताकि इन योजनाओं का लाभ उठा सके. अब जब शिविर हमारे घर के पास है तो हम खुद ही कार्ड बनवाने के लिए आए हैं.
बता दें कि आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी ने दिसंबर 2016 में शुरू की गई स्वास्थ्य योजना के जरिए प्रति परिवार को हर साल 5 लाख रुपये का इलाज करा सकते हैं. इसी दौरान शिविर में आई एक महिला ने बताया कि स्वास्थ्य साथी योजना का सिर्फ फॉर्म जमा करने आई हूं, क्योंकि अभी जो कार्ड है वो सास के नाम है और परिवार की मुखिया हैं, इसलिए मैंने पहले उनका नाम दिया और इसके बाद फॉर्म में परिवार के अन्य सदस्यों के नाम इसमें जुड़वाना है.
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय ने कहा, 'मैं ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर के लोगों से 'दुआरे-दुआरे सरकार' अभियान में शामिल होने के लिए सभी से अपील करता हूं. इस शिविर के जरिए सरकार की योजनाओं को समझने और उसके लिए लाभ उठाएं. शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और पेंशन सहित तमाम योजनाओं को लाभ इस अभियान के शिविरों के जरिए उठा सकते हैं. इसके लिए किसी दफ्तर या कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है. बल्कि अपने घर के पास ही लगे शिविर में जाकर कर सकते हैं.
पंचला की बीडीओ डॉ ईशा घोष ने बताया कि 'दुआरे-दुआरे सरकार' प्राथमिकता शिकायत काउंटर है, जिसमें व्यक्ति आता है और उसे सरकारी कर्मचारी मदद करते हैं. इन शिविर में दो तरह के लोग आ रहे हैं. एक वो लोग जो योग्य हैं और दूसरे अयोग्य लोग हैं. ऐसे में अयोग्य लोगों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है. उन्होंने बताया कि इसलिए, हम जितना हो सके उतनी शिकायतों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.
बंगाल में 'दुआरे-दुआरे सरकार' अभियान को ममता बनर्जी ने चार चरणों में बांटा है. पहला चरण एक दिसंबर से शुरू होगा और 11 दिसंबर तक चलेगा. दूसरा चरण 15 दिसंबर से 24 दिसंबर तक जारी रहेगा. इसके बाद तीसरा चरण दो जनवरी 2021 से 12 जनवरी तक और चौथा चरण 18 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगा.