scorecardresearch
 
Advertisement
बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार का वो CM जिसकी ईमानदारी की कसमें आज भी खाते हैं लोग...

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 1/8

बिहार में एक मुख्यमंत्री ऐसे भी थे जिनकी सादगी, ईमानदारी और राजनीतिक पवित्रता का उदाहरण आज भी दिया जाता है. उदाहरण देना जायज भी है, क्योंकि आजकल राजनीति में धनबल, बाहुबल और चुनाव में करोड़ों का खर्च आजकल बेहद आम है. बिहार चुनाव की आज घोषणा होने वाली है. ऐसे में बिहार के एक ऐसे मुख्यमंत्री की बात करना जायज है जो मिसाल बन गए. ये हैं बिहार में जननायक कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर. 

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 2/8

स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर पिछड़े समुदाय से आते थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया इनके राजनीतिक गुरु थे. वे 1970 के दशक में दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे. मंडल आंदोलन से भी पहले मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था. 24 जनवरी, 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया (अब कर्पूरीग्राम) में जन्मे कर्पूरी ठाकुर बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे. 

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 3/8

मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल में कुल मिलाकर ढाई साल बिहार का शासन उनके हाथ में रहा. लोगों के बीच इतने लोकप्रिय थे कि 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे. एक और किस्सा कर्पूरी ठाकुर के बारे में मशहूर है. 1952 में कर्पूरी ठाकुर पहली बार विधायक बने थे. उन्हीं दिनों उनका ऑस्ट्रिया जाने वाले एक प्रतिनिधिमंडल में चयन हुआ था. उनके पास कोट नहीं था. तो एक दोस्त से कोट मांगा. वह भी फटा हुआ था. खैर, कर्पूरी ठाकुर वही कोट पहनकर चले गए. वहां यूगोस्लाविया के शासक मार्शल टीटो ने देखा कि कर्पूरी जी का कोट फटा हुआ है, तो उन्हें नया कोट गिफ्ट किया.

Advertisement
Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 4/8

उनकी सियासी सुचिता से जुड़ा एक और किस्सा उसी दौर का है कि उनके मुख्यमंत्री रहते ही उनके गांव के कुछ दबंग सामंतों ने उनके पिता को अपमानित किया. खबर फैली तो डीएम गांव में कार्रवाई करने पहुंच गए, लेकिन कर्पूरी ठाकुर ने कार्रवाई करने से रोक दिया. उनका कहना था कि दबे पिछड़ों का अपमान तो गांव-गांव में हो रहा है, सबको बचाए पुलिस तब कोई बात हो.

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 5/8

1960 के दशक में कांग्रेस के खिलाफ देश में समाजवादी आंदोलन तेज हो रहा था. 1967 के आम चुनाव में डॉ. राममनोहर लोहिया के नेतृत्व में गैर कांग्रेसवाद का नारा दिया गया. कांग्रेस पराजित हुई और बिहार में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी. सत्ता में आम लोगों और पिछड़ों की भागीदारी बढ़ी. कर्पूरी ठाकुर उस सरकार में उप मुख्यमंत्री बने. 1977 में जनता पार्टी की विजय के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री बने. सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग जोर-शोर से उठ रही थी. कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया.

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 6/8

1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे. लेकिन ईमानदारी ऐसी कि राजनीति में इतना लंबा सफर बिताने के बाद जब उनका निधन हुआ तो अपने परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक उनके नाम नहीं था. ना तो पटना में, ना ही अपने पैतृक घर में वो एक इंच जमीन जोड़ पाए.

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 7/8

यूपी के कद्दावर नेता हेमवती नंदन बहुगुणा ने अपने संस्मरण में लिखा- 'कर्पूरी ठाकुर की आर्थिक तंगी को देखते हुए देवीलाल ने पटना में अपने एक हरियाणवी मित्र से कहा था- कर्पूरीजी कभी आपसे पांच-दस हज़ार रुपये मांगें तो आप उन्हें दे देना, वह मेरे ऊपर आपका कर्ज रहेगा. बाद में देवीलाल ने अपने मित्र से कई बार पूछा- भाई कर्पूरीजी ने कुछ मांगा. हर बार मित्र का जवाब होता- नहीं साहब, वे तो कुछ मांगते ही नहीं.

Bihar Election 2020 Ex CM Karpuri Thakur
  • 8/8

जननायक कर्पूरी ठाकुर का निधन 64 साल की उम्र में 17 फरवरी, 1988 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था. कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा उनके गांव गए थे. कर्पूरी ठाकुर की पुश्तैनी झोपड़ी देख कर बहुगुणा रो पड़े थे. उनकी श्रद्धांजलि सभा में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी समेत कई नेता मौजूद थे. 

Advertisement
Advertisement