
पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतने के लिए हर पार्टी के नेता धार्मिक स्थलों के चक्कर काटने लगे हैं. चाहे बीजेपी हो या टीएमसी खुद को सबसे बड़ा धार्मिक दिखाने की होड़ मची हुई है. इस रेस में ममता बनर्जी भी हैं. पिछले कई दिनों में अपने चुनावी प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने लगभग 22 मंदिरों के दर्शन किए हैं. वह नंदीग्राम में अपने पहले चुनावी दौरे की शुरुआत मंदिरों में दर्शन से कर रही हैं.
लगभग 1000 साल पुराना है मंदिर
कल ममता बनर्जी ने 3 मंदिरों में दर्शन किया और पूजा अर्चना की. आज नॉमिनेशन फाइल करने से पहले भी ममता बनर्जी नंदीग्राम के रेया पाड़ा में महारुद्र सिद्धनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करेंगी और फिर नॉमिनेशन के लिए निकलेंगी. नंदीग्राम में कर्मी सभा को संबोधित करते हुए ही ममता बनर्जी ने इस बात की तस्दीक कर दी थी. आज जिस मंदिर में ममता बनर्जी पूजा-अर्चना करेंगी वह शिव मंदिर है और लगभग 1000 साल पुराना है.
पुजारी ने बताई मंदिर की कहानी
मंदिर के मुख्य पुजारी के मुताबिक, प्रचलित कथा है कि यहां पर चांद सौदागर राजा हुआ करते थे, उस दौरान एक ग्वाले के हाथ से दूध गिर गया तो जमीन ने दूध सोंख लिया. इसके बाद से उस ग्वाले ने उस जमीन पर हर रोज दूध डालना शुरू किया और दूध गायब हो जाता था. जब राजा को इस बात की सूचना मिली तो उसने जमीन खुदवाई और यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया.
इस वजह से मंदिर दर्शन हो गया अहम
दरअसल इस बार बंगाल चुनाव में धार्मिक भावनाओं को भुनाने की जो कोशिश नेताओं में दिख रही है वैसी इससे पहले कभी नहीं दिखी. एक वक्त बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक को भुनाने पर ही सबका ध्यान था. लेकिन इस बार मुस्लिम वोट बैंक से ज्यादा हिंदू वोट बैंक पर राजनेताओं ने ज्यादा ध्यान दिया है. यही वजह है कि बीजेपी हो या टीएमसी दोनों के चुनाव प्रचार में मंदिर और देवी-देवता भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.