बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण की 71 सीट पर चुनाव प्रचार का शोर सोमवार को शाम पांच बजे थम जाएगा. ऐसे में पहले चरण की पांच सीटें राजधानी पटना जिले की भी हैं, जिनमें मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी, पालीगंज और बिक्रम सीट शामिल हैं, जहां 28 अक्टूबर को मतदान है. एनडीए और महागठबंधन दोनों ने राजधानी पटना में जीत का परचम फहरान के लिए अपनी ताकत झोंक दी है.
राजधानी पटना जिले में कुल 14 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी, पालीगंज और बिक्रम सीट पर पहले चरण में और बाकी सीटों पर दूसरे दौर में चुनाव हैं. ऐसे में जिले की पहले चरण की पांच सीटों में से सिर्फ एक सीट एनडीए के पास है. मोकामा सीट पिछली बार अनंत सिंह ने निर्दलीय रहकर जीती थी जबकि इस बार वे आरजेडी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं. बिक्रम सीट कांग्रेस के पास है और पालीगंज व मसौढ़ी सीट पर आरजेडी का कब्जा है. हालांकि, इस बार के बदले हुए सियासी समीकरण में पटना के इन पांचों सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प है.
मोकामा: आनंत सिंह के सामने जेडीयू की चुनौती
बिहार चुनाव के पहले चरण की हॉट सीट मानी जा रही मोकामा से बाहुबली नेता आनंत सिंह चौथी बार चुनावी मैदान में उतरे हैं. वो इस बार आरजेडी के चुनाव निशान पर किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके खिलाफ जेडीयू ने राजीव लोचन को उतारा है. वहीं, एलजेपी से सुरेश सिंह निषाद और आरएलएसपी से दिलराज रोशन सहित कुल 8 प्रत्याशी मैदान में हैं. मोकामा सीट पर भूमिहार वोटर्स की संख्या अधिक है. खुद अनंत सिंह भी भूमिहार जाति से ही आते हैं और ऐसे में उन्हें इसका फायदा भी मिलता रहा है. 2015 चुनाव में अनंत सिंह ने निर्दलीय उतरकर जेडीयू के नीरज कुमार को करीब 15 हजार मतों से मात देकर जीत दर्ज की थी.
पालीगंज: LJP ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला
पालीगंज सीट के मुकाबले को एलजेपी ने काफी दिलचस्प बना दिया है. पालीगंज से मौजूदा विधायक रहे जयवर्धन यादव ने इस बार आरजेडी छोड़कर जेडीयू के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं. इनका मुकाबला भाकपा माले के प्रत्याशी संदीप सौरभ से है, लेकिन इन सबके बीच बीजेपी से बगावत कर एलजेपी से उतरी पूर्व विधायक उषा विद्यार्थी ने पालीगंज के मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. हालांकि, यह जयवर्धन परिवार का मजबूत इलाका माना जाता है, उनके पिता राम लखन यादव भी कई बार विधायक रह चुके हैं.
2015 में जयवर्धन यादव आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े और उन्हें 65,932 मत प्राप्त हुए थे. उन्होंने बीजेपी के रामजनम शर्मा को 24,453 मतों से पराजित किया था. पिछले चुनाव में भाकपा माले 19,438 मत प्राप्त कर तीसरे नंबर पर रही थी, लेकिन इस महागठबंधन के तहत यह सीट माले को मिली है. यहां से संदीप सौरभ मैदान में है, जो यादव समुदाय से आते हैं. जेडीयू के लिए यहां सबसे बड़ी परेशानी एलजेपी से उतरी उषा विद्यार्थी हैं, जो 2010 में यहां से विधायक रह चुकी हैं. इस तरह से यहां की लड़ाई काफी रोचक बन गई है.
बिक्रम: निर्दलीय के कारण त्रिकोणीय लड़ाई
बिक्रम विधानसभा सीट पर बीजेपी के बागी नेता के निर्दलीय उतरने से यहां की सियासी लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है. यहां महागठबंधन से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सिद्धार्थ सौरव मैदान में हैं जबकि एनडीए से बीजेपी प्रत्याशी अतुल कुमार ताल ठोक रहे हैं. वहीं, बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय उतरे अनिल कुमार ने मुकाबले को रोचक बना दिया है. 2015 में कांग्रेस के सिद्धार्थ सौरव और बीजेपी के अनिल कुमार के बीच मुकाबला हुआ था. कांग्रेस ने यहां पर बीजेपी को करीब 44 हजार मतों से मात देखर कब्जा जमाया था. बीजेपी ने इस बार अनिल कुमार का टिकट काटकर अतुल कुमार पर दांव लगाया है तो अनिल कुमार निर्दलीय सहित कुल 15 प्रत्याशी मैदान में है.
मसौढ़ी: आरजेडी और जेडीयू के बीच मुकाबला
पटना जिले की मसौढ़ी विधानसभा सीट पर 28 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे. इस पर मुख्य मुकाबला जेडीयू के नूतन पासवान और आरजेडी की मौजूदा विधायक रेखा देवी के बीच है. पिछली चुनाव में भी इन्हीं दोनों के बीच सियासी मुकाबला हुआ था और आरजेडी ने करीब 39 हजार मतों से जीत दर्ज करने में कामय रही थी. हालांकि, नूतन पासवान जीतनराम मांझी की पार्टी से मैदान में उतरी थीं. इस बार जेडीयू से किस्मत आजमा रही हैं. एलजेपी से परशुराम कुमार और बसपा से राज कुमार राम ने मैदान में उतरकर मुकाबल को दिलचस्प बना दिया है.
बाढ़: कांग्रेस-बीजेपी की सीधी लड़ाई
पटना की बाढ़ विधानसभा सीट इस बार भले ही 18 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच होता नजर आ रहा है. बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा है, जिनके खिलाफ कांग्रेस के सत्येंद्र बहादुर ताल ठोक रहे हैं.
हालांकि, 2015 के चुनाव में बाढ़ सीट पर बीजेपी के ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू और जेडीयू के मनोज कुमार बीच हुआ था. इस मुकाबले में बीजेपी ने करीब 12 हजार मतों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार बदले हुए समीकरण में जेडीयू-बीजेपी एक साथ है और कांग्रेस सामने है. ऐसे में देखना है कि इस सीधी लड़ाई में बाजी कौन मारता है.