बिहार की राजनीति में कुछ भी संभव है. यहां पर कुर्सी हासिल करना मुश्किल तो है ही लेकिन उससे ज्यादा मुश्किल है उसे बचाए रखना. बिहार के मुख्यमंत्रियों का भी ऐसा ही इतिहास रहा है. बिहार में सीएम की कुर्सी पर अब तक 23 नेता पहुंचे हैं लेकिन इनमें से 13 ऐसे थे जो साल भर से ज्यादा अपनी कुर्सी संभाल पाए. 10 नेता तो ऐसे थे जो साल के 365 दिन भी अपनी कुर्सी बचाए रखने में सफल नहीं हुए.
सबसे कम समय तक सीएम रहने वाले बिहार के सीएम हैं सतीश प्रसाद सिंह. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता सतीश प्रसाद सिंह सिर्फ पांच दिनों के लिए ही सीएम बन पाए थे. 1967 में हुए चौथे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत हासिल नहीं कर पाई. इसलिए पहली बार बिहार में कांग्रेस के इतर कोई पार्टी सरकार में आई.
1967 में जनक्रांति दल में रहे महामाया प्रसाद सिन्हा पहले गैर-कांग्रेसी नेता थे जो सीएम तो बने लेकिन वो भी साल भर कुर्सी संभाल नहीं पाए. उन्हें 330 दिनों में ही अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी. इसके बाद सतीश प्रसाद सिंह आए लेकिन पांच दिन में चलते बने.
इसके बाद बीपी मंडल को मुख्यमंत्री बनाया गया. शपथ ली. कार्यकाल संभाला ही था कि मुश्किल से एक महीना काम कर पाए. 31 दिनों में ही इन्हें भी अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी.
इसके अलावा कांग्रेस के दीप नारायण सिंह बिहार के मुख्यमंत्री तो बने लेकिन 18 दिन से ज्यादा अपनी कुर्सी संभाल नहीं पाए. उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. दीप नारायण सिंह 1 फरवरी 1961 से 18 फरवरी 1961 तक मुख्यमंत्री रहे थे.
कांग्रेस के ही हरिहर सिंह भी 117 दिन में अपनी मुख्यमंत्री का पद और कुर्सी गंवा बैठे. क्योंकि गठबंधन की सरकार ज्यादा दिन चल नहीं पाई. ये मामला है साल 1969 का. हरिहर सिंह की कुर्सी बजट सेशन के दौरान गई थी.
अब बात करते हैं कांग्रेस के ही सत्येंद्र नारायण सिन्हा की. ये 270 दिन तक मुख्यमंत्री रहे. ये बात है 11 मार्च 1989 से 6 दिसंबर 1989 तक की. बिहार राज्य के 19वें मुख्यमंत्री थे. इन्हें बिहार में लोग प्यार से छोटे साहब भी बुलाते थे.
जीतन राम मांझी अभी हम पार्टी के कर्ताधर्ता हैं. सीएम तब बने थे जब नीतीश की पार्टी जदयू में थे. जीतन राम मांझी 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक मुख्यमंत्री रहे.
जनता पार्टी के राम सुंदर दास 302 दिनों तक सीएम रहे. ये 21 अप्रैल 1979 से 17 फरवरी 1980 तक मुख्यमंत्री रहे. इनका संबंध कई दलों से रहा है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, जनता दल और जदयू भी. 2009 से 2014 तक लोकसभा में सांसद भी रहे हैं.
दारोगा प्रसाद राय कांग्रेस पार्टी से थे. इन्होंने 16 फरवरी 1970 से 22 दिसंबर 1970 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. यानी कुल मिलाकर 310 दिन. इनकी ही पोती ऐश्वर्या राय से लालू यादव के बेटे तेज प्रताप की शादी हुई थी. जो ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाई.