बिहार में समय पर चुनाव होंगे लेकिन NDA या महागठबंधन का स्वरूप क्या होगा ये अभी तय नहीं है. महागठबंधन में वैसे भी कौन पार्टी रहेगी और कौन तीसरे मोर्चे के साथ होगा वो तो चुनाव के क्लाइमैक्स में पता चलेगा. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि NDA में क्या होगा.
2019 के लोकसभा चुनाव में पूरी एकजुटता से लड़ने वाली NDA विधानसभा चुनाव में एकजुटता दिखा पाएगी? बीजेपी, जेडीयू और LJP साथ-साथ चुनाव में उतरेंगे. जहां तक जेडीयू और बीजेपी का सवाल है तो उनके साथ लड़ने में अब कोई संशय नहीं है, लेकिन LJP क्या करेगी सवाल ये है. LJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के तेवर से साफ लगता है कि यदि पार्टी को सम्मानजनक सीट और महत्व नहीं मिला तो वो कोई दूसरा रास्ता अपनाने से गुरेज नहीं करेंगे.
LJP के विचार भी लगातार NDA से अलग दिख रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण चुनाव कराने के मुद्दे पर दिखा. बीजेपी और जेडीयू समय पर चुनाव चाहती रही लेकिन उसी की सहयोगी पार्टी LJP कोरोना को लेकर चनाव टालने की दलील देती रही हालांकि चुनाव आयोग ने भी समय पर चुनाव कराने की बात कही है.
एलजेपी का सीधा और सरल जवाब- सत्ता में भागीदारी
LJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने लगातार ऐसे संकेत दिए हैं जिससे लगता है कि बिहार में NDA सरकार के मौजूदा रवैये से खुश नहीं हैं. इसको लेकर वो लगातार नीतीश सरकार पर अपने पत्रों के जरिए हमलावर भी रहे जैसे कि वो विपक्ष में हों. वो चाहे कानून व्यवस्था का मामला हो या फिर कोरोना को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठना हो या चाहे बाढ़ की समस्या हो.
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ध्यान देने वाली बात ये है कि चिराग पासवान राष्ट्रीय स्तर के NDA के प्रसंशक और बिहार के NDA के आलोचक क्यों है? वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आलोचक क्यों हैं? जबकि दोनों अपने स्तर से NDA के मुखिया के तौर पर सरकार चला रहे हैं. तो इसका सीधा और सरल जवाब सत्ता में भागीदारी है.
केंद्र की सरकार में पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान केंद्रीय मंत्री हैं, लेकिन बिहार की सत्ता में वर्तमान में LJP की कोई भागीदारी नहीं है. जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से गठबंधन तोड़कर 2017 जुलाई में बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में NDA की सरकार बनाई थी तब LJP की तरफ से चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस बिहार सरकार में मंत्री बने थे लेकिन 2019 में हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से रामविलास पासवान के चुनाव न लड़ने के फैसले की वजह से उन्हें बेमन मैदान में उतरना पड़ा और वो सांसद बन गए.
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उनकी जगह पर LJP को भागीदारी मिलनी चाहिए थी लेकिन नहीं मिली. इससे बिहार में LJP खुद को उपेक्षित महसूस करने लगी. सत्ता में भागीदारी न होना नीतियों को लेकर कोई विमर्श न होना LJP के बिहार NDA से विमुख होने का मुख्य कारण है. अब बिहार में समय पर चुनाव होने जा रहा है. ऐसे में NDA में उन्हें कितने सीटों की भागीदारी मिलेगी इसको लेकर पार्टी को चिंता है.
लोकसभा में NDA के साथ और विधानसभा में NDA से दूर
चिराग पासवान का कहना है कि बिहार में NDA की सरकार है लेकिन कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम नहीं बना. 7 निश्चय पर सरकार काम कर रही है लेकिन ये निश्चय महागठबंधन के दौर का है. बिहार में कोरोना और बाढ़ की कुव्यवस्था को लेकर लोग सरकार से नाराज हैं और ऐसे समय में चुनाव कराने से नीतीश कुमार और NDA को नुकसान उठाना पड़ सकता है. यही वजह है कि उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव टालने की गुजारिश की थी. चिराग पासवान को एक और दलित नेता जीतनराम मांझी के NDA में दोबारा आने की आहट भी परेशान कर रही है.
बहरहाल चिराग पासवान की नजर बिहार NDA पर है अगर उन्हें उचित भागीदारी नहीं मिली तो वो दूसरे विकल्प की तरफ जाने से परहेज नहीं करेंगे. वो ये भी हो सकता है कि लोकसभा में NDA के साथ और विधानसभा में NDA से दूर.