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Kaimur: एक बार फंसे तो घंटों करना होगा इंतजार, ऐसा है नेशनल हाईवे-2 का हाल

नेशनल हाईवे-2 पर लगता रहता है जाम
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दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-2 जाम के झाम से जूझ रहा है. हालत ये है कि जाम के चलते 10 से 12 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं. एक बार यदि यहां फंस गए, तो घंटों इंतजार करना पड़ता है. इस हाईवे पर जाम लगने का मुख्य कारण बालू के ओवरलोड ट्रक हैं.  

(रिपोर्ट: रंजन कुमार त्रिगुण)

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दरअसल, कैमूर से सटे रोहतास जिले की सोन नदी में बारिश के तीन महीने जुलाई, अगस्त और सितंबर में बालू खनन पर पूरी तरह रोक रही. अक्टूबर शुरू होती ही बालू खनन फिर से शुरू हो गया. खनन शुरू होते ही बालू से लदे ओवरलोड ट्रक एनएच-2 पर दिखाई देने लगे हैं. इसके कारण हाईवे पर एक बार फिर से जाम लगना शुरू हो गया है. हालांकि इस हाईवे को हाल ही में सिक्स लेन कर दिया गया है, लेकिन फिर भी जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है. 

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हजारों की संख्या में ट्रक प्रतिदिन बालू लादकर कैमूर जिले के रास्ते से उत्तर प्रदेश में जाते हैं. इन बालू लदे ओवरलोडेड वाहनों को रोकने के लिए वैसे तो जिले में खनन और परिवहन के तमाम अधिकारी लगे हुए हैं, उसके बाद भी ओवरलोडिंग बंद नहीं हो पा रही है. बताया गया है कि बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रकों और वाहनों के गुजरने के कारण दिसंबर 2019 में कर्मनाशा नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद 14 दिन तक ये हाईवे बंद कर दिया गया. इसके बाद एनएचआई ने दो करोड़ की लागत से कर्मनाशा नदी के क्षतिग्रस्त पुल के पास डायवर्जन बना दिया. ये डायवर्जन भी बाढ़ के पानी में डूब गया. इसके बाद यहां स्टील​ के पुल का ​निर्माण कर दिया गया.

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कर्मनाशा नदी पर बनाए गए स्टील पुल पर 50 टन तक वजन वाले वाहन को गुजरने की परमिशन है. एनएचएआई के इंजीनियर्स का कहना है कि यदि इससे अधिक वजन के वाहन गुजरेंगे, तो पुल के ​क्षतिग्रस्त होने का खतरा है. वहीं बताया गया है कि ओवरलोडेड वाहनों से जब उनका वजन कराकर इस पुल से गुजारने का काम शुरू हुआ, तो इस प्रक्रिया से और भी देर होने लगी. वहीं झगड़े भी शुरू हो गए. इसके बाद एनएचआई ने इस पुल से एक-एक वाहनों को बारी बारी से स्टील ब्रिज से पार कराने का काम शुरू कर दिया. अब इस से प्रतिदिन 10 से 12 किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है.

 

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एनएचएआई के टोल प्लाजा मैनेजर अभिषेक कुमार बताते हैं कि यहां से प्रतिदिन बालू लदे दो हजार ट्रक औसतन गुजरते हैं. उन्होंने बताया कि जाम लगने का मुख्य कारण इन ट्रकों को बारी-बारी से पुल पार कराना है. यदि ऐसा नहीं करते तो ओवरलोड वाहनों से पुल को खतरा है. उन्होंने बताया कि स्टील ब्रिज का प्रतिदिन मेंटेनेंस होता है, जिससे कि ब्रिज सुरक्षित रहे. अक्टूबर माह में मुख्य ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो सकता है.

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