विधानसभा चुनाव पास आते ही बिहार के सियासी गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है. सभी दल जनता को अपने पाले में लाने की जद्दोजहद में जुटे गए हैं. एक तरह से कहें तो चुनाव सुधार की शुरुआत भी चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से ही की थी. ऐसे में चुनाव में बदलाव से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जिसे शायद ही आप जानते होंगे.
पहले पूरे देश की तरह बिहार में भी चुनाव बैलेट पेपर से हुआ करता था. साल 2000 के विधानसभा में देश के तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषण ने बिहार में चुनाव पूरी तरह ईवीएम मशीन के जरिए करवाने का फैसला लिया.
जाहिर है यह मशीन जितना नया वोटरों के लिए था उतना ही नया नेताओं के लिए भी था. इसलिए राज्य के सभी नेता लोगों को ईवीएम के बारे में जागरुक करने में जुट गए. इसी क्रम में लालू यादव भी अपने चुनावी क्षेत्र में लोगों को ईवीएम मशीन की जानकारी देते थे.
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव चुनाव के दौरान ऐसे ही किसी ग्रामीण जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने सभा के दौरान मंच से लोगों को ईवीएम की नकल (डमी) दिखाई और हाथ से एक बटन को दबाते हुए ग्रामीण से कहा कि इसको दबाने के बाद जब पीं का आवाज निकले तो समझ लेना की तुम्हारा वोट पड़ गया है. पीं के आवाज से पहले मशीन के आगे से हटना नहीं है.
लालू के पीं कहने पर जनसभा में मौजूद भीड़ हंसी के ठहाके लगाने लगी. इसके बाद की सभी रैलियों में लालू यादव ने इसको दोहराया.
अगर किसी जगह रैली में लालू यादव ईवीएम के बारे में बताना भूल जाते तो भीड़ उनसे जानबूझकर सवाल पूछती थी कि 'वोटवा कैसे डालब'. इसके जवाब में लालू फिर डमी ईवीएम निकालकर पीं की आवाज करके बताते थे. लोगों का लालू यादव का वो अंदाज बेहद पसंद आता था.
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