मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को वर्चुअल रैली 'निश्चय संवाद' के जरिए बिहार विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज किया. इस दौरान नीतीश कुमार ने आरजेडी प्रमुख लालू यादव जमकर हमले किए. इतना ही नहीं इस दौरान नीतीश कुमार ने चंद्रिका राय और उनकी पुत्री ऐश्वर्या राय के जरिए इमोशनल कार्ड खेलते हुए लालू के परिवार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि परिवारवाद के प्रेम में इतना मस्त हो गए कि दरोगा बाबू (पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद यादव) के एहसान को ही भूल गए और उनकी पौत्री के साथ कैसा सलूक किया.
नीतीश कुमार हाल ही में आरजेडी से जेडीयू में आए नेताओं का जिक्र करते हुए चंद्रिका राय का नाम लेते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय के पुत्र हैं. चंद्रिका राय और उनकी पुत्री ऐश्वर्या राय के साथ क्या व्यवहार हुआ? एक पढ़ी-लिखी लड़की के साथ क्या व्यवहार हुआ? लोग शिक्षा की बात करते हैं, लेकिन ऐश्वर्या राय के साथ क्या किया. कितना दुखद है, कौन हैं ऐसा व्यवहार करने वाले. नीतीश कुमार ने कहा कि मैं परिवार के मामलों में नहीं जाना चाहता..लेकिन ऐश्वर्या राय कौन है, किसकी पौत्री है. पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के साथ क्या व्यवहार हुआ?
नीतीश कुमार ने लालू यादव का नाम लिए बगैर कहा का दरोगा बाबू ने क्या क्या नहीं किया. उनके एहसानों को भी भूल गए और उनके पौत्री के साथ ऐसा सलूक किया. आप जरा कल्पना कीजिए कि दरोगा बाबू की पौत्री के साथ ऐसा व्यवहार. नीतीश कुमार यही नहीं रुके उन्होंने राम लखन यादव के पौत्र जय वर्धन सिंह यादव का जिक्र करते हुए भी लालू परिवार को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि जय वर्धन सिंह के साथ आखिर किस तरह व्यवहार किया गया, भूल गए राम लखन बाबू ने कितनी मदद की थी.
उन्होंने कहा कि एक के पौत्री के साथ और एक के पौत्र के साथ. इस तरह का व्यवहार किया गया. आखिर ऐसी कैसी नौबत आ गई थी. राम लखन बाबू ने बिहार में शिक्षा के लिए बहुत काम किए हैं. परिवारवाद चला रहे हैं. परिवारवाद ही सब कुछ है, जिन्होंने मौके पर आपको मदद किया. वैसे लोगों के परिवार के साथ क्या किया. परिवार का मतलब खुद का परिवार और इतने बड़े लोगों के परिवार का कोई महत्व नहीं. ऐसे में आप लोग सोच लीजिए और जान लीजिए.
कब्रिस्तान और मंदिर की सुरक्षा
नीतीश कुमार ने अपने 15 साल के काम की उपलब्धियों को भी लोगों के सामने रखा और साथ ही लालू-राबड़ी पर निशाना साथा. उन्होंने कहा कि हमसे पहले जिन लोगों ने सत्ता चलाई उन्होंने क्या किया, कब्रिस्तान और मंदिरों का हाल ही देख लीजिए. न कब्रिस्तान की घेराबंदी थी और न ही मूर्ति चोरी रोकने के उपाय. हमनें 6099 कब्रिस्तानों की घेराबंदी करवाई. मंदिर में मूर्ति चोरी रोकने के लिए 226 मंदिरों में चाहरदीवारी निर्माण कार्य पूरा कर दिया. हमने भागलपुर दंगों की जांच पूरी करवाई. कई ऐसे काम थे जो हमने करवाए.
नीतीश ने गिनाई उपलब्धियां
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में पहले तो गड्ढे में सड़क दिखती थी, अब कोई भी खुद देख सकता है. हमको जब काम करने का मौका मिला तो हमने लक्ष्य रखा कि कहीं से भी राजधानी पटना आने में 6 घंटे से ज्यादा समय न लगे. वो लक्ष्य पूरा हुआ तो हमने अब समय को घटा कर 5 घंटे करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए सड़कों का चौड़ीकरण और नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है. 54,461 करोड़ रुपयों की लागत से हमने सड़कों का निर्माण करवाया है. सड़कों की गुणवत्ता सही रखने के लिए हमने इसे भी लोक शिकायत निवारण कानून के दायरे में लाया. उन्होंने इस बात को नए वोटरों को बताने की भी बात कही.
कानून व्यवस्था पर लगाम
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में अपराध के ग्राफ में भी गिरावट आई. 2005 में हमने सत्ता संभाली और तब से लेकर हम अपराध पर जीरो टॉलरेंस का रुख अपनाए हुए हैं. बिहार में ज्यादातर अपराध की वजह भूमि विवाद है. इसके अलावा आपस में लोग परिवार का बंटवारा नहीं करते थे, क्योंकि रजिस्ट्री का चार्ज काफी ज्यादा होता था. लेकिन अब परिवार में बंटवारे के लिए 100 रुपये का सांकेतिक रजिस्ट्री चार्ज लगता है. इस तरह से अब ऐसे भी अपराध को हमने नियंत्रित करने का काम किया है.