दरभंगा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डीएमसीएच के सर्जिकल भवन की हालत ऐसी है कि कब यह पूरी बिल्डिंग गिर जाए कुछ कह नहीं सकते. गरीब मरीजों का इलाज भी मौत के साए में ही होता है. इसी जर्जर भवन में डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ काम करते हैं. इस बिल्डिंग में मरीज़, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और सफाईकर्मी मिलाकर हमेशा 300 से 400 लोग रहते हैं. अस्पताल की हालत देख लगता है कि सबकी जान खतरे में है. (रिपोर्टः प्रह्लाद कुमार)
सरकारी अस्पताल डीएमसीएच का सर्जिकल भवन बहुत बुरी हालत में है. यहां जगह-जगह छत के प्लास्टर टूटे हैं. जंग लगे लोहे के छड़ दिखाई दे रहे हैं. बिल्डिंग के ज्यादातर पिलर भी जवाब दे चुके हैं. जगह-जगह सरिए बाहर निकले हुए हैं. बिल्डिंग की रेलिंग कहीं अधूरी है तो कहीं पूरी तरह से गायब है. बिल्डिंग के दूसरे तीसरे तल्ले पर बड़े बड़े-पेड़ उग आए हैं.
अस्पताल की खिड़कियां और दरवाजे टूट-फूट कर आधे-अधूरे बचे हैं. अस्पताल में गंदगी ऐसी कि स्वस्थ आदमी भी बीमार हो जाए. न जाने कब कहां से कोई इंफेक्शन हो जाए, कहा नहीं जा सकता. इन गंदगियों के बीच आवारा पशु, सुअर, गाय, कुत्ता भी अस्पताल में घूमते-फिरते और आराम फरमाते नजर आते हैं.
जर्जर अस्पताल भवन को बरसों पहले ही भवन निर्माण विभाग रहने लायक नहीं बताते हुए इसे तुरंत खाली करने को कह चुका है. नगर विधायक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह सत्य है कि बिल्डिंग रहने लायक नहीं जर्जर है. भवन निर्माण विभाग इसे खाली करने को कह चुका है.
सरकार ने नए भवन के लिए 240 करोड़ रुपये दिए हैं. न्यू सर्जिकल भवन तेज़ी से बन रहा है. लेकिन जब तक नई बिल्डिंग नहीं बनती गरीब लोगों का इलाज नहीं बंद किया जा सकता है. दूसरी तरफ मरीज से मिलने आए परिजन राजेश कुमार ने बताया कि अस्पताल की बिल्डिंग बहुत खराब है, यहां आने से डर लगता है. न जाने कब क्या अनहोनी हो जाए. भवन खराब तो है लेकिन इसकी कोई मरम्मत भी नहीं हो रही है. इससे हालत और खराब हो गई है.
अगर अधिकारी इस ओर ध्यान दे देते तो शायद कुछ अच्छा हो जाता. हालांकि डॉक्टर और स्टाफ इलाज़ में कोई कमी नहीं कर रहा है. वहीं, अपने बेटे का इलाज़ करा रहे राम नारायण ने भी अस्पताल में इलाज़ सही होने की बात करते हुए कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग की दुर्दशा देख उन्हें डर तो लगता है, लेकिन गरीब होने के कारण उनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है.