बिहार में बीजेपी अपनी खोई हुई सियासी जमीन को दोबारा से वापस पाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गई है. 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू और नीतीश ने यादव के समीकरण में बीजेपी का खेल ऐसा बिगड़ा था कि बिहार के 14 जिलो में खाता ही नहीं खुल सका था. बीजेपी अपनी परंपरागत सीटों को भी नहीं बचा सकी थी. हालांकि, एक बार फिर से जेडीयू और बीजेपी एक साथ मैदान में उतर रहे हैं और ऐसे में देखना कि नीतीश के साहरे क्या बीजेपी यहां कमल खिलाने में कामयाब रहती है या फिर नहीं?
इन जिलों में कमल नहीं खिला था
बिहार के शिवहर, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, शेखपुरा, भोजपुर, जहानाबाद, अरवल और बक्सर ऐसे जिले हैं, जहां महागठबंधन की सियासी ताकत के आगे बीजेपी पूरी तरह से धराशाही हो गई थी. इन 14 जिलों की कुल 61 विधानसभा सीटों में से एक भी सीट पर बीजेपी कमल नहीं खिला सकी थी. वहीं, जेडीयू ने 29, आरजेडी ने 22, कांग्रेस ने 9 और एक सीट पर सीपीआई माले ने जीत का परचम लहराया था.
एनडीए की नजर 32 सीटों पर
बिहार का राजनीतिक समीकरण इस बार के चुनाव में बदल गया है. नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होकर एक बार फिर एनडीए खेमे के अगुवा हैं. ऐसे में एनडीए के निशान पर कांग्रेस, आरजेडी और माले की 32 विधानसभा सीटे हैं, क्योंकि ये तीनों इस बार महागठबंधन का हिस्सा हैं. ऐसे में जेडीयू को अपनी सीटें बचाए रखने की चुनौती है तो बीजेपी को अपनी परंपरागत सीटों को वापस आरजेडी और कांग्रेस से छीनने का चैलेंज है. भाजपा अपनी परंपरागत सीटों पर जीत की रणनीति बना रही है. सीटों के बंटवारे में उसे जो भी क्षेत्र मिले, पर इस बार उसके निशाने पर आरजेडी और कांग्रेस ही रहेगी.
बीजेपी के दिग्गज भी नहीं बचा सके सीट
महागठबंधन की लहर में बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता भी अपनी परंपरागत सीट नहीं बचा पाए थे. भागलपुर में अश्वनि चौबे के बेटे की पराजय हुई थी तो आरा की सीट पर विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह भी अपनी सीट नहीं बचा पाए थे. बीजेपी इस बार नीतीश के सहारे अपनी खोई हुई सियासी ताकत दोबारा से पाने के लिए बेताब है. सीमांचल की सीटों पर ओवैसी की पार्टी दमदारी से लड़ रही है तो दूसरी तरफ एनडीए की भी घेरा बंदी करने में जुटी है, जिसके चलते आरजेडी और कांग्रेस की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
बीजेपी की बिहार प्लानिंग
बता दें बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में लिए जबरदस्त तैयारी कर रखी है. बीजेपी ने एक तरफ जेडीयू और एलजेपी के साथ मजबूत गठबंधन कर रखा है तो दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रबंधन करने के लिए अपने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को भी कमान सौंप रखी है. अलग-अलग क्षेत्र में बेहतर ऑउटपुट और चुनाव से जुड़े हर संबंधित क्षेत्र में मजबूती से काम करने के लिए इन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी है.
केंद्रीय कानून मंत्री और पटना साहिब सांसद रविशंकर प्रसाद को सोशल मीडिया, विज्ञापन, पार्टी से जुड़े स्लोगन एवं नैरेटिव समेत अन्य कार्यों के लिए दायित्व सौंपा गया है. इस काम में सांसद राजीव प्रताप रूडी और राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन सहयोग करेंगे. आरा से सांसद व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को बूथ स्तर पर मैनेजमेंट के अलावा चुनाव आयोग से जुड़े कार्यों या किसी तरह की शिकायत का दायित्व सौंपा गया है. वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को क्षेत्र भ्रमण कर जनसंपर्क अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गयी है.