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बिहार चुनाव: पहले चरण की आधी से ज्यादा सीटों पर बागी ठोक रहे ताल, किसका बिगाड़ेंगे खेल

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी और एलजेपी सभी पार्टियां अपने बागी नेताओं से जूझ रही हैं. इसके चलते जेडीयू और आरजेडी के कई दिग्गज नेताओं की सीट भी फंस गई है, जिनके सामने बागी चुनावी मैदान में उतरे हैं.

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नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, तेजस्वी यादव
नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, तेजस्वी यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी के ज्यादा नेताओं ने बागी रुख अपनाया
  • जेडीयू के नेता निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे हैं
  • एलजेपी के सुनील पांडेय निर्दलीय चुनाव लड़ रहे

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 71 सीटों में से 42 सीटों पर तमाम राजनीतिक दलों के बागी ताल ठोक रहे हैं. इनमें बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी और एलजेपी सभी पार्टियां अपने बागी नेताओं से जूझ रही हैं. इसके चलते जेडीयू और आरजेडी के कई दिग्गज नेताओं की सीट भी फंस गई है, जिनके सामने बागी चुनावी मैदान में उतरे हैं. हालांकि, वे खुद को कल तक पार्टी का सच्चा सिपाही बताते फिर रहे थे, पर टिकट न मिलने पर दलबदल कर मुसीबत बन गए हैं.
 

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हर दल बागी से जूझ रहा है
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सबसे ज्यादा बागी रुख बीजेपी नेताओं ने अपनाया है. बीजेपी के उन नेताओं ने खासतौर से बागी रुख अपनाया है, जिनकी सीटें जेडीयू या दूसरे सहयोगी दलों के पास चली गई हैं. 23 बीजेपी नेताओं ने बगावत का झंडा बुलंद कर सहयोगी दलों के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. बागियों का सामना करने के मामले में जेडीयू दूसरे नंबर पर है. जेडीयू से बगावत कर अब तक 17 लोग चुनावी मैदान में उतर गए हैं जबकि आरजेडी के 12 और कांग्रेस के तीन बागी नेता मैदान में ताल ठोक रहे हैं. 

बीजेपी छोड़कर एलजेपी से उतरे
बिहार में सीट शेयरिंग के चलते सबसे ज्यादा एनडीए और महागठबंधन दोनों को बागी नेताओं का सामना करना पड़ रहा है. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और संघ प्रचारक रहे राजेंद्र सिंह की दिनारा सीट जेडीयू के खाते में चली गई है, जिसके चलते एलजेपी से चुनावी मैदान में हैं.

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इसी तरह से संदेश सीट जेडीयू के खाते में गई तो बीजेपी में बगावत हुई. बीजेपी नेता श्वेता सिंह ने रातों रात दल बदल लिया और एलजेपी का टिकट लेकर मैदान में उतर गईं. अमरपुर में पिछले चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी रहे डॉ. मृणाल शेखर ने भी बगावत कर दी और एलजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं. 

ऐसे ही दूसरे बीजेपी नेता पप्पू सिंह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी से नामांकन किया है और वजीरगंज सीट पर बीजेपी के राजीव कुमार ने पप्पू यादव की पार्टी जाप के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं. ब्रह्मपुर से बीजेपी का टिकट नहीं मिलने पर भरत शर्मा निर्दलीय मैदान में उतरे हैं.  

जेडीयू के बागी आजमा रहे किस्मत
डुमरांव सीट पर जेडीयू ने अंजुम आरा को टिकट दिया है, जिसके चलते यहां जेडीयू के पूर्व विधायक ददन यादव नाराज हो गए और निर्दलीय ही मैदान में उतर गए. कहलगांव सीट से से भागलपुर के जेडीयू सांसद अजय कुमार मंडल के भाई और जेडीयू नेता अनुज कुमार मंडल एनसीपी उम्मीदवार हो गए हैं.

ऐसे ही जेडीयू की महिला प्रकोष्ठ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कंचन गुप्ता ने भी बगावत कर दी है और उन्होंने भी निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है. सूर्यगढ़ा सीट पर जेडीयू के लखीसराय विधानसभा के प्रभारी रविशंकर प्रसाद सिंह एलजेपी से मैदान में हैं. जेडीयू अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव गणेश कुमार बिंद ने आरएलएसपी से नामांकन कर मैदान में उतरे हैं. 

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आरजेडी में भी बगावत
बिहार में आरजेडी ने भी अपनी मौजूदा 6 विधायकों की सीटें सहयोगी दलों को दे दी है. इसके अलावा 11 विधायकों के टिकट काटे हैं, जिसके चलते आरजेडी नेता बगावती रुख अख्तियार किए गुए हैं. टिकारी में आरजेडी नेता कमलेश शर्मा एलजेपी से उम्मीदवार हैं. टिकारी से ही आरजेडीके पूर्व विधायक शिवबचन यादव बसपा से चुनावी ताल ठोक रहे हैं. तारापुर सीट पर कांग्रेस में बगावत हुई है. राजेश कुमार मिश्रा बागी हो गए हैं और निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं. 

ऐसे ही तरारी सीट बीजेपी के खाते में गई तो एलजेपी में बगावत हो गई. एलजेपी छोड़कर पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय ने निर्दलीय ही ताल ठोक दी. इसी तरह बोधगया, इमामगंज, शेरघाटी, रफीगंज, औरंगाबाद, कुटुंबा, नबीनगर, ओबरा,गोह, मखदुमपुर, घोसी, जहानाबाद, अरवल, डुमरांव, शाहपुर, जगदीशपुर, आरा, बड़हरा, संदेश, बरबीघा और लखीसराय में बागी ताल ठोक रहे हैं.

 

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