बिहार में चुनाव को लेकर माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है. यह जानकारी भी सामने आई है कि बिहार चुनाव होंगे लेकिन कोरोना वायरस की वजह से काफी सख्ती बरती जाएगी. एक तरफ नीतीश कुमार की सरकार और उनका खुद का चेहरा है. दूसरी तरफ राजद और महागठबंधन. लेकिन मुद्दा ये है कि क्या इस बार राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव चुनावी मैदान में दिखाई देंगे.
हाल ही में लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव से पहले लालू यादव जेल से बाहर आ सकते हैं. लालू इस समय चारा घोटाले में रांची के रिम्स अस्पताल में सजा काट रहे हैं. तेजस्वी ने इस बात का इशारा किया था कि अक्टूबर तक लालू जेल से बाहर आ जाएंगे.
चुनावों को देखते हुए सभी दल अपने गठबंधन और रणनीति को फाइनल करने में जुट गए हैं. मुकाबला नीतीश की अगुवाई वाले एनडीए और तेजस्वी के चेहरे के साथ उतर रहे महागठबंधन के बीच ही होता दिख रहा है. लेकिन सबकी निगाहें लालू पर टिकी हुई है.
लालू पर खासतौर से निगाहें इसलिए भी हैं क्योंकि बिहार की सियासत में लालू से ज्यादा अनुभव किसी के पास नहीं है. लालू के पास 43 साल का लंबा राजनीतिक अनुभव है. चारा घोटाले में सजा सुनाए जाने के बाद 2014 से लालू चुनाव में नहीं उतर सके.