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बिहार चुनाव 2020: तीसरे चरण में बड़ी पार्टियों के 50% उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस

बीईडब्ल्यू और एडीआर ने बिहार में तीसरे चरण के चुनाव के लिए 78 सीटों पर चुनाव लड़ रहे 1,204 में से 1,195 उम्मीदवारों के हलफनामे का विश्लेषण किया. अध्ययन में पाया गया कि कुल उम्मीदवारों में से 31 फीसदी या 371 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

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बिहार में कल शनिवार को तीसरे चरण के मतदान के लिए जाते सुरक्षाकर्मी (पीटीआई)
बिहार में कल शनिवार को तीसरे चरण के मतदान के लिए जाते सुरक्षाकर्मी (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • BJP-कांग्रेस दोनों में 76% दागी प्रत्याशी
  • नरपतगंज में सबसे ज्यादा 10 दागी उम्मीदवार
  • राज्य में 7 नवंबर को तीसरे चरण की वोटिंग
  • 10 नवंबर को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे

बिहार में अंतिम चरण का चुनाव लड़ने वाले करीब एक तिहाई उम्मीदवारों पर रेप, हत्या और फिरौती वसूलने जैसे गंभीर अपराध के आरोप हैं. ये बातें बिहार इलेक्शन वॉच (BEW) और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के एक अध्ययन में सामने आई हैं. राज्य में 7 नवंबर को तीसरे चरण की वोटिंग होगी और 10 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे.

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तीसरे चरण में सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार दो राष्ट्रीय पार्टियों- बीजेपी और कांग्रेस (दोनों में 76 फीसदी) में हैं. इसके बाद आरजेडी का नंबर है जिसके 73 फीसदी उम्मीदवार दागी हैं. जेडीयू के 57 फीसदी और एलजेपी के 43 फीसदी उम्मीदवार दागी हैं. ये आंकड़े उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों से लिए गए हैं, जिनमें उम्मीदवारों ने खुद उनके खिलाफ आपराधिक मामलों का ब्योरा दिया है.

बीईडब्ल्यू और एडीआर ने बिहार में तीसरे चरण के चुनाव के लिए 78 सीटों पर चुनाव लड़ रहे 1,204 में से 1,195 उम्मीदवारों के हलफनामे का विश्लेषण किया. अध्ययन में पाया गया कि कुल उम्मीदवारों में से 31 फीसदी या 371 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इसके अलावा, 282 उम्मीदवारों (24 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

अधिकांश बड़े दलों ने 50 फीसदी से ज्यादा टिकट गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे उम्मीदवारों को दिए हैं. इस चरण के लिए बीजेपी ने कुल 34, जेडीयू ने 37, आरजेडी ने 44, कांग्रेस ने 25 और एलजेपी ने 42 उम्मीदवार उतारे हैं.

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रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यधारा की पार्टियों- बीजेपी, कांग्रेस और आरजेडी के करीब हर दूसरे उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड है. बड़े राजनीतिक दलों के हर पांच उम्मीदवारों में से औसतन दो ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

बीजेपी के दो-तिहाई उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इसके बाद कांग्रेस के 56 फीसदी और आरजेडी के आधे उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर अपराध के केस हैं. जेडीयू ने 30 फीसदी और एलजेपी के 26 फीसदी उम्मीदवार दागी छवि के हैं.

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रिपार्ट में कहा गया है, “यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि राजनीतिक दलों को चुनाव प्रणाली में सुधार करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारा लोकतंत्र इसकी कीमत इस तरह चुकाएगा कि कानून तोड़ने वालों को ही कानून बनाने की जिम्मेदारी दी जाती रहेगी.”हालांकि, सियासी पार्टियां ऐसी छवि के उम्मीदवारों के पक्ष में हर समय स्पष्टीकरण देती हैं कि वे चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं.

जिन 78 सीटों पर वोटिंग होने जा रही है, उनमें से 53 सीटों पर कम से कम तीन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक केस चल रहे हैं. नरपतगंज में सबसे ज्यादा 10 दागी उम्मीदवार हैं, इसके बाद खजौली (9), बाजपट्टी (8) और सहरसा (8) हैं.

ऐसा लगता है कि सिर्फ आपराधिक छवि ही नहीं, बल्कि करोड़पतियों में भी राजनीतिक दलों की खूब दिलचस्पी है. तीसरे चरण में चुनाव लड़ने वाले बीजेपी के 90 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवार करोड़पति हैं. इसके बाद जेडीयू (81 फीसदी), आरजेडी (80 फीसदी), एलजेपी (74 फीसदी) और कांग्रेस (68 फीसदी) ने सबसे ज्यादा करोड़पतियों को मैदान में उतारा है.

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