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तीन दशक के बाद भी अधूरा है रामविलास पासवान का ये ड्रीम प्रोजेक्‍ट

बिहार के पिछड़े हुए कोसी क्षेत्र में करीब 40 साल पहले आई रेलवे लाइन दौड़ाने की परियोजना लंबा वक्‍त बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. जबकि तब से अब तक बिहार के तीन नेता रेल मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं.

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(Photo credit: India Today Archive)
(Photo credit: India Today Archive)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में हो रहे हैं विधानसभा चुनाव
  • रामविलास का ड्रीम प्रोजेक्‍ट है अधूरा
  • 40 साल पहले आई थी ये परियोजना

बिहार के पिछड़े हुए कोसी क्षेत्र में करीब 40 साल पहले रेलवे लाइन दौड़ाने की परियोजना आई थी. लंबा वक्‍त बीतने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी है. जबकि तब से अब तक बिहार के तीन नेता रेल मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं. रेलवे की ये परियोजना दो पूर्व रेल मंत्रियों स्‍व ललित नारायण मिश्र और स्‍व रामविलास पासवान का ड्रीम प्रोजेक्‍ट रही. बावजूद इसके इस परियोजना को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है. रामविलास पासवान के न‍िधन के बाद माना जा रहा है कि इस परियोजना के दुर्दिन आ सकते हैं. 

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चार दशक पहले का प्‍लान 

बिहारीगंज-कुरसेला की रेल परियोजना बीते चार दशकों से अधर में है. मधेपुरा, पूर्णिया व कटिहार के सुदूर गांवों को इससे जोड़ने का पहली बार सपना तत्‍कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने देखा था. उनके कार्यकाल के दौरान ही इस प्रोजेक्‍ट के लिए सर्वे शुरू हो गया था. हालांकि कुछ ठोस काम होने से पहले ही ललित नारायण के असामयिक न‍िधन के बाद ये प्रोजेक्‍ट ठंडे बस्‍ते में चला गया. 

पासवान ने तैयार कराया रूट मैप 

जब रामविलास पासवान रेल मंत्री बने तब उन्‍होंने इस परियोजना की फाइल मंगाई. उन्‍होंने इसे अपनी प्राथमिकता के प्रोजेक्‍ट में जोड़ा. कुरसेला में उन्‍होंने ही सर्वे कार्य के लिए शिलान्‍यास कराया. उनकी ही पहल पर रेल लाइन के लिए रूट मैप तैयार हुआ. लेकिन सत्‍ता परिवर्तन के साथ ही ये महत्‍वाकांक्षी परियोजना एक बार फ‍िर ठंडे बस्‍ते में चली गई. 

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संघर्ष समिति ने बनाया दबाव

कई साल तक इस प्रोजेक्‍ट में कोई गतिविधि न देख स्‍थानीय लोगों ने कुरसेला-बिहारीगंज रेल पथ बनाओ संघर्ष समिति बनाया. समिति का दबाव तब रंग लाया जब लालू प्रसाद रेल मंत्री बने. तब रेल परियोजना को बजट जारी हुआ. रूट मैप के रेलवे स्टेशनों, क्रासिंग के स्थान पर रेलवे के बोर्ड लगे. लालू प्रसाद ने 7 फरवरी, 2009 को रूपौली में बिहारीगंज-कुरसेला नयी रेल लाइन का शिलान्यास किया. इस घटना से फ‍िर स्‍थानीय लोगों की उम्‍मीदें बलवती हुईं लेकिन तब से अब तक स्‍थानीय लोगों का इंतजार खत्‍म नहीं हुआ है. 

श्रद्धांजलि के तौर पर पूरा हो प्रोजेक्‍ट 

आसमधेपुरा-पूर्णिया-कटिहार के सुदूर क्षेत्रों की लाखों की आबादी के लिए आज भी सड़क ही आवागमन का मुख्‍य साधन है. रेल परियोजना पूरा होने पर इन क्षेत्रों में आर्थिक और औद्योगिक विकास को बल मिलेगा. बिहार बॉर्डर तक इसकी सुविधाओं का विस्‍तार होगा. 2009 से इस रेल परियोजना का कार्य रुका पड़ा है. स्‍थानीय लोग चाहते हैं कि स्‍व. राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि के तौर पर भी उनके इस ड्रीम प्रोजेक्‍ट को केंद्र और राज्‍य सरकार आपसी ताल-मेल से पूरा कराएं.

परियोजना का प्रस्‍तावित रूट प्‍लान और खाका

- कुल 57.35 किमी लम्‍बाई में बिछाई जानी थी नई रेलवे लाइन

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- इमें बिहारीगंज से उदाकिशुनगंज होते हुए कोपरिया तक ट्रैक 

- नवगछिया से चौसा, उदाकिशुनगंज होते हुए क्षसहेश्वर तक ट्रैक

- कुरसेला से रूपौली होते हुए बिहारीगंज तक व उदाकिशुनगंज ते बीहपुर तक ट्रैक

- 2009 में इस परियाजना की अनुमानित लागत 192.56 करोड़ थी

- बिहारीगंज, धमदाहा, माधोनगर, सिरसा, कसमराह, दुर्गापुर, रूपौली, दूसर टिकापट्टी व कुरसेला में स्‍टेशन बनने हैं.

- कुल 74 छोटे-बड़े पुलों का निर्माण होना था. रेल फाटकों की संख्या 48 तय हुई थी

- शुरुआती दौर में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में अड़चन भी आई थी.

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