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पश्चिम बंगाल के तीसरे चरण में ममता को बीजेपी से अपना दुर्ग बचाने की चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे तरण की 31 सीटों पर कुल 211 उम्मीदवार मैदान में, जिनकी किस्मत का फैसला मंगलवार को है. तीसरे दौर में जिन इलाकों में वोटिंग होनी है वह टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जिसे बचाए रखने की चुनौती ममता बनर्जी के सामने है. वहीं, इस इलाके में बीजेपी की नजरें लगी हुई हैं. ऐसे में देखना है कि बंगाल के तीसरे चरण का चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहता है.  

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नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी
नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल के तीसरे चरण की 31 सीट पर 211 प्रत्याशी
  • बंगाल के तीसरे चरण की वोटिंग मंगलवार को होगी
  • तीसरे चरण में अभिषेक बनर्जी की साख दांव पर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो चरण की 60 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है और अब बारी तीसरे चरण की 31 सीटों के चुनाव की है. 31 सीटों पर कुल 211 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला मंगलवार को है. तीसरे दौर में जिन इलाकों में वोटिंग होनी है वह टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जिसे बचाए रखने की चुनौती ममता बनर्जी के सामने है. वहीं, इस इलाके में बीजेपी की नजरें लगी हुई हैं. ऐसे में देखना है कि बंगाल के तीसरे चरण का चुनाव में किसका पल्ला भारी रहता है.  

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तीसरे चरण में किस पार्टी का क्या दांव पर लगा है

बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के चुनाव प्रचार का शोर रविवार शाम थम गया. तीसरे चरण में तीन जिलों हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों पर मतदान होगा, जहां कुल 211 प्रत्याशी मैदान में हैं. तीसरे चरण में हावड़ा की सात, हुगली की आठ और दक्षिण 24 परगना जिले की 16 सीटें शामिल हैं. बीजेपी और टीएमसी ने सभी 31 सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतार रखे हैं जबकि सीपीआई (एम) के 13 और कांग्रेस के सात उम्मीदवार मैदान में है. वहीं, इस दौर की वोटिंग के लिए 31 सीटों पर कुल 10871 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. 

2016 के नतीजे

पिछले चुनाव से कैसे अलग है इस बार की जंग

बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में  ममता बनर्जी की पार्टी ने क्लीन स्वीप किया था. तीसरे दौर की इन 31 सीटों में से 29 पर टीएमसी ने अपना कब्जा जमाया था जबकि महज एक आमता सीट कांग्रेस की झोली में गई थी और कुलतानी सीट लेफ्ट ने जीती थी. वहीं, बीजेपी अपना खाता नहीं खोल सकी थी. हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद इस पूरे इलाका का सियासी समीकरण बदल गया गया है, जिसके बाद ममता के लिए अपना दुर्ग बचाए रखने की चैलेंज है. 

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वोट शेयर

 

2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इन सीटों पर महज 7 फीसदी वोट मिले थे. वहीं,  टीएमसी को 50 फीसदी और लेफ्ट पार्टी का  37 फीसदी वोट शेयर रहा था. हालांकि, 2019 में बीजेपी को 37 फीसदी वोट मिले और लेफ्ट वोट शेयर घटकर 8.33 फीसदी रहा. 

तीसरे चरण की सबसे कठिन सीटें
तीसरे चरण के चुनावों में सबसे कम जीत के अंतर के साथ रायडीघी और आमता सीट काफी कड़े मुकाबले वाली मानी जा रही हैं. हावड़ा की आमता सीट पर 2016 में  कांग्रेस के असित मित्रा ने टीएमसी के उम्मीदवार तुषार कांति सिल को केवल 4,500 वोटों से हराया था. रायडीघी सीट पर 2016 में टीएमसी ने लेफ्ट को महज 1229 वोटों से हराया था. यही वजह है कि इस बार इन दोनों सीटों पर काफी कांटे की लड़ाई की संभावना नजर आ रही है. 

कांटे वाली सीटें

तीसरे चरण का हाई प्रोफाइल सीट
पश्चिम बंगाल के तीसरे चरण के चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के साथ-साथ कई दिग्गज नेताओं की किस्मत का भी फैसला करने वाला है. तारकेश्वर विधानसभा सीट पर सभी नजरें हैं, यहां से बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता मैदान में है. बीजेपी को इस सीट पर घेरने के लिए टीएमसी ने रामेंदु सिंहा रॉय और लेफ्ट गठबंधन ने सूरजजीत घोष को उतार रखा है. डायमंड हार्बर विधानसभा सीट पर बीजेपी टीएमसी के पन्नालाल हलदर, बीजेपी के दीपक हल्दर और लेफ्ट पार्टी से प्रतीक उर रहमान मैदान में है. श्यामपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी ने कालीपद मंडल को उतार रखा है तो बीजेपी ने अभिनेत्री तनुश्री चक्रवर्ती पर दांव खेला है जबकि कांग्रेस ने अमिताभ चक्रवर्ती को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. 

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हॉट सीट

बरुईपुर पश्चिम विधानसभा सीट से विधानसभा अध्यक्ष व टीएमसी नेता बिमान बनर्जी मैदान में उतरे हैं, कैनिंग पूर्व से सौकत मोल्ला , हरिपाल से करबी मन्ना, फुरफुराशरीफ से से दिलीप यादव, आरामबाग (एससी) से सुजाता मंडल खान, उलबेड़िया दक्षिण से बीजेपी ने पापिया अधिकारी, लेफ्ट कांग्रेस गठबंधन से रायदिघी से पूर्व मंत्री कांति गांगुली, बासंती से सुभाष नस्कर जैसे नेताओं की किस्मत का फैसला तीसरे चरण में मतदाता करेंगे. 

ममता के भतीजे अभिषेक की प्रतिष्ठा

तीसरे चरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साख दांव पर लगी है, क्योंकि उनकी संसदीय सीट डायमंड हार्बर के तहत आने वाली विधानसभा चुनाव पर वोटिंग होनी है. अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी का राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है. ऐसे में दूसरे चरण में ममता बनर्जी की अग्निपरीक्षा हुई थी तो तीसरे चरण में अभिषेक बनर्जी को अपने दुर्ग को बचाए रखने की चुनौती है. ऐसे में देखना है कि अभिषेक बनर्जी अपने संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर टीएमसी को जीत दिलाने में कामयाब रहते हैं या नहीं?

 

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