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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा को कभी नीतीश कुमार का खासमखास जाना जाता था. लेकिन अब दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं. कभी नीतीश के सबसे करीबी रहने वाले उपेंद्र कुशवाहा आज उनकी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर चुके हैं. कुशवाहा लगातार नीतीश सरकार पर हमले बोलते रहते हैं. फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा बिहार में शिक्षा सुधार यात्रा चला रहे हैं. इस यात्रा की टैग लाइन है "पढ़ेगा बिहार, तभी बढ़ेगा बिहार". शिक्षा सुधार यात्रा के जरिए उपेंद्र कुशवाहा बिहार में बदलाव लाने की बात कर रहे हैं.
उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के संस्थापक हैं. मोदी सरकार में साल 2014 में उन्हें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया था. इसके बाद नवंबर में जब कैबिनेट में फेरबदल हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया. उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री के पद से इस्तीफे के साथ ही एनडीए से भी नाता तोड़ दिया. अब उनकी पार्टी यूपीए का हिस्सा है.
साल दर साल बदलते रहे उपेंद्र कुशवाहा के सहयोगी
उप्रेंद्र कुशवाहा ने जब 1985 में सक्रिय राजनीति की शुरुआत की तो वे लालू प्रसाद यादव की सामाजिक राजनीति के प्रशंसक थे. कुशवाहा लंबे समय तक लालू के सहयोगी भी रहे. कुशवाहा कांग्रेस के पुरजोर विरोधी रहे हैं, इसलिए जैसे-जैसे लालू की कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ीं, कुशवाहा की उनसे दूरी बढ़ती गई. कुशवाहा लालू से दूर हुए नीतीश के करीबी हो गए. हालांकि 2005 में नीतीश कुमार के साथ संबंध ठीक न होने कारण उन्होंने जेडीयू भी छोड़ दी.
2014 के आम चुनावों से पहले वो एनडीए में शामिल हुए क्योंकि उस वक्त जेडीयू एनडीए से अलग थी. जुलाई 2017 में जब जेडीयू और बीजेपी फिर एक साथ आए तो कुशवाहा एनडीए में खुद को असहज महसूस करने लगे. यही वजह है कि दिसंबर 2018 में आखिरकार उन्होंने एनडीए से किनारा कर लिया. अब कुशवाहा उसी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए के साथ हैं जिसका कभी वो सबसे ज्यादा विरोध किया करते थे.
उपेंद्र कुशवाहा का राजनीतिक सफरनामा
उपेंद्र कुशवाहा ने 1985 में राजनेता के रूप में अपना करियर शुरू किया. वे 1985-88 तक वे युवा लोकदल के राज्य महासचिव रहे और बाद में 1988-93 तक राष्ट्रीय महासचिव बने रहे. उपेंद्र कुशवाहा ने 1994 से 2002 तक समता पार्टी के महासचिव के रूप में काम किया. उपेंद्र कुशवाहा 2000-2005 में बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और उन्हें विधानसभा का उप नेता नियुक्त किया गया. कुशवाहा मार्च 2004 से फरवरी 2005 तक बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे.
उपेंद्र कुशवाहा ने 3 मार्च 2013 को राष्ट्रीय लोक समित पार्टी की स्थापना की थी और ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक रैली में अपनी पार्टी का के नाम और झंडे का अनावरण बड़े प्रभावशाली ढंग से किया था. फरवरी 2014 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गई थी.
साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने बिहार में सीतामढ़ी, काराकट और जहानाबाद पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीटों पर जीत हासिल भी की थी. मोदी सरकार में साल 2014 में उन्हें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय का राज्य मंत्री बनाया गया था. उपेंद्र कुशवाहा ने 9 दिसंबर, 2018 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. क्योंकि 10 दिसंबर 2018 को उन्होंने पीएम मोदी पर बिहार और पिछड़े तबके को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए एनडीए से किनारा कर लिया था.
इसके बाद 2019 के आम चुनावों में उपेंद्र कुशवाहा ने दो लोकसभा सीटों से चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. काराकाट सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ जेडीयू के महाबली सिंह चुनाव जीते थे वहीं उजियारपुर सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने पटकनी दी थी. मई 2019 में कुशवाहा की पार्टी के दो विधायक और एक एमएलसी ने जेडीयू का दामन थाम लिया था. यानी एनडीए से अलग होने के बाद कुशवाहा अपना कोई करिश्मा नहीं दिखा सके, अब उनके सामने विधानसभा चुनाव के रूप में नई चुनौती है.
उपेंद्र कुशवाहा का पारिवारिक इतिहास
कद्दावर नेता उपेंद्र कुशवाहा का जन्म 6 फरवरी 1960 को बिहार के वैशाली जिले के जावज में हुआ था. उपेंद्र कुशवाहा के पिता का नाम स्वर्गीय मुनेश्वर सिंह और माता का नाम मुनेश्वरी देवी है. उनकी पत्नी का नाम स्नेहलता कुशवाहा है. उनका एक बेटा और एक बेटी है.
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजधानी पटना में साइंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था. बीआर अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी से उपेंद्र कुशवाहा ने राजनीति विज्ञान में एमए किया था. उन्होंने बिहार के जान्दहा समता कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस के लेक्चरर के पद पर नौकरी भी की. और यहां 3 सालों तक रहे. अब इस कॉलेज का नाम मुनेश्वर सिंह मुनेश्वरी समता कॉलेज हो गया है.