बिहार विधानसभा चुनाव पांच सीटें जीतने के बाद से एआईएमआईएम के हौसले बुलंद हैं. असदुद्दीन ओवैसी अब बंगाल के सियासी पिच पर उतरकर किस्मत आजमाने की कवायद में हैं. बंगाल में टीएमसी के खिलाफ बीजेपी पहले से ही मोर्चा खोले हुए थी और अब ओवैसी की दस्तक ममता बनर्जी के लिए बेचैनी बढ़ाने वाली है. बंगाल की करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी के मद्देनजर असदुद्दीन ओवैसी को बंगाल में अपनी जगह बनाने का सियासी मौका नजर आ रहा है, जिसके लिए उन्होंने बाकायदा एक प्लान बनाया है.
बंगाल में एआईएमआईएम के प्रवक्ता और सदस्य इमरान सोलंकी ने बताया कि बंगाल चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के साथ पार्टी नेताओं की बैठक हुई है, जिसमें प्रदेश के सभी नेताओं की बात सुनने के बाद उन्होंने हर जिले में एक समिति बनाने की बात कही है. हैदराबाद में हमारी पार्टी के पूर्व महापौर माजिद हुसैन जल्द ही बंगाल पहुंचेंगे और उन्हीं के कंधों पर बंगाल चुनाव की जिम्मेदारी होगी. माजिद हुसैन संगठन को खड़ा करने के साथ असदुद्दीन ओवैसी को रिपोर्ट करेंगे. बिहार चुनाव की कमान माजिद हुसैन संभाल चुके हैं.
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में अभी चार से पांच महीने का समय है. संगठन बनने के बाद ही तय होगा कि पार्टी विधानसभा में कैसे और किन सीटों चुनाव लड़ेगी. हमारी कोशिश है कि सूबे की सभी सीटों पर पार्टी चुनाव लड़े, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ता पूरी तरह से सक्रिय हैं और बकायदा लोगों से संपर्क भी कर रहे हैं. AIMIM की बंगाल को लेकर आक्रमक चुनाव लड़ने की योजना है.
आईएमआईएम बिहार चुनाव के बाद से ही बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चला रही है, जिसमें पश्चिम बंगाल में ही 10 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य बन चुके हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से सदस्यता अभियान चला रही है और पार्टी बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस के विकल्प के तौर पर अपने आपको देख रही है. AIMIM नेता इमरान सोलंकी ने कहा कि हमारी ऑनलाइन सदस्यता अभी भी जारी है. राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में अकेले 2 लाख सदस्य हैं. बिहार चुनाव में मिली पांच सीटों के बाद पार्टी का तेजी से ग्राफ बढ़ा है. बिहार के जिस सीमांचल इलाकों में पार्टी को जीत मिली है वो बंगाल से लगे हुए हैं.
AIMIM ने बंगाल में अपनी उपस्थिति को दमदार तरीके से दर्ज करने के लिए आक्रमक चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई है. पार्टी 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन यह भी जानती है कि 65 से अधिक सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिमों का सीधा प्रभाव है. ऐसे में ओवैसी की नजर ऐसी सीटों पर खास तौर पर है. मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं.
दिलचस्प बात यह है कि मुर्शिदाबाद जिले की कुछ विधानसभा सीटों पर 60 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोट हैं, जहां AIMIM कांग्रेस और टीएमसी दोनों पूरे जोरशोर से चुनावी किस्मत आजमाने के लिए बेताब हैं. AIMIM का दावा है कि कोलकाता में ही 6 फीसदी गैर-बंगाली बोलने वाले मुस्लिम हैं, जिनका शहरी सीटों पर राजनीतिक असर है.
टीएमसी ने घोषणापत्र में मुसलमानों के लिए 17 फीसदी आरक्षण का आश्वासन दिया गया है, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है. यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय बंगाल में राज्य में ममता बनर्जी की टीएमसी से अलग अपने लिए राजनीतिक विकल्प तलाश रहा है, जिसे AIMIM भी बाखूबी समझती है.
AIMIM नेता ने कहा कि अगर ममता बनर्जी खुद को मुस्लिमों का समर्थक मानती हैं तो उन्होंने अपने घोषणापत्र के 17 फीसदी मुस्लिम आरक्षण के प्रावधान को क्यों लागू नहीं किया. बंगाल में कोई भी मुस्लिम विश्वविद्यालय नहीं हैं. यहां 15 प्रमुख जिले हैं, जिनमें से 5 जिले मुस्लिम बहुल हैं. यहां विकास का कोई काम नहीं हुआ हैं. चुनाव के दौरान ममता अपने भाषणों में कहती हैं कि मैंने पहले से ही 90 फीसदी काम मुस्लिमों के लिए किया है.
बंगाल के मुस्लिमों में मजबूत पकड़ रखने वाले मौलाना तोहार सिद्दीक के बेटे अब्बास सिद्दीकी जैसे धार्मिक नेताओं के परिवार के सदस्य भी, बंगल में मुस्लिमों के एक मजबूत विकल्प के तौर पर एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं. यहां AIMIM का ग्राउंड सपोर्ट को तेजी से बढ़ा है और ऐसे ही रहा तो बंगाल में 50 से अधिक सीटों पर ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती होगी.
इमरान सोलंकी ने समझाया कि अब्बास सिद्दीकी बंगाल में एक उभरता हुआ चेहरा हैं, जिन्होंने खुद को चुनाव के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया. इसीलिए उनके चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी में चर्चा हुई है और वो लड़ने की इच्छा जाहिर करते हैं तो पार्टी इसे गंभीरता से लेगी. इमरान ने जोर देकर कहा, 'हम मानते हैं कि बीजेपी और टीएमसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.'