बिहार में बेगूसराय जिला राजनीतिक रूप से बेहद मुखर रहा है. यहां एक जमाने में सीपीआई की धाक हुआ करती थी. बीते कुछ वर्षों से सुर्खियों में रहे युवा चेहरे कन्हैया कुमार इसी जिले से आते हैं. गंगा के किनारे बसे इस जिले की आमदनी का मुख्य जरिया कृषि ही है, लेकिन यह बिहार की औद्योगिक नगरी के रूप में भी अपनी पहचान बनाए हुए है. बेगूसराय की एक और पहचान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली के रूप में भी रही है.
बेगूसराय के लोग वैचारिक रूप से बेहद प्रतिभाशाली रहे हैं. अपने हक-हुकूक की आवाज बुलंद करते आए हैं. कभी यहां सीपीआई बेहद मजबूत थी, लेकिन 2014 में मोदी लहर के मजबूत होने के साथ ही सीपीआई की पकड़ ढीली पड़ती गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई के टिकट पर कन्हैया कुमार चुनाव लड़े, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी गिरिराज सिंह के तिलिस्म के आगे वे कमजोर साबित हुए. इस बार विधानसभा चुनाव में जिले की सातों सीटों पर दिलचस्प लड़ाई होने की उम्मीद है. महागठबंधन के उम्मीदवारों के सामने आरजेडी की चुनौती होगी. कयास लगाए जा रहे कि इस बार बीजेपी जिले की सात में से चार सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी.
भूमिहार मतदाताओं की भूमिका अहम
बेगूसराय में भूमिहार मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक रहती है. इसकी बानगी इससे भी मिलती है कि जिले की इकलौती संसदीय सीट पर पिछले 10 बार में से 9 बार भूमिहार ही सांसद चुना गया है. बेगूसराय के 19 लाख वोटरों में ऊंची जाति के भूमिहारों की संख्या लगभग 19 फीसदी है, जबकि दूसरे नंबर पर 15 फीसदी वोटरों के साथ मुसलमान हैं. 12 फीसदी यादव हैं और 7 लगभग फीसदी कुर्मी वोटर है.
सामाजिक तानाबाना
1918 वर्ग किलोमीटर में बसे बेगूसराय की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 33 लाख है. जिले की कुल आबादी का 52 प्रतिशत पुरुष और 48 प्रतिशत महिलाएं हैं. यहां औसत साक्षरता दर 65 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय साक्षरता दर के करीब है. महिला साक्षरता दर 41% तथा पुरुष साक्षरता दर 51% है. गंगा नदी के उत्तरी तट पर यह जिला बसा है. मुंगेर से अलग कर बेगूसराय को 1972 में अलग जिला घोषित कर दिया गया.
नाम के पीछे है दिलचस्प कहानी
बेगूसराय नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. बेगम यानी रानी और सराय. कहा जाता है कि भागलपुर की बेगम तीर्थयात्रा के लिए गंगा में एक पवित्र स्थान सिमरिया घाट में एक महीने के लिए आती थीं. इसके बाद ही धीरे-धीरे यह नाम आज का बेगूसराय हो गया.
इस जिले की एक और खास बात है. महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली यही जिला है. हालांकि उनके जन्म के वक्त जिला मुंगेर था, जो बाद में अलग होकर बेगूसराय बना. जय मंगला मंदिर, नौलखा मंदिर और काबर झील पर्यटन स्थल हैं. सांस्कृतिक रूप से यह जिला काफी समृद्ध है. राज्य में मैथली बोली जाती है.
उद्योग भी यहां की पहचान
जिले को राज्य की औद्योगिक नगरी के रूप में भी जानते हैं. यहां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, NTPC और हिंदुस्तान यूरिया रसायन लिमिटेड (HURL) है. यहां अधिकतर लोग खेती करते हैं. खरीफ, धान, उरद, मसूर, रबी, गेहूं, मक्का, मटर, सरसों, सूरजमुखी, जिला की प्रमुख फसलें हैं.
2015 का जनादेश
बेगूसराय जिले में कुल 7 विधानभा सीटें आती हैं. इनमें छेरिया बरियारपुर, मटिहानी, बखरी, बछवाड़ा, साहेबपुर कमल, तेघरा और बेगूसराय विधानसभा सीटें शामिल हैं. इस सात सीटों में बखरी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. छेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट पर पिछली बार जेडीयू की मंजू वर्मा ने 69795 वोटों के साथ बाजी मारी थी. वहीं दूसरे नंबर पर एलजेपी के अनिल कुमार ने 40 हजार 59 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे.
वहीं मटिहानी सीट पर भी जेडीयू के ही नरेंद्र कुमार सिंह ने 89297 वोट हासिल किए थे. दूसरे नंबर पर बीजेपी प्रत्याशी सर्वेश को 66609 वोट मिले थे. बखरी सीट पर आरजेडी के उपेंद्र पासवान 72632 वोट के साथ पहले और बीजेपी के रामानंद 32376 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे. बछवाड़ा सीट पर कांग्रेस ने बाजी मारी. यहां से कांग्रेस प्रत्याशी रामदेव राय 73983 वोट के साथ पहले, 37052 वोट के साथ एलजेपी के अरविंद दूसरे नंबर पर रहे.
साहेबपुर कमल सीट पर आरजेडी केक श्रीनारायण यादव 78225 वोट के साथ पहले नंबर पर रहे. एलजेपी के एमडी असलम 32751 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे. तेघरा सीट पर आरजेडी के बीरेंद्र कुमार 68975 वोट के साथ पहले और बीजेपी के रामलखन 53364 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे. वहीं बेगूसराय विधानसभा सीट पर कांग्रेस की अमिता भूषण 83521 वोट के साथ अव्वल रहीं. दूसरे नंबर पर बीजेपी के सुरेंद्र 66990 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे.