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बिहार के वो सात CM जिनके परिवार ने आगे नहीं बढ़ाई सियासत में विरासत

बिहार में भोला पासवान, चंद्रशेखर सिंह, केबी सहाय, दीप नारायण सिंह, महामाया प्रसाद सिन्हा, केदार पांडेय और हरिहर प्रसाद सिंह बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके परिवार से कोई भी राजनीति में नहीं आया है.

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पूर्व सीएम भोला पासवान शास्त्री
पूर्व सीएम भोला पासवान शास्त्री
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार की राजनीति में वंशवाद का बोल बाला
  • कर्पुरी ठाकुर से लेकर दरोगा राय भी नहीं बचे
  • भोला पासवान का परिवार नहीं आया राजनीति में

बिहार की सियासत में परिवारवाद की राजनीति की गहरी पैठ रही है. आरजेडी और एलजेपी वंशवाद की राजनीति की वाहक बनी हुई हैं, लेकिन बीजेपी, जेडीयू और कांग्रेस भी इससे अछूते नहीं हैं. पिछले चुनाव में करीब चार दर्जन उम्मीदवार राजनीतिक परिवार से आए हुए नेता थे. आजादी के बाद से अब तक बिहार में कुल 23 मुख्यमंत्री बने, जिनमें से सात सीएम ऐसे रहे हैं, जो परिवारवाद की राजनीति से मुक्त रहे हैं. इन नेताओं के परिवार से कोई भी विरासत की सियासत को आगे बढ़ाने के लिए नहीं आया. 

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बता दें कि भोला पासवान, चंद्रशेखर सिंह, केबी सहाय, दीप नारायण सिंह, महामाया प्रसाद सिन्हा, केदार पांडेय और हरिहर प्रसाद सिंह बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके परिवार से कोई भी राजनीति में नहीं आया है. वहीं, सामाजिक न्याय का नारा बुलंद करने वाले लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के साथ-साथ बेटी भी सियासी विरासत को आगे बढ़ा रही है. बिहार के सीएम रहे समाजवादी नेता रहे कर्पुरी ठाकुर और दरोगा प्रसाद राय का परिवार भी वंशवाद की राजनीति से अछूत नहीं रह सके है. हालांकि, मौजूदा नीतीश कुमार के परिवार से भी अभी कोई राजनीति में नहीं आया है. 

1. भोला पासवान 
बिहार के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री देश के पहले दलित सीएम बने थे. कांग्रेस से 1967 में उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और 22 मार्च 1968 में वो पहली बार सीएम बने. इसके बाद 22 जून 1969 को उन्होंने फिर सत्ता की कमान संभाली जबकि तीसरी बार वे दो जून 1971 सीएम बने. बिहार की सियासत में कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाते थे, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए परिवार से कोई नहीं आया. 

2. दीप नारायण
बिहार के पहले मुख्यमंत्री कृष्णा सिंह के निधन के बाद कांग्रेस नेता दीप नारायण ने सत्ता की कमान संभाली थी. वो बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री के तौर पर फरवरी 1991 में शपथ ली थी,  लेकिन महज 18 दिन तक रह सके थे. हालांकि, दीप नारायण सिंह के परिवार से भी कोई सियासत में नहीं आया. 

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3. महामाया प्रसाद सिन्हा
बिहार में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार 1967 में बनी और मुख्यमंत्री का ताज महामाया प्रसाद सिन्हा के सिर सजा था. वो बिहार में पहले गैर-कांग्रेसी सीएम थे. सत्ता की कमान उन्होंने करीब 10 महीने संभाली. हालांकि, महामाया प्रसाद सिन्हा के परिवार से भी कोई सियासत में नहीं आया.

4. केबी सहाय 
बिहार की राजनीति में कांग्रेस नेता केबी सहाय की अपनी तूती बोलती थी. वो अक्टूबर 1963 में बिहार के मुख्यमंत्री बने और मार्च 1967 तक रहे. चार साल बिहार की सत्ता में रहने के बाद भी केबी सहाय के परिवार से कोई राजनीति में नहीं आया. 

5. हरिहर सिंह 
बिहार में कांग्रेस के दिगगज नेता रहे हरिहर सिंह फरवरी 1969 में मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि, करीब चार महीने ही वो इस पद पर रह सके. राजनीतिक हालत ऐसे बन गए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. हरिहर सिंह के परिवार से भी कोई राजनीति में नहीं आया. 

6. केदार पांडेय
बिहार की राजनीति में कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा रहे केदार पांडेय मार्च 1972 में मुख्यमंत्री बने. वो सीएम की कुर्सी पर करीब 1 साल साढ़े तीन महीने रहे. बिहार की राजनीति में अच्छी पकड़ रही है, लेकिन उनके परिवार से भी कोई राजनीति में नहीं है. 

7. चंद्रशेखर सिंह 
कांग्रेस में बिहार की राजनीति में चंद्रशेखर सिंह की अपनी साख थी. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी नेता के तौर पर जाने जाते थे. अगस्त 1983 में चंद्रशेखर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने करीब पौने दो साल तक सत्ता की कमान संभाली, लेकिन उनके विरासत को उनके परिवार से कोई आगे बढ़ाने नहीं आया. 

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