बिहार विधानसभा चुनाव में अभी तक लग रहा था कि सीएए-एनआरसी का मुद्दा अहम होकर भी चुनावी एजेंडे से बाहर रहेगा, लेकिन सियासी तापमान चढ़ने लगा तो सीमांचल के इलाके में इसका शोर सुनाई देने लगा है. राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने कोर वोटबैंक को साधने के लिए हिसाब से सीएए-एनआरसी पर चुनावी बिसात बिछाने में जुट गई हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और AIMIM चीफ असदुद्दीन औवैसी ने सीएए और एनआरसी की लौ पर सियासी खिचड़ी पकाने की कवायद की है.
नीतीश ने कहा- कोई बाहर नहीं निकाल सकता
मुस्लिम बहुल सीमांचल के सियासी समीकरण को साधने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को किशनगंज के कोचाधामन में उतरे थे. नीतीश कुमार ने इस दौरान अल्पसंख्यकों के लिए किए गए कामों का जिक्र करते हुए सीएए और एनआरसी को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने भाषण की शुरुआत में ही कहा, कुछ लोग दुष्प्रचार और ऐसी फालतू बातें कर रहे हैं कि लोगों को देश के बाहर कर दिया जाएगा. यहां से, देश से कौन किसको बाहर करेगा. किसी में दम नहीं है कि हमारे लोगों को देश से बाहर कर दे. सभी लोग हिन्दुस्तान के हैं, कौन बाहर करेगा?'
योगी बोले- सरकार बनी तो घुसपैठिये होंगे बाहर
नीतीश कुमार का बयान सीएए-एनआरसी से सबको बचाने वाला प्रतीक हो रहा है तो किशनगंज से करीब सवा सौ किलोमीटर दूर कटियार में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एनडीए की फिर से सरकार बनते ही चुन-चुनकर घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने की बात कर रहे थे. योगी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने घुसपैठ के मसले का हल तलाश लिया है. सीएए के साथ, उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में यातना का सामना करने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है. योगी ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा को भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी घुसपैठिए को बाहर निकाला जाएगा.
योगी ने कहा कि बिहार का कटिहार का इलाका भी घुसपैठ की समस्या से त्रस्त है, बिहार में एनडीए की सरकार बनती है तो घुसपैठियों को देश से निकालकर बाहर करेंगे. कटियार में इस समस्या का निदान किया जाएगा. उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि बीजेपी प्रत्याशी तार किशोर को चौथी बार आशीर्वाद दें और आप लोगों के आशीर्वाद से ही बिहार में घुसपैठ की समस्या का समाधान होगा.
ओवैसी की हर रैली में NRC का जिक्र
वहीं, बिहार में सियासी जमीन तलाश रहे हैदराबाद से सासंद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी सीएए-एनआरसी के जरिए सीमांचल में चुनावी फसल काटना चाहते हैं. ऐसे में ओवैसी अपनी हर रैली में सीएए और एनआरसी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्र की मोदी और नीतीश सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. अमौर की रैली में कहा कि हमारा मुख्य मुद्दा सीएए-एनआरसी है. बीजेपी और आरएसएस के द्वारा सीमांचल में बसे लोगों को घुसपैठिया कहा जा रहा था तो उस वक्त आरजेडी और कांग्रेस ने अपना मुंह नहीं खोला.
ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने दोनों कानूनों को लागू करने की बात कही है. इस मुद्दे पर आरजेडी अपनी जुबान बंद रखे है और नीतीश कुमार लोगों के समक्ष गलतबयानी कर रहे हैं. एनआरसी-सीएए सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि हिंदुओं पर भी भारी पड़ेगा. सीएए और एनआरसी को लेकर मुस्लिम के साथ हिंदुओं में भी डबल इंजन की सरकार डर पैदा कर रही है.
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उन्होंने कहा कि सीएए ऐसा कानून है जो संविधान के खिलाफ हैं, जो हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं. नीतीश कुमार ने बिहार की जनता से झूठ कहा कि जब सीएए-एनआरसी होगा तो वो 2010 के आधार पर नहीं होगा. वो भारत सरकार के आधार पर होगा. जिसमें साफ कहा गया है कि, जब रजिस्टर बनेगा तो कोई भी ऑब्जेक्शन कर सकता है.
इशारों में बात कर रहे तेजस्वी
सीमांचल में मुस्लिम वोटों की साधने के लिए उतरे तेजस्वी यादव सीएए-एनआरसी पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन इशारे में बात जरूर कर रहे हैं. बुधवार को किशनगंज के ठाकुरगंज में रैली को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, 'नीतीश कुमार बीजेपी और आरएसएस की गोद में बैठे हुए हैं, राज्यसभा और लोकसभा में क्या करते हैं, पता है ना. हमने तो विपक्ष में रहते हुए भी नीतीश कुमार को मजबूर कर दिया है. समझ रहे हैं न आप लोग, हम क्या बात कर रहे हैं. हम खुलकर नहीं बोलेंगे. कुछ बाहर के लोग भी यहां आए हैं, उनकी अच्छी से मेहमान नवाजी कीजिए. अभी एक परेशानी आई थी तो हम आपके साथ खड़े थे और आरजेडी ने बिहार बंद कर दिया था, तब वो नजर नहीं आए थे. आप लोग एकता दिखाएं.
दरअसल, सीएए पर संसद में जेडीयू ने समर्थन किया था, जिसे तेजस्वी यादव जिक्र कर रहे हैं. इसके अलावा सीएए कानून लागू किए जाने के बाद आरजेडी ने बिहार बंद किया था और विरोध प्रदर्शन में तेजस्वी यादव शामिल हुए थे. इसके बाद नीतीश कुमार ने विधानसभा में प्रस्ताव पास किया था कि बिहार में एनआरसी को लागू नहीं होने देंगे और एनपीआर को 2010 के तर्ज पर करेंगे. इन्हीं बातों का तेजस्वी सीमांचल की रैली में जिक्र कर रहे हैं, लेकिन खुलकर नहीं बोलते हैं. वह सिर्फ इशारों-इशारों में ही बात कर रहे हैं.