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कौन है 'सन ऑफ मल्लाह', जिसने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तेजस्वी के नेतृत्व पर उठाए सवाल

बिहार में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. सीटों को बंटवारे को लेकर गठबंधनों में मनमुटाव चरम पर है. शनिवार को महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश साहनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी नाराजगी जताई जिसकी तेजस्वी प्रसाद ने कल्पना भी नहीं की होगी.

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वीआईपी पार्टी ने चुनाव से पहले महागठबंधन से तोड़ा नाता (फोटो साभार: Twitter)
वीआईपी पार्टी ने चुनाव से पहले महागठबंधन से तोड़ा नाता (फोटो साभार: Twitter)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महागठबंधन से अलग हो चुके हैं मुकेश साहनी
  • मुकेश साहनी को ही कहते हैं सन ऑफ मल्लाह
  • 2018 में मुकेश साहनी ने बनाई थी अपनी पार्टी

बिहार में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. सीटों को बंटवारे को लेकर गठबंधनों में मनमुटाव चरम पर है. शनिवार को महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश साहनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी नाराजगी जताई जिसकी तेजस्वी प्रसाद ने कल्पना भी नहीं की होगी. कुछ देर पहले तेजस्वी और तेज प्रताप से बतियाते नजर आ रहे मुकेश साहनी ने कहा था, "मेरे साथ धोखा हुआ है. पीठ पर खंजर घोपा गया है."

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रविवार को एक अन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुकेश ने फिर तेजस्वी यादव पर हमला बोला और तेज प्रताप को महागठबंधन का चेहरा बनाने की वकालत की. मुकेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आरजेडी नेतृत्व बदले और तेजप्रताप को नेता बनाए तो वे महागठबंधन में लौटने पर विचार कर सकते हैं. अपनी अग्रिम रणनीति से पर्दा हटाते हुए सहनी ने कहा कि वे सभी दलों से संपर्क में हैं और जल्द ही नए कदम का ऐलान करेंगे. उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि कोई बड़ा मोर्चा न बना तो अकेले मैदान में उतरेंगे. 

आपको बता दें कि मुकेश साहनी का राजनीतिक इतिहास बहुत लंबा नहीं है. लेकिन राजनीतिक गठजोड़ की उनकी फेहरिस्त बहुत ही कम समय में काफी लंबी हो चुकी है. मुकेश 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी का चुनाव प्रचार किया. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वो यूपीए में शामिल हो गए और महागठबंधन के लिए प्रचार किया. अब 2020 के विधानसभा चुनावों में एकबार फिर अपना रास्ता महागठबंधन से अलग कर चुके हैं.

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बिहार में ऐसे चर्चा में आया 'सन ऑफ मल्लाह'

मुकेश साहनी का राजनीतिक इतिहास खासा लंबा नहीं है. मुकेश साहनी ने पैसों के दम पर बिहार की राजनीति में एंट्री मारी थी. 2013 की एक सुबह बिहार में लोगों ने अपने हाथों में अखबार (अंग्रेजी-हिंदी दोनों) उठाया तो उनका सामना 'सन ऑफ मल्लाह- मुकेश साहनी' के चेहरे से हुआ. यह ऐसा नाम था जिसके बारे में उन दिनों लोग कम ही जानते थे. उस विज्ञापन के बाद अखबारों में मुकेश का एक और विज्ञापन छपा जिसमें उनका मोबाइल नंबर भी शेयर किया गया था. इसके बाद अखबारों, सोशल मीडिया और बिहार की जनता के बीच 'सन ऑफ मल्लाह' छाता चला गया. यही नहीं मुकेश साहनी का ट्विटर हैंडल भी सन ऑफ मल्लाह के नाम से है.

इस वजह से बीजेपी को खास लगे थे मुकेश

माना जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले मुकेश साहनी की बढ़ती लोकप्रियता को मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भांप लिया था. दरअसल इसके पीछे सिर्फ उनकी लोकप्रियता ही नहीं जातीय फैक्टर भी था जिसने एनडीए को उन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए मजबूर किया. आपको बता दें कि मुकेश मल्लाह जाति के हैं. बिहार में इस समय इनका कोई बड़ा नेता नहीं है. बिहार में मछुआरों व नाविकों की जाति में आने वाले मल्लाह, साहनी, निषाद, बिंद जैसी अति पिछड़ी जातियों की आबादी काफी ज्यादा है और राज्य की 10 से 15 लोकसभा सीटों पर वे निर्णायक भूमिका निभाते हैं. लोकसभा चुनावों में मुकेश साहनी को एनडीए के पक्ष में वोट मांगते देखा गया.

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निषाद नेता के तौर पर पहचान बनाना चाहते हैं मुकेश साहनी

इसके बाद 2015 के विधानसभा चुनावों में मुकेश सहनी की राजनीतिक ताकत को पहली बार बड़ी पहचान मिली. उस वक्त उनका नाम एनडीए के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल था. बीजेपी को भरोसा था कि मुकेश साहनी 'सन ऑफ मल्लाह' की वजह से एनडीए को मल्लाहों का वोट जरूर मिलेगा. लालू-नीतीश की एकजुटता से घबराई बीजेपी को मुकेश से काफी आस थी. हालांकि चुनाव परिणाम एनडीए के पक्ष में नहीं आए जिसके बाद एनडीए से मुकेश की दूरियां बढ़ने लगीं. जिसके बाद उन्होंने एकबार फिर मुंबई पर फोकस किया लेकिन लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही फिर से बिहार में वापसी कर ली.

2018 में मुकेश ने बनाई अपनी पार्टी

मुकेश साहनी ने 2019 के लोकसभा चुनावों की घोषणा से कुछ महीने पहले ही नवंबर 2018 में अपनी अलग पार्टी की घोषणा की थी. राजनीति में वीआईपी तरीके से एंट्री लेने वाले मुकेश ने अपनी पार्टी का नाम विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) रखा. मुकेश की पार्टी का चुनाव चिन्ह भी उनकी जाति के पेशे से काफी हद तक मेल खाता है. जी हां, पानी में तैरती नाव ही वीआईपी का चुनाव चिन्ह है.

2019 के चुनावों में पीएम मोदी के 'चाय पर चर्चा' की तरह ही मुकेश ने 'माछ पर चर्चा' कर सुर्खियां बटोरी थीं. उन दिनों मुकेश का नारा हुआ करता था 'माछ भात खाएंगे महागठबंधन को जिताएंगे'. 2019 में मुकेश ने खगड़िया लोकसभी सीट से किस्मत आजमाई थी लेकिन बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था.

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सामाजिक जीवन में पहले ही कर चुके थे एंट्री

राजनीति में भले ही मुकेश साहनी की पहचान 2014 के लोकसभा चुनावों में बनी हो लेकिन सामाजिक जीवन में मुकेश साहनी ने 2010 में ही एंट्री कर ली थी. 2010 में मुकेश ने बिहार में साहनी समाज कल्याण संस्थान की स्थापना की थी. उन्होंने अपने दो ऑफिस भी खोले थे, एक दरभंगा में और दूसरा पटना में. इसका इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने अपने समाज के लोगों को एकजुट करने और युवाओं को बेहतर शिक्षा का मौका दिया. 2015 में मुकेश ने निषाद विकास संघ की स्थापना की. यह संगठन अपने समाज के लोगों को इकट्ठा करने के लिए जिलेवार काम करता है. 

इस तरह मुकेश ने मुंबई में बनाई अपनी पहचान

19 साल की उम्र में मुकेश घर से भागकर कुछ बड़ा काम करने का सपना लेकर मुंबई चले गए थे. शुरुआत में मुकेश ने एक सेल्समैन की नौकरी भी की. इसी दौरान मुकेश के दिमाग में फिल्मों, टीवी सीरियल्स और शो के सेट बनाने के बिजनेस का आइडिया आया. मुकेश ने जब इस फील्ड में मेहनत की तो किस्मत ने भी उनकी मदद की. मुकेश के लिए सबसे बड़ा मौका उस वक्त आया जब, नितिन देसाई ने उनको 'देवदास' का सेट बनाने का काम दिया. इस धंधे में शुरुआती सफलताएं मिलने के बाद उन्होंने 'मुकेश सिनेवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड' (एमसीपीएल) नाम की कंपनी भी बनाई. अपनी मेहनत के दम पर मुकेश ने महज कुछ ही समय में खूब नाम और पैसा कमाया. जिसके बाद उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाने का निश्चिय किया.

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मुकेश की पारिवारिक पृष्ठभूमि

जानकारी के मुताबिक मुकेश साहनी बिहार में दरभंगा जिले के सुपौल बाजार के रहने वाले हैं. मुकेश का जन्म 31 मार्च को हुआ था. मुकेश साहनी की शादी कविता साहनी से हुई है. कविता एक गृहणी हैं. मुकेश का एक बेटा रणवीर साहनी और एक बेटी मुस्कान साहनी हैं. मुकेश के भाई का नाम संतोष साहनी और उनकी बहन का नाम रिंकू साहनी है.

 

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