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बिहार: NDA में घट सकता है चिराग का हिस्सा, LJP को पिछली बार से कम सीटें!

बिहार में एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सहयोगी दलों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है और न ही कोई फॉर्मूला सामने आया है. हालांकि, जेडीयू और जीतनराम मांझी के एनडीए में वापसी के बाद एलजेपी का कद घटता और राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाता नजर आ रहा है. पिछले चुनाव के मुकाबले एलजेपी को इस बार कम सीटों पर ही चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है. 

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एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान
एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सियासी जोरआजमाइश
  • एलजेपी 2015 के चुनाव में 42 सीटों पर लड़ी थी
  • जेडीयू की एंट्री से एलजेपी का घटा सियासी कद

बिहार विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सहयोगी दलों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है और न ही कोई फॉर्मूला सामने आया है. हालांकि, जेडीयू और जीतनराम मांझी के एनडीए में वापसी के बाद एलजेपी का कद घटता और राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाता नजर आ रहा है. पिछले चुनाव के मुकाबले एलजेपी को इस बार कम सीटों पर ही चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है. 

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एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं. चिराग के नेतृत्व में एलजेपी ने पिछले दिनों बैठक की थी, जिसमें पार्टी नेताओं ने 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने को लेकर अपनी राय रखी थी. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और बिहार के पार्टी प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात कर एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सहमति बनाने की कवायद की है. जेपी नड्डा ने साफ कहा था कि एलजेपी गठबंधन का हिस्सा रहेगी और उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव में सम्मानजनक समझौता होगा.

बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की सीट शेयरिंग में एलजेपी को 42 सीटें मिली थीं. चिराग पासवान इस बार भी इतनी ही सीटों पर चुनावी दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार इस पर राजी नहीं हैं. बिहार की 243 सीटों में से बीजेपी 100 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है तो जेडीयू भी 110 से 120 सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही है. ऐसे में एनडीए में जीतनराम मांझी और चिराग पासवान की पार्टी बचती है. 

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जीतनराम मांझी को नीतीश लेकर आए हैं तो उन्हें साधकर रखने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. माना जा रहा है कि वो अपने कोटे से ही मांझी को सीटें देंगे. वहीं, एलजेपी को लेकर मामला उलझा हुआ है. माना जा रहा है कि इस बार एलजेपी को महज दो दर्जन सीटों पर ही चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक एनडीए में एक फॉर्मूला बन रहा है कि बीजेपी 100, जेडीयू 119 और 24 सीटें एलजेपी को मिल सकी है. 

ऐसे में जेडीयू अपने कोटे से जीतनराम मांझी को सीटें देगी जबकि बीजेपी अपने कोटे से आधा दर्जन सीटों पर एलजेपी के कैंडिडेट को अपने चुनाव निशान पर लड़ा सकती है. इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि ऐसे में संभव है एलजेपी को बीजेपी द्वारा जो सीटें दी जाएंगी, उन पर साथ में पार्टी अपना प्रत्याशी भी दे सकती है. इसके अलावा राज्यपाल कोटे से एक विधान परिषद की सीट भी एलजेपी को मिल सकती है. एलजेपी की 16 सितंबर को पार्टी सांसद और नेताओं की बैठक है, जिसमें एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूले के सुझाव पर चर्चा हो सकती है. इस बैठक में बिहार चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है. 


 

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