बिहार में बाढ़ का कहर बरकरार है. लगभग एक महीने पहले गंडक नदी का जलस्तर बढ़ जाने से गोपालगंज में 9 जगह बांध और तटबंध टूट गया था. जिससे गोपालगंज, सीवान, छपरा जिले के सैकड़ों गांव प्रभावित हुए थे. पानी कम होने के बाद लोगों ने चैन की सांस भी नहीं ली थी कि फिर एक बार बाढ़ ने तबाही मचा दी है. यहां के देवापुर गांव का आलम ऐसा है कि चारों तरफ केवल पानी ही पानी है. चुनाव की घोषणा के बाद उसमें व्यस्त अधिकारी भी यहां की सुध नहीं ले रहे. आचार संहिता की वजह नेता भी मदद नहीं कर पा रहे. (रिपोर्टः सुनील कुमार तिवारी)
स्कूल तो डूबे ही है, वही मंदिर भी मानो समुद्र के बीच डूबे दिख रहे हैं. गांव में स्थित घरों में पांच से छह फीट पानी भरने से खाने के लाले पड़ गए हैं. आलम यह है कि इन प्रभावित गांव के ग्रामीण अन्य जगहों पर शरण लेने लगे हैं. हालात आए दिन बिगड़ रहे हैं.
विधानसभा चुनाव के घोषणा के बाद अधिकारी पीड़ितों को मदद करने के लिए आगे नहीं बढ़ रहे है. वहीं, नेता आचार संहिता के भय से पीड़ितों के बीच नहीं जा रहे हैं लेकिन पीड़ित तो बेहाल है. क्या विडम्बना है कि लोग बाढ़ से परेशान और तबाह है. लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं है.
वहीं देवापुर गांव के मनीष कुमार राम ने अपने सिर पर बोझ लिए हुए पानी के अंदर से निकलते हुए कहा कि ये बाढ़ तीन दिन से आया है. जबकि इसके पूर्व एक माह पहले आया था. उस समय लगातार परेशान थे. सिर्फ 15 दिन ही पानी से छुटकारा मिला लेकिन फिर पानी आ गया. इस समय कोई सुविधा नहीं है. कोई विधायक या अधिकारी नहीं आ रहे हैं.
इस संबंध में जब देवापुर गांव के घेघी राम से पूछा गया तो उनका कहना था कि बाढ़ का पानी हमारे घर मे एक पोरस है. कोई अधिकारी नहीं देखने आ रहा है. यहां तीसरी बार बाढ़ आई है. कल से खाना नहीं खा पाए हैं क्योंकि चूल्हा कहां जलेगा. कोई साधन नहीं है.
गोपालगंज में एनएच-28 से बरौली बाजार को जाने वाली मुख्य सड़क पर बाढ़ का पानी तेज धार के साथ बह रहा है. जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. यहां सड़क के दोनों तरफ दर्जनों पेड़ थे. जो पानी के तेज बहाव में बह गए. सड़कें जगह-जगह जर्जर हो गई है. पानी से डूबे होने की वजह से इन सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है.
जिसकी वजह से अक्सर लोगों की गाड़ी तेज मझधार में फंस जा रही है. करीब 10 किलोमीटर तक इस सड़क पर पानी बह रहा है. जिसमे वैसे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी है जो अपने बच्चों को, बुजर्गो को लेकर बाइक से इस पानी भरे रास्ते में चलने को विवश है. बाढ़ पीड़ितों के मुताबिक उन्हें कोई भी जरुरी काम निपटाने के लिए ऐसे ही जान जोखिम में डाल कर कमर भर गहरे पानी में चलकर आना-जाना पड़ता है.