बिहार की राजधानी पटना से सटे दानापुर में एक नाम हमेशा सुर्खियों में रहता है और वो है रीतलाल यादव. कई सालों से जेल में बंद रहने के बाद भी पूरे इलाके में इस बाहुबली का वर्चस्व आज भी कायम है और इनके बिना दानापुर और उसके आसपास की राजनीति संभव नहीं है.
साल 2015 में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर दानापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके रीतलाल यादव अभी एमएलसी हैं. जेल में रहते हुए ही वो स्वतंत्र रूप से एमएलसी चुने गए थे.
रीतलाल यादव पर बीजेपी नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या का संगीन आरोप है. इसके अलावा रीतलाल यादव के दूसरे अपराधों की फेहरिस्त काफी लंबी है जिस वजह से वो कई सालों से जेल में ही बंद हैं.
हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्जा और रंगदारी रीत लाल यादव का मुख्य पेशा है और इसी वजह से पूरे राज्य में उनके नाम का दहशत रहा है. रीतलाल यादव पर जेल में रहकर ही इन सभी गोरखधंधे और गैरकानूनी कामों को अंजाम देने का आरोप भी लगता रहा है.
जेल में रहकर वसूली का धंधा
रीतलाल यादव भले कई सालों से जेल में बंद रहे हों लेकिन बाहर उसके गुर्गे उनके नाम पर वसूली का धंधा करते हैं. बीते साल रीतलाल यादव के गुर्गों ने एक कोचिंग संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी. गुर्गों को पैसे देने से इनकार करने पर कथित तौर पर जेल से ही रीतलाल यादव ने संस्थान मालिक को पैसे नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी.
इतना ही नहीं एक डॉक्टर को बंद लिफाफे में जिंदा कारतूस भेजकर भी रंगदारी मांगने का आरोप रीतलाल यादव और उनके गुर्गों पर हैं. डॉक्टर से रीतलाल यादव के गुर्गों ने कारतूस भेजने के बाद 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी.
4 सितंबर 2010 में हुए थे गिरफ्तार
हत्या, हत्या की धमकी, डकैती, और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आपराधिक कृत्यों में नाम आने के बाद चार सितंबर 2010 से ही रीतलाल यादव ज्यादातर समय जेल में बंद हैं. उन्हें इसी साल 25 जनवरी को सिर्फ 15 दिनों के लिए बेटी की शादी में पैरोल मिली थी. हालांकि शादी के बाद उन्हें 10 फरवरी को फिर से सरेंडर करना पड़ा.
बेऊर जेल से रंगदारी मांगने के बाद दूसरी जेल में किया गया शिफ्ट
पटना की बेऊर जेल में बंद रीतलाल यादव के वहीं से धंधा चलाने और रंगदारी मांगने के कई आरोपों के बाद उन्हें वहां से हटाकर भागलपुर के केंद्रीय कारागार में ट्रांसफर कर दिया गया था, जहां उन्हें उच्च श्रेणी की जेल में रख गया था और जेल प्रशासन पर कई तरह की सुविधाएं देने का आरोप लगा था.
कोरोना काल में फिर तोड़ा कानून, दर्ज हुई एफआईआर
साल 2012 में प्रवर्तन निदेशालय ने रीतलाल यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था. वो कई सालों से पटना की बेऊर जेल में बंद थे.
2020 में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान ही पटना हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में तय सजा से ज्यादा समय तक ट्रायल के दौरान ही सजा काटने लेने की वजह से जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया था.
जमानत पर बाहर आते ही रीतलाल यादव ने एक बार फिर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और लॉकडाउन के दौरान ही 30-40 गाड़ियों का काफिला लेकर अपने समर्थकों के साथ अपने क्षेत्र हाथीखाना मोड़ के पास जुट गए.
सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में रीतलाल यादव समेत करीब सौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.
साल 2021 तक एमएलएसी के पद पर होने की वजह से रीतलाल यादव चुनाव तो नहीं लड़ेंगे लेकिन जेल से बाहर रहने पर ये बाहुबली दानापुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में किसी भी पार्टी का राजनीतिक पासा पलट देने का दमखम रखता है.
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