राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के नेता उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की. बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि प्रदेश की जनता और अपने साथियों के हित को सामने रखकर निर्णय लेंगे.
उपेंद्र कुशवाहा ने बैठक में कहा कि महागठबंधन की परिस्थितियों पर विचार करते हुए पार्टी ने मुझे अधिकृत किया है कि जो निर्णय लिया जाएगा, सभी लोग उसके साथ हैं. आगे जो भी निर्णय होगा उसे सोच समझ कर लिया जाएगा. प्रदेश की जनता और साथियों के हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा और इसकी सूचना दी जाएगी.
बता दें आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन से अपना अलग रास्ता तलाश रहे हैं. इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी महागठबंधन छोड़ दिया है. महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर उपेंद्र कुशवाहा नाराज बताए जा रहे हैं. दूसरी ओर आरजेडी ने साफ कर दिया है कि जिसे महागठबंधन छोड़ना है, वह इसके लिए स्वतंत्र है. अब आगे देखने वाली बात होगी कि कुशवाहा महागठबंधन में बने रहते हैं या उसका दामन छोड़ते हैं. इस फैसले पर आरएलएसपी ने गुरुवार को एक बैठक बुलाई जिसमें आगे के कदमों पर चर्चा की गई.
उपेद्र कुशवाहा की पार्टी महागठबंधन का हिस्सा बनने से पहले एनडीए के साथ थी लेकिन 2018 में कुशवाहा एनडीए से अलग हो गए. उपेंद्र कुशवाहा आरएलएसपी के संस्थापक हैं. मोदी सरकार में साल 2014 में उन्हें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया था. इसके बाद जब कैबिनेट में फेरबदल हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया. उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री के पद से इस्तीफे के साथ ही एनडीए से भी नाता तोड़ दिया. अब उनकी पार्टी यूपीए का हिस्सा है, लेकिन अब इससे भी अलग होने की अटकलें लगाई जा रही हैं.