बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन में सीटों का बंटवारा बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. महागठबंधन के सहयोगी दल एक के बाद एक साथ छोड़ते जा रहे हैं. जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशावाह के बाद सीपीआई माले ने भी अपने कैंडिडेट उतार दिए हैं.
वहीं, कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीटों को लेकर तल्खी बढ़ती जा रही है. आरजेडी का ऑफर कांग्रेस को मंजूर नहीं. दिल्ली में कांग्रेस की बैठक के बाद पार्टी के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने अलग राह पकड़ने तक की धमकी दे दी है, जिसके बाद नए सिरे से सीट शेयरिंग को सुलझाने की कवायद की जा रही है.
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बिहार के अपने नेताओं को दिल्ली तलब किया था. इसके बाद कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने बिहार चुनाव के मद्देनजर बुधवार को बैठक की, जिसमें आरजेडी के साथ सीटों के तालमेल और पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा की गई. इस बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख अविनाश पांडे और सदस्य देवेंद्र यादव, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मदन मोहन झा और कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
दरअसल सीटों के बंटवारे को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच खींचतान जारी है. कांग्रेस ने इस बार ज्यादा सीटों के साथ-साथ मनपंसद सीटों पर चुनाव लड़ने की डिमांड की है, जिसे लेकर पेंच फंसा हुआ है. कांग्रेस को आरजेडी 58 विधानसभा और वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट देने का प्रस्ताव दिया है, जिसे कांग्रेस ने खारिज कर दिया है. कांग्रेस ने विधानसभा में कम से कम 75 सीटों की मांग की है और उसमें भी मनपंसद सीटें मांग रही है, जिस पर तेजस्वी यादव सहमत नहीं हो रहे हैं.
दिल्ली में बिहार नेताओं के साथ कांग्रेस की बैठक के बाद शक्ति सिंह गोहिल ने साफ कहा कि महागठबंधन में अगर कुछ ऊपर नीचे होता है तो हम अपने अन्य दलों के साथ चुनाव में जाने को तैयार हैं. इससे पहले बिहार चुनाव के कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय ने भी सम्मानजनक सीटें न मिलने पर सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का संकेत दिया था. वहीं, आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद सिंह ने कहा कि आरजेडी हमेशा कांग्रेस के साथ खड़ी रही लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी का समर्थन किया लेकिन कांग्रेस अब आरजेडी की ही गर्दन दबाने में लगी है.
महागठबंधन में मामला सीटों की संख्या के साथ-साथ मनपंसद सीटों को लेकर भी फंसा हुआ है. आरजेडी 65 से 70 सीटें कांग्रेस को इस शर्त के साथ देने को तैयार है कि इसमें से करीब एक दर्जन सीटें शहरी क्षेत्र की होंगी. कांग्रेस इन शहरी सीटों के बजाय अपने मनपंसद की सीटें चाहती है, जिस पर आरजेडी तैयार नहीं हो रही है. आरजेडी का राजनीतिक ग्राफ शहरी सीटों के बजाय ग्रामीण इलाके वाली सीटों पर ज्यादा है. इसीलिए कांग्रेस और आरजेडी सीट शेयरिगं को लेकर मामला फंसा हुआ है. ऐसे में अब दोबारा से महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मंथन चल रहा है.
गौरतलब है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी. आरजेडी 101 पर लड़ी थी 80 जीती थी जबकि जेडीयू 101 पर लड़ी थी 71 जीती थी. इस बार कांग्रेस अपने राजनीतिक ग्राफ को बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रही है, क्योंकि नीतीश कुमार भी इस बार महागठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. साल 2000 से कांग्रेस आरजेडी का बिहार में गठबंधन हुआ था.