बिहार विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजर लालू यादव के मजबूत वोटबैंक माने वाले मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर है. जेडीयू की वर्चुअल रैली 'निश्चय संवाद' को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने मुस्लिम-यादव समाज को यह संदेश देने की कोशिश कि लालू-राबड़ी ने उन्हें सिर्फ ठगने का काम किया है. उनके हक में जो काम हुए हैं वो एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुए हैं.
बिहार की राजनीति में यादव और मुस्लिम काफी निर्णयक भूमिका में है. मुस्लिम-यादव सूबे में करीब 16-16 फीसदी है, जो 1990 के बाद से लालू यादव के साथ मजबूती के साथ खड़ा हुआ है. नीतीश कुमार के दोबारा से बीजेपी के साथ जाना मुस्लिमों को रास नहीं आ रहा है. हाल ही में करीब 5 एमएलसी और 7 विधायक आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हुए हैं, जिनमें कई यादव और मुस्लिम समुदाय से हैं.
लालू यादव इन दिनों जेल में सजा काट रहे हैं और आरजेडी की कमान तेजस्वी यादव के हाथों में है. ऐसे में मौके की नजाकत को समझते हुए नीतीश आरजेडी के समीकरण को तोड़कर अपने साथ लाने की कवायद में है. बिहार के मुस्लिम को नीतीश यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी के साथ रहते हुए भी लालू-राबड़ी से ज्यादा उनके लिए काम कर रहे हैं. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे रामलखन सिंह यादव के पोते और पूर्व सीएम दारोगा प्रसाद राय की पौत्री की चर्चा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि यादवों के साथ भी लालू का व्यवहार सही नहीं रहा है.
मुस्लिमों को साधने के लिए नीतीश ने चले दांव
नीतीश सोमवार को वर्चुअल रैली के दौरान मुस्लिमों को साधते नजर आए. उन्होंने कहा कि हमसे पहले जिन लोगों ने बिहार में सत्ता चलाई उन्होंने क्या किया. हमने कब्रिस्तान की घेराबंदी का कार्य किया. हमने 8064 कब्रिस्तान चिन्हित किए और इनमें से 6299 की चहारदीवारी का निर्माण कराने का काम किया. नीतीश यही नहीं अल्पसंख्यकों के हक में किए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि हमने अल्पसंख्यक रोजगार योजना की शुरुआत की. मदरसों के विकास पर काम किया. राज्य के स्कूलों में उर्दू शिक्षा व उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति पर कार्य किया.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भागलपुर दंगे में उन्होंने (लालू-राबड़ी-कांग्रेस) कुछ नहीं किया लेकिन जब हमारी सरकार बनी तो हमने पूरे मामले की जांच करवाई. दंगे के मृतक आश्रित को 5000 पेंशन देने का काम किया और मकानों की क्षतिपूर्ति की गई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भागलपुर का दंगा लालू के शासनकाल में हुआ था, लेकिन दंगा पीड़ितों की मदद उनकी सरकार ने की है. इतना ही नहीं नीतीश ने कहा कि बिहार के किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैंपस के लिए जमीन देने का काम भी उनकी सरकार ने ही किया है. कब्रिस्तान से लेकर भागलपुर दंगे और अल्पसंख्यक विकास कार्यों का जिक्र कर नीतीश मुस्लिम समुदाय को साधते नजर आए.
यादवों के लिए नीतीश का इमोशनल कार्ड
मुस्लिमों के साथ-साथ नीतीश लालू के मजबूत वोटबैंक माने जाने वाले यादव समुदाय को इमोशनल कार्ड के जरिए साधते दिखे. नीतीश ने कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे रामलखन सिंह यादव पोते और पूर्व सीएम दारोगा प्रसाद राय की पौत्री की चर्चा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि यादव नेताओं के प्रति भी लालू यादव का व्यवहार ठीक नहीं रहा है. नीतीश ने कहा कि लालू यादव ने अपने परिवार के सिवा किसी दूसरे यादव परिवार की परवाह नहीं की है.
नीतीश ने हाल ही में आरजेडी से जेडीयू में आए नेताओं का जिक्र करते हुए चंद्रिका राय का नाम लेते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय के पुत्र हैं. चंद्रिका राय और उनकी पुत्री ऐश्वर्या राय के साथ क्या व्यवहार हुआ? एक पढ़ी-लिखी लड़की के साथ क्या व्यवहार हुआ? लोग शिक्षा की बात करते हैं, लेकिन ऐश्वर्या राय के साथ क्या किया. कितना दुखद है, कौन हैं ऐसा व्यवहार करने वाले. नीतीश कुमार ने कहा कि मैं परिवार के मामलों में नहीं जाना चाहता..लेकिन ऐश्वर्या राय कौन है, किसकी पौत्री है. पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के साथ क्या व्यवहार हुआ?
नीतीश कुमार ने लालू यादव का नाम लिए बगैर कहा का दरोगा बाबू ने क्या क्या नहीं किया. उनके एहसानों को भी भूल गए और उनके पौत्री के साथ ऐसा सलूक किया. आप जरा कल्पना कीजिए कि दरोगा बाबू की पौत्री के साथ ऐसा व्यवहार. नीतीश कुमार यही नहीं रुके उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे रामलखन यादव के पौत्र जय वर्धन सिंह यादव का जिक्र करते हुए भी लालू परिवार को निशाने पर लिया. नीतीश ने कहा कि जय वर्धन सिंह के साथ आखिर किस तरह व्यवहार किया गया, भूल गए रामलखन बाबू ने कितनी मदद की थी.
नीतीश ने कहा कि एक के पौत्री के साथ और एक के पौत्र के साथ. इस तरह का व्यवहार किया गया. आखिर ऐसी कैसी नौबत आ गई थी. रामलखन बाबू ने बिहार में शिक्षा के लिए बहुत काम किए हैं. परिवारवाद चला रहे हैं. परिवारवाद ही सब कुछ है, जिन्होंने मौके पर आपको मदद किया. वैसे लोगों के परिवार के साथ क्या किया. परिवार का मतलब खुद का परिवार और इतने बड़े लोगों के परिवार का कोई महत्व नहीं. ऐसे में आप लोग सोच लीजिए और जान लीजिए. नीतीश ने सीधे तौर पर यादव समुदाय को संदेश दिया. हालांकि, नीतीश इस कवायद में कितना सफल होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा?