बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव नए अंदाज में प्रचार करते नजर आ रहे हैं. वो सामाजिक न्याय के बजाय रोजगार, बाढ़, पलायन जैसे मुद्दों को तरजीह दे रहे हैं. तेजस्वी के निशाने पर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि सीएम नीतीश कुमार हैं. इसी तरह से सीपीआई नेता कन्हैया कुमार भी पीएम मोदी पर सीधे हमला करने से बच रहे हैं और नीतीश सरकार की नीतियों पर हमलावर है. ऐसे में सवाल उठता है कि तेजस्वी-कन्हैया आखिर पीएम मोदी को निशाने पर क्यों नहीं ले रहे हैं?
मोदी पर तेजस्वी की चुप्पी
बता दें कि लोकसभा और पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने सर्वाधिक निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा था. लालू यादव की गैरमौजूदगी में तेजस्वी यादव ही पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा निशाना नरेंद्र मोदी पर साधा था. इसके बावजूद आरजेडी बिहार में खाता भी नहीं खोल सकती थी. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार तेजस्वी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है.
तेजस्वी और आरजेडी नेताओं के हमले के केंद्र में नीतीश कुमार सरकार है. बिहार में अब तक कई रैलियां और कार्यक्रम में तेजस्वी ने सांप्रदायिकता को मुद्दा बनाने से परहेज रखा है. नीतीश सरकार के 15 साल के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं. आरजेडी के इस बदले तेवर को लेकर पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी aajtak.in से बात करते हुए कहते हैं कि देश का नहीं बल्कि प्रदेश का चुनाव है. ऐसे में पिछले 15 साल के नीतीश कुमार की सरकार है तो सवाल उन्हीं से होगा. बिहार में एनडीए का चेहरा पीएम मोदी नहीं बल्कि नीतीश है. बिहार का चुनाव राष्ट्रीय नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जा रहा है, यहां की अपनी समस्याएं है, जिसके लिए नीतीश कुमार जिम्मेदार हैं.
एंटी इन्कम्बेंसी भुनाने की कवायद
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश पर निशाना आरजेडी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. माना जा रहा है कि नीतीश के 15 साल के कार्यकाल से उपजे एंटी इन्कम्बेंसी को भुनाने और युवाओं को साधने की है. युवा मतदाताओं को रिझाने के लिए तेजस्वी पलायन, बेरोजगारी, उद्योग-धंधा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे उछाल रहे हैं. तेजस्वी लगातार कैबिनेट की पहली बैठक में दस लाख नौकरियों का वादा कर रहे हैं.
नीतीश के खिलाफ गुस्सा-कन्हैया
सीपीआई नेता कन्हैया कुमार बिहार में चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन स्टार प्रचारक की भूमिका में जरूर हैं. वो बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर तीखी शैली में हमला करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बिहार के रण में तटस्थ नजर आ रहे हैं. मोदी से ज्यादा नीतीश कुमार पर हमलावर हैं. कन्हैया ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि इस बार बिहार में पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट नहीं पड़ने वाले हैं, हर किसी के मन में नीतीश कुमार के खिलाफ गुस्सा है. कन्हैया ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की मुद्दा हैं.
पीएम पर हमले से विपक्ष का परहेज
राजनीतिक विश्लेषक संजीव कुमार कहते हैं कि पीएम मोदी पर हमले से बिहार के स्थानीय मुद्दों पर आरजेडी के चुनाव लड़ने की रणनीति पर पानी फिरेगा. पीएम की एक बड़े वर्ग में गहरी पैठ के चलते भी तेजस्वी यादव केंद्र पर हमलावर नहीं है. बिहार में बड़ा वर्ग है, जो नीतीश कुमार से तो नाराज है लेकिन मोदी के कामकाज को लेकर उसकी शिकायतें नहीं है. बिहार में लोग मुफ्त राशन, जनधन खातों में नकद राशि मिलने, उज्ज्वला, शौचालय, किसान सम्मान जैसी योजनाओं के कारण अभी भी पीएम से खुश हैं. हालांकि, पीएम से खुश दिखने वालों में एक बड़ा वर्ग नीतीश से नाराज है, जिसका आरजेडी इसी स्थिति का लाभ उठाने के लिए खासतौर पर नीतीश और राज्य सरकार को निशाना बनाकर स्थानीय मुद्दों को उछाल रहा है.
राज्यों के चुनाव से सबक
2019 के लोकसभा के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, वहां स्थानीय मुद्दे पर अड़े रहने का लाभ विपक्ष को मिला है. स्थानीय मुद्दों के कारण ही बीजेपी को बिहार के बगल झारखंड की सत्ता गंवानी पड़ी. दिल्ली में लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी को करारी हार झेलनी पड़ी. हरियाणा में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए जेजेपी का सहारा लेना पड़ा है. इन सभी राज्यों में विपक्ष ने स्थानीय मुद्दों को महत्व दिया था, जिस पर आरजेडी भी चलती नजर आ रही है. बिहार में भी इसी फार्मूला को तेजस्वी यादव आजमाने की कोशिश करते दिख रहे है.