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बिहार में शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है. लेकिन लगता है कि कानून पर कमजोर अमल, भ्रष्टाचार और चुनाव के दौरान शराब की डिमांड ने बिहार में नकली शराब का अवैध कारोबार खड़ा कर दिया है. इंडिया टुडे ने पड़ताल की कि चुनावी सरगर्मियों के बीच बिहार में शराबबंदी की क्या हालत है.
चुनाव में बढ़ी शराब की मांग
आजतक/इंडिया टुडे ने पाया कि सस्ती और लोकल शराब को पैक करके मशहूर और लोकप्रिय ब्रांड के नाम पर सप्लाई की जा रही है. इसे बाल्टी में तैयार किया जाता है और फैंसी लेबल वाले बोतलों में भरा जाता है.
हमारी पड़ताल के दौरान तस्करों और अवैध शराब बनाने वालों ने स्वीकार किया कि चुनाव के दौरान खास तौर पर मांग बढ़ गई है.
सीतामढ़ी में एक लोकल शराब बनाने वाले मनोज कुमार ने इंडिया टुडे से कहा, "शराब का सारा स्टॉक लोकल नेताओं के हाथ में चला गया है. इसे (रैलियों में) एक दो लोगों को नहीं, बल्कि 20,000 लोगों को बांटा जा रहा है. उन्हें (ग्राहक को) विधायकी का टिकट मिला है, इसलिए वहां बहुत कुछ हो रहा है."
मनोज कुमार ने नकली व्हिस्की तैयार करने और पैकेजिंग के लिए दो लोगों को नौकरी पर रखा है. इस शराब निर्माता ने रिपोर्टर को एक संभावित ग्राहक मानते हुए बताया, "आप इसे शाम को ले सकते हैं जब यह तैयार होगी. ये इंग्लिश है. एक कार्टन 24 बोतल का है. हर बोतल में 375 एमएल है."
मनोज ने IMFL ब्रांड नेम वाली बोतलें दिखाईं और दावा किया कि ये इंग्लिश शराब है. उन्होंने गुणवत्ता की गारंटी भी दी.
मनोज ने बताया, "हम इसे एक बड़ी बाल्टी में तैयार करते हैं और क्वालिटी के लिए एक टेस्टिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं. उसके बाद इसे (बोतल में) पैक कर दिया जाता है और लेबल चिपका दिया जाता है. ढक्कन पर भी एक छोटा स्टिकर चिपकाया जाता है. स्किल की जरूरत होती है. आप भांप नहीं सकते कि ये असली है या नकली है."
उसने बताया, "नेता लोग हमारे पास मौजूद कुल स्टॉक की मांग कर रहे हैं. वाहनों को क्षमता भर लोड किया जा रहा है."
मनोज कुमार का कहना है कि पहले वे हर दिन 20 कार्टन बेचा करते थे, लेकिन चुनाव के दौरान हर दिन 50 कार्टन तक बेच रहे हैं. उसने कहा, "लेकिन अब जब हम हर दिन 50 कार्टन माल तैयार कर रहे हैं, तब भी पर्याप्त नहीं है."
बिहार में बिक रहा नेपाल का माल
सीतामढ़ी में अवैध शराब के एक और डीलर मोहम्मद तबरेज ने बोगस नेपाली स्प्रिट की 24 बोतल का कार्टन आफर किया, जिस पर ब्रांडेड व्हिस्की के नाम का लेबल चिपकाया गया है.
उसने बताया, "हमें इसे नेपाल से लाते हैं. हमें इसकी तीन क्वालिटी मिलती है - लो, मीडियम और हाई. आपको हाई क्वालिटी मिलेगी."
तबरेज ने कहा कि बोतलों पर इंपीरियल ब्लू का स्टिकर चिपकाया जाएगा. उसने दावा किया कि "हम 20-25 कार्टन का इंतजाम कर देंगे." तबरेज के साथी जिम्मेदार यादव ने कहा कि एक कार्टन का दाम 7,500 रुपये होगा.
मुजफ्फरपुर में शराब तस्कर दूसरे राज्यों से तस्करी करके लाई गई शराब बेचते मिले. ये हरियाणा जैसे राज्यों से लाई जाती है जहां पर शराबबंदी नहीं है. एक लोकल डीलर संजय ने शेखी बघारते हुए दावा किया कि वह लॉकडाउन के दौरान भी बिहार में व्हिस्की खरीदने और बेचने का काम कर रहा था.
उसने कहा, "एपीसोड एक नया ब्रांड है. इसकी मांग पहले भी थी. ये लॉकडाउन के दौरान भी बिकी."
बिहार में शराब पर सीएम की नकेल
एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी को अपने मौजूदा कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में से एक मानते हैं.
उनकी सरकार कानून लाई थी कि जिसके मुताबिक शराब का उत्पादन करने, संग्रहीत करने या सेवन करने वाले की संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा. बाद में इस कानून में एक संशोधन करके प्रावधान किया गया कि इस अपराध में पहली बार पकड़ा गया व्यक्ति अगर 50,000 रुपये का जुर्माना नहीं भरता है तो उसे अनिवार्य रूप से जेल जाना होगा.
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2016 में ये कानून लागू होने के बाद बिहार पुलिस ने बड़ी संख्या में छापेमारी की है.
पुलिस मुख्यालय, पटना के हवाले से आई खबरों के अनुसार, अप्रैल 2016 से लेकर जनवरी 2020 के बीच इस शराबबंदी कानून के उल्लंघन के कुल 47,395 मामले दर्ज किए गए थे. आंकड़े के मुताबिक, राज्य में कुल मिलाकर 70 लाख लीटर शराब जब्त की गई. 28,000 से अधिक वाहन जब्त किए गए जो शराब लाने-ले जाने के दौरान पकड़े गए थे. इस कानून का उल्लंघन करने के लिए 2 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई और इनमें से 232 लोगों को सजा सुनाई गई.
शराबबंदी की कीमत
2016 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2014-15 में बिहार को शराब की बिक्री से 3,100 करोड़ रुपये की आय हुई थी. सर्वे के मुताबिक, 2015-16 में अनुमानित बजट 4,000 करोड़ था. इसलिए शराबबंदी के बाद के वर्षों में शराब की बिक्री से होने वाला कर संग्रह बंद हो गया और राज्य के राजस्व पर काफी असर पड़ा.
राज्य के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में अप्रैल 2016 में जब शराब पर प्रतिबंध लगा, उसके पहले हर महीने बिहार में 2.6 करोड़ लीटर शराब की खपत हो रही थी. उस दौरान पूरे देश में शराब की खपत का अनुमान करीब 5.70 अरब लीटर का था.