
बिहार चुनाव की दिनभर चली मतगणना और कांटे की टक्कर के बाद एनडीए को जीत मिली तो पटना में खूब पटाखे फूटे. लेकिन ये सिर्फ ट्रेलर था. असली पिक्चर वहां से एक हजार किलोमीटर दूर देश की राजधानी दिल्ली में दूसरे दिन दिखी. यहां बीजेपी मुख्यालय में जीत का जबर्दस्त जश्न मना. इस जश्न में बिहार में पार्टी को जीत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया गया.
राज्यों के चुनावों में बीजेपी की जीत का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को देने की परंपरा तो 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही शुरू हो गई थी, लेकिन बिहार का मामला अलग है. यहां एनडीए ने कांटे के मुकाबले में जो विजय पाई, उसका श्रेय पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक भी मोदी को ही दे रहे हैं और इसकी वजहें भी हैं.
बिहार चुनाव का बिगुल बजा तो किसी ने सोचा नहीं था कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता में वापसी के लिए नाको चने चबाना पड़ेगा. तेजस्वी की रैलियों में उमड़ी भीड़, चिराग पासवान के बागी तेवर और रैलियों में गुस्से में उखड़ते नीतीश कुमार को देखकर सबको अहसास हो गया था कि बिहार में बहार हो या न हो, वोटरों में एक बेकरारी तो है ही. बेकरारी की ये बाढ़ क्या बिहार से नीतीश की सत्ता उखाड़ देगी? ये सवाल खड़ा हो गया.
रोमांचक रहा मुकाबला
एग्जिट पोल आए तो नीतीश की हार और तेजस्वी की जीत की मुनादी कर दी गई. 10 नवंबर को सुबह ईवीएम खुलीं तो उसने भी महागठबंधन के लिए वोट उगलने शुरू कर दिए. एक वक्त तो ऐसा आया जब महागठबंधन को जीत के लिए महज कुछ सीटों की जरूरत थी जबकि एनडीए सौ सीटों पर भी आगे नहीं था. लेकिन 2020 की बिहार की इस पॉलिटिकल लीग के सुपरओवर में भी 20-20 जैसा रोमांच था, जिसके बाद जब नतीजे आए तो उसने 125 सीटों के साथ फिर एक बार एनडीए सरकार पर मुहर लगा दी.
नीतीश की सत्ता भले बच गई हो लेकिन एनडीए के पार्टीवार आंकड़े सामने आए तो साफ हो गया कि जीत के असली नायक वो नहीं बल्कि चार दिन में महज 12 रैलियों से चुनाव का रुख पलट देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. इन चुनावों में जेडीयू महज 43 सीटों पर सिमट गई जबकि बीजेपी को 74 सीटों पर जीत दर्ज हुई. उसका स्ट्राइक रेट बाकी सभी पार्टियों के मुकाबले सबसे बेहतर रहा.
मोदी ने की 12 रैलियां
बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 12 रैलियां कीं. इन रैलियों के जरिए सौ से ज्यादा विधानसभा सीटों को कवर किया गया. इनमें से 63 सीटों पर एनडीए को जीत मिली. 63 का ये आंकड़ा एनडीए को कुल मिलीं 125 सीटों के आधे से अधिक है.
पीएम मोदी की लोकप्रियता को बिहार चुनाव में भुनाने के लिए बीजेपी ने पूरी प्लानिंग के साथ काम किया. मोदी की रैलियां ऐसी जगहों पर रखी गईं, जहां सत्ता विरोधी लहर प्रचंड मानी जा रही थी. मोदी ने बिहार चुनाव अभियान की शुरुआत 23 अक्टूबर को सासाराम से की. उसी दिन उन्होंने गया और भागलपुर में भी सभाएं कीं. इन तीनों जिलों की सीटों पर पहले चरण में वोटिंग हुई थी. इस चरण में पीएम मोदी के रैलियों की सफलता का प्रतिशत महज 29 फीसदी रहा.
असर ये हुआ कि पहले चरण में महागठबंधन का पलड़ा भारी रहा. इस चरण की कुल 71 सीटों में महागठबंधन को 47 तो एनडीए को सिर्फ 22 सीटें मिलीं. माना जा रहा है कि पीएम मोदी ने अपनी पहली ही रैली से बिहार की सियासी फिजा को भांप लिया. उसके बाद उनके भाषणों के मुद्दे बदले और विपक्ष पर वार तीखे हो गए.
पीएम मोदी ने बिहार के दूसरे चरण में प्रचार के लिए 28 अक्टूबर का दिन चुना. इस दिन पहले चरण की वोटिंग हो रही थी. मोदी ने अपने दूसरे दौरे में मिथिलांचल के दरभंगा और मुजफ्फरपुर के साथ राजधानी पटना में रैलियों को संबोधित किया. इन रैलियों के जरिए उन्होंने माहौल को एनडीए के पक्ष में मोड़ा. दूसरे चरण में पीएम ने जिन इलाकों में रैली की, वहां पर करीब 56 फीसदी नतीजे एनडीए के पक्ष में आए.
विकास कार्यों का जिक्र किया
दरभंगा की रैली में पीएम मोदी ने एनडीए सरकार के मिथिलांचल इलाके में किए विकास कार्यों का जिक्र किया, जिसमें दरभंगा एयरपोर्ट से लेकर एम्स और कोसी को जोड़ने वाला रेलवे पुल तक शामिल थे. इसके अलावा मिथिलांचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पान-माछ-मखाना को आगे ले जाने की बात कही. दूसरे चरण में महागठबंधन को 42 सीटें मिलीं और वो एनडीए की 51 सीटों के मुकाबले पिछड़ गया.
देखें: आजतक LIVE TV
बिहार के तीसरे चरण में पीएम मोदी ने दो दौरे और छह रैलियां संबोधित कीं. इसके जरिए महागठबंधन के पक्ष में दिख रही सियासी फिजा को उन्होंने पूरी तरह से अपने पक्ष में कर लिया. पीएम मोदी ने 1 नवंबर को तीसरे दौरे में पूर्वी चंपारण, छपरा और समस्तीपुर की सभाओं को संबोधित किया जबकि 3 नवंबर को चौथे दौरे में पश्चिम चंपारण, सहरसा और फारबिसगंज में चुनावी सभाएं कीं.
आखिरी चरण की सीटों पर मोदी ने जिस आक्रामक ढंग से तेजस्वी और राहुल गांधी पर हमला बोला और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा, उसने सारे राजनीतिक माहौल को बदलकर रख दिया. अंतिम चरण में ही एनडीए पूरी तरह महागठबंधन पर हावी रहा. पीएम मोदी ने जिन इलाकों में रैली कीं, वहां का स्ट्राइक रेट 73 फीसदी रहा.
तीसरे चरण की 94 सीटों में से महागठबंधन को महज 21 सीटें मिल सकीं. एनडीए ने 52 सीटों पर जीत दर्ज की. इस चरण के बदले समीकरण ही थे जिसने एनडीए को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापस पहुंचाया और तेजस्वी के सीएम बनने के अरमानों पर पानी फेर दिया.