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बंगालः ब्रू बेल्ट में वोटिंग कल, क्या कहते हैं चाय बागान में काम करने वाले मजदूर

बंगाल के ब्रू बेल्ट यानी चाय बागान वाले क्षेत्र में शनिवार को वोटिंग होगी. उत्तर बंगाल में करीब 54 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 17 सीटें शामिल हैं.

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बंगाल के ब्रू बेल्ट में शनिवार को होगी वोटिंग (फोटो-मौसमी सिंह)
बंगाल के ब्रू बेल्ट में शनिवार को होगी वोटिंग (फोटो-मौसमी सिंह)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल में पांचवें चरण के लिए शनिवार को वोट डाले जाएंगे
  • उत्तर बंगाल में 54 सीटें जिसमें पर्वतीय क्षेत्र में 17 सीट
  • करीब 1,500 एकड़ क्षेत्र में फैले हुए हैं चाय के बागान

कोरोना संकट के बीच बंगाल में चुनाव प्रचार जारी है और कल शनिवार को पांचवें चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. इस चरण में टी बेल्ट कहे जाने वाले क्षेत्र में भी वोट पड़ेंगे और यहां के चाय बागानों में काम करने वाले मतदाताओं के लिए ढेर सारे वादे भी किए गए हैं. 

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बंगाल के ब्रू बेल्ट यानी चाय बागान वाले क्षेत्र में शनिवार को वोटिंग होगी. उत्तर बंगाल में करीब 54 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 17 सीटें शामिल हैं और यह चाय बागान के मजदूरों के लिहाज एक महत्वपूर्ण वोट बैंक हैं.

वोटिंग से एक दिन का पहले दिन भी यहां के चाय श्रमिकों के लिए हर दिन की तरह आम दिन है. हालांकि वे उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वोट देने जाएंगे. सुजाता कहती हैं 'हमारे लिए यह एक महत्वपूर्ण दिन है, हमारी छुट्टी है और हम अपने परिवार के साथ वोटिंग के लिए जाएंगे.'

उन्होंने कहा कि हम न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और उस पार्टी को वोट देंगे जो क्षेत्र में कुछ विकास लाएगी. वोटिंग के लिए पोलिंग बूथ पास के ही एक स्कूल में बनाया गया है.

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3.50 लाख चाय श्रमिक

यहां के चाय बागानों से तोड़ी गई चाय पत्तियों की मांग दुनियाभर में है और ये बकिंघम पैलेस से लेकर जापान के सम्राट तक मकईबारी चाय के पारखी हैं. चाय के बागान करीब 1,500 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इस क्षेत्र में करीब 283 चाय बागान हैं जिसमें 3,50,000 चाय श्रमिकों काम करते हैं.

चुनाव के दौरान पार्टियां लंबे-चौड़े वादे करती हैं, दिहाड़ी मज़दूरी बढ़ाने और जमीन देने तक का वादा किया जाता है और फिर उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है.

यमुना कहती हैं कि 'हम चाय बागान में काम करते हैं और यही हमारा प्यार तथा हमारा जीवन है. हम यहां रहते हैं लेकिन हमारे पास एक इंच जमीन नहीं है. यमुना का कहना है कि हमें कोई अधिकार तक नहीं है और हम अधिकार चाहते हैं.

चाय बागान में काम करने वाली विद्या देवी तीसरी पीढ़ी हैं और उन्हें लगता है कि महिला मतदाताओं को हमेशा उपेक्षित किया जाता है. वह महसूस करती हैं कि अब समय आ गया है कि महिलाओं के पास खुद की संपत्ति हो और मतदान ऐसा करने का एक तरीका है.

 

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