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Bihar Election Result: शत्रुघ्न-शरद के बेटे-बेटी पीछे, सदानंद सिंह के बेटे ने बना रखी है बढ़त

बिहार विधानसभा चुनाव की 243 सीटों पर मतगणना कुछ देर में शुरू होगी. प्रदेश में सबसे ज्यादा नजर उन सीटों पर है, जहां दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियां चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव की प्रतिष्ठा ही दांव पर नहीं है बल्कि शरद यादव की बेटी से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे सहित दो दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटें हैं, जहां पर उन्हें पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की चिंता है. 

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं
  • तेजप्रताप यादव हसनपुर सीट से चुनावी मैदान में
  • बिहार में दिव्य प्रकाश सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं

बिहार विधानसभा चुनाव की 243 सीटों पर उतरे 3737 प्रत्याशियों की किस्मत का आज फैसला होना है. ऐसे में सबसे ज्यादा नजर उन सीटों पर है, जहां दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियां चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव की प्रतिष्ठा ही दांव पर नहीं है बल्कि शरद यादव की बेटी से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे सहित दो दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटें हैं, जहां पर उन्हें पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की चिंता है. 

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राघोपुर: तेजस्वी यादव आगे चल रहे
वैशाली जिले की राघोपुर विधानसभा सीट से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं. तेजस्वी को महागठबंधन ने मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया है, जिसकी वजह से इस सीट पर पूरे देश की नजर है. बीजेपी  ने उनके सामने सतीश कुमार को उतारा है. सतीश, 2010 के चुनाव में पूर्व सीएम राबड़ी देवी को हरा चुके हैं. वहीं, एलजेपी की ओर से मैदान में उतारे गए राकेश रौशन ने यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. हालांकि, 1995 से यह इलाका आरजेडी का मजबूत गढ़ माना जाता है और लालू यादव यहां से चुनाव जीतते रहे हैं. 

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हसनपुर: तेजप्रताप यादव आगे चल रहे
समस्तीपुर जिले की हसनपुर विधानसभा सीट से पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव मैदान में हैं. 2015 में उन्होंने महुआ से चुनाव जीता था, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी सीट बदल दी है. तेजप्रताप के सामने जेडीयू के वर्तमान विधायक राजकुमार राय चुनावी ताल ठोक रहे हैं. यादव बहुल इस सीट पर कांटे का मुकाबला माना जा रहा है.

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परसा: चंद्रिका राय पीछे चल रहे हैं
सारण जिले की परसा विधानसभा सीट काफी हाई प्रोफाइल मानी जा रही है और इस बार यहां काफी कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. जेडीयू के टिकट पर यहां से पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय के बेटे और लालू यादव के समधी चंद्रिका राय मैदान में उतरे हैं. वहीं आरजेडी के टिकट पर इस सीट से छोटे लाल राय चुनाव मैदान में हैं जबकि एलजेपी ने इस सीट पर राकेश कुमार सिंह को उतारा है. चंद्रिका राय के लिए उनकी बेटी एश्वर्या राय ने भी वोट मांगने का काम किया है, लेकिन देखना है कि वो अपने पिता को जिता पाती हैं कि नहीं. 

बिहारीगंज: सुभाषिनी यादव पीछे चल रहे
पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव मधेपुरा इलाके की बिहारीगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रही हैं, जिनका मुकाबला जेडीयू के निरंजन कुमार मेहता से माना जा रहा है. हालांकि, जेडीयू यहां पर पिछले दो चुनाव से लगातार जीत दर्ज कर रही है जबकि इससे पहले आरजेडी का तीन बार कब्जा रहा है. 

बांकीपुर: लव सिन्हा पीछे चल रहे हैं
फिल्म अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा की किस्मत का फैसला होना है. लव सिन्हा पटना के बांकीपुर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे हैं, जहां उनका मुकाबला बीजेपी के तीन बार के विधायक नितिन नवीन और प्लूरल्स पार्टी से उतरीं पुष्पम प्रिया से है. नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा भी यहां से कई बाहर विधायक रह चुके हैं. ऐसे ही पुष्पम प्रिया भी जेडीयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी है. इस तरह से बांकीपुर सीट पर तीनों नेता अपने-अपने पिता की सियासी विरासत को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 

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 बीजेपी प्रत्याशी नितिन नवीन आगे चल रहे हैं

कहलगांव: शुभानंद मुकेश आगे चल रहे हैं
भागलपुर का कहलगांव सीट कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह नौ बार से विधायक रहे  हैं, लेकिन इस बार वे खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं बल्कि उनके पुत्र शुभानंद मुकेश का सियासी सफर दांव पर है. शुभानंद मुकेश कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं जबकि बीजेपी से पवन यादव किस्मत आजमा रहे हैं. शुभानंद मुकेश के सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की बड़ी चुनौती है तो बीजेपी को यहां कमल खिलाने की चिंता है. 

 

जमुई: श्रेयसी सिंह पीछे चल रही हैं
जमुई विधानसभा सीट पहले चरण में हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल है. यहां से बीजेपी के टिकट पर अंतर्राष्ट्रीय शूटर श्रेयसी सिंह मैदान में हैं. वहीं, आरजेडी से मौजूदा विधायक विजय प्रकाश और आरएलएसपी से पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र अजय प्रताप किस्मत आजमा रहे हैं. श्रेयसी भले ही खिलाड़ी रही हों लेकिन उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक रही है. उनके पिता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रहे हैं जबकि उनकी मां पुतुल सिंह सांसद रही हैं. ऐसे ही विजय प्रकाश के बड़े भाई जय प्रकाश केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और अजय प्रताप के पिता भी बिहार में मंत्री रहे हैं. इस तरह से जमुई की लड़ाई काफी दिलचस्प मानी जा रही है.

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तारापुर: दिव्या प्रकाश आगे चल रही हैं
तारापुर विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी का युवा चेहरा दिव्या प्रकाश का भी सियासी भविष्य दांव पर लगा है. यहां से जेडीयू से मेवालाल चौधरी, एलजेपी से मीना देवी, जाप से कर्मवीर कुमार और आरएलएसपी से जितेन्द्र कुमार मैदान में है. हालांकि, यह सीट दिव्या प्रकाश के चुनाव लड़ने के चलते ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरजेडी के दिग्गज नेता जय प्रकाश यादव की बेटी हैं. पहले चरण की सबसे युवा प्रत्याशी दिव्या प्रकाश की तो उम्र केवल 28 साल है और वो चुनावी समर में उतरी हैं. 2015 में यहां से मेवालाल चौधरी विधायक चुने गए थे. 

लालगंज: पप्पू सिंह पीछे चल रहे हैं
पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार के भतीजे पप्पू सिंह कांग्रेस के टिकट पर लालगंज से मैदान में हैं, जिनके खिलाफ बीजेपी से संजय कुमार सिंह, एलजेपी से राजकुमार शाह और आरएलएसपी के दिनेश कुमार कुशवाहा ताल ठोक रहे हैं. इस सीट के मौजूदा विधायक एलेजेपी के राजकुमार शाह हैं.

सुल्तानगंज: ललन यादव पीछे चल रहे हैं
सुल्तानगंज से युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष युवा नेता ललन यादव भी चुनावी मैदान में हैं. ललन की सुल्तानगंज में अच्छी पैठ है जबकि जातीय समीकरण भी इनके पक्ष में दिखाई दे रहा है. जेडीयू से ललित नारायण मंडल, आरएलएसपी से हिमांशु प्रसाद और एलजेपी की नीलम देवी भी मैदान में हैं. इस सीट से मौजूदा विधायक जेडीयू के सुबोध राय थे, जो लगातार दूसरी बार इस सीट पर विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन पार्टी ने इस बार उनका टिकट काट दिया है, लेकिन इस सीट की चर्चा ललन यादव के चलते है. 

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मखदूमपुर: देवेंद्र कुमार मांझी पीछे चल रहे हैं
मखदुमपुर सीट से जीतनराम मांझी के दामाद देवेंद्र कुमार मांझी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से मैदान में हैं. देवेंद्र कुमार के खिलाफ आरजेडी से सतीश दास चुनावी मैदान में उतरे हैं. इसी सीट पर दोनों प्रत्याशी युवा हैं, लेकिन सतीश दास एक साधारण परिवार के साथ-साथ महादलित समुदाय के रविदास समाज से आते हैं. वो आरजेडी के छात्र संगठन से जुड़े रहे हैं, जिसके चलते पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक सुबेदार दास का टिकट काटकर उन्हें मैदान में उतारा है. 


पालीगंज: जयवर्धन यादव
पालीगंज सीट पर दो युवा नेताओं के बीच सियासी मुकाबला माना जा रहा है. यहां से विधायक रहे जयवर्धन यादव ने इस बार आरजेडी छोड़कर जेडीयू के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं. इनका मुकाबला भाकपा माले के प्रत्याशी संदीप सौरभ से है, जो आइसा महासचिव और जेएनएसयू छात्रसंघ के पूर्व महासचिव हैं. वहीं, बीजेपी से बगावत कर एलजेपी से  पूर्व विधायक उषा विद्यार्थी किस्मत आजमा रही हैं.  हालांकि, यह जयवर्धन परिवार का मजबूत इलाका माना जाता है, उनके पिता राम लखन यादव भी कई बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन माले के संदीप सौरभ भी यादव समुदाय से आते हैं, जिसके चलते यहां की सियासी लड़ाई काफी रोचक हो गई है. 

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गायघाट: कोमल सिंह पीछे चल रहीं
मुजफ्फरपुर जिले की गायघाट विधानसभा एलजेपी के टिकट पर कोमल सिंह चुनावी मैदान में है, जिनके पिता दिनेश सिंह जेडीयू से एमएलएसी हैं और मां वीणा देवी वैशाली सीट से एलजेपी की सांसद हैं. ऐसे में कोमल सिंह के सामने अपने पिता और मां की राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती है. कोमल सिंह के खिलाफ जेडीयू ने माहेश्वर प्रसाद को उतारा है जबकि आरजेडी से निरंजन राय मैदान में है. बता दें कि माहेश्वर प्रसाद 2015 में आरजेडी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्होंने जेडीयू का दामन थाम लिया था. 

जेडीयू के माहेश्वर प्रसाद आगे चल रहे हैं. 

सिमरी बख्तियारपुर: यूसुफ सलाउद्दीन
सहरसा जिले के अंतर्गत आने वाली सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं. यहां से आरजेडी के टिकट पर यूसुफ सलाउद्दीन चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके पिता महबूब कौसर खगड़िया लोकसभा सीट से एलजेपी के सांसद हैं. वहीं, एनडीए गठबंधन में यह सीट वीआईपी के पास है. वीआईपी से यहां पर मुकेश सहनी खुद चुनावी मैदान में हैं. 2015 में विधानसभा चुनाव में सिमरी बख्तियारपुर से आरजेडी के जफर इस्लाम ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार यूसुफ सलाउद्दीन मैदान में है, जिनके सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती है. 

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ठाकुरगंज: सऊद आलम
किशनगंज जिले की ठाकुरगंज विधानसभा सीट पर मौलाना असरारुल हक के बेटे सऊद आलम अपने पिता की राजनीतिक विरासत को पाने के लिए आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. मौलाना असरारुल हक किशनगंज सीट से दो बार सांसद रहे हैं. यहां पर उनके खिलाफ जेडीयू ने अपने मौजूदा विधायक नौशाद आलम को उतार रखा है जबकि एआइएमआइएम से महबूब आलम और निर्दलीय गोपाल अग्रवाल ताल ठोक रहे हैं. इसके अलावा  विगत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती आ रही एलजेपी भी दमखम से मैदान में है. एलजेपी से कलीमउद्दीन ने ठाकुरगंज सीट पर उतरकर लड़ाई को रोचक बना दिया है. 

मधेपुरा: निखिल मंडल
मधेपुरा विधानसभा पर 20 साल के बाद पप्पू यादव चुनाव लड़ रहे हैं. 2015 के चुनाव में मधेपुरा सीट से आरजेडी प्रत्याशी चंद्रशेखर जीते थे. इस बार के विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से चंद्रशेखर मैदान में है जबकि जेडीयू ने निखिल मंडल को अपना उम्मीदवार बनाया है. निखिल मंडल के सामने अपने पिता और दादा की राजनीतिक विरासत बचाने की चिंता है. निखिल के पिता मनिंद्र कुमार मंडल फरवरी 2005 और उसी साल अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में जीते थे. निखिल मंडल बीपी मंडल के पोते हैं, जिनकी रिपोर्ट पर देश में ओबीसी समुदाय को आरक्षण मिला था. पिछले दो चुनाव से यहां चंद्रशेखर का कब्जा है, जिसके चलते निखिल के सामने कड़ी चुनौती है. 

रामगढ़: सुधाकर सिंह
बिहार के कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट प्रदेश की चर्चित सीटों में से एक है, जिस पर प्रदेश नहीं बल्कि देश के लोगों की नजर है. यहां से आरजेडी ने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा, जिनके खिलाफ बीजेपी से मौजूदा विधायक अशोक सिंह एक बार फिर से किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं, बसपा से पूर्व विधायक अंबिका सिंह ने मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है, जिसके चलते सुधाकर सिंह के सामने अपने पिता की सियासी विरासत को बचाए रखने की चुनौती है. 

जोकीहाट: तस्लीमुद्दीन के बेटे
अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट पर बीजेपी, आरजेडी और AIMIM के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है. आरजेडी से सरफराज आलम और बीजेपी से रंजीत यादव मैदान में हैं जबकि शाहनवाज आलम AIMIM से किस्मत आजमा रहे हैं. सरफराज आलम और शाहनवाज आलम सगे भाई है और पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं. जोकीहाट की सियासत तस्लीमुद्दीन के परिवार के इर्द-गिर्द रही है, लेकिन इस बार दोनों भाई के उतरने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. 

शाहपुर: राहुल तिवारी
 शाहपुर विधानसभा सीट पर शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने उतरे हैं. यहां से बीजेपी से मुन्नी देवी, एनसीपी से गुड़िया देवी और आरएलएसपी से वेद प्रकाश किस्मत आजमा रहे हैं. 2015 में बीजेपी से मुन्नीदेवी विधायक चुनी गई थी. 

छपरा:  रणधीर कुमार सिंह 
छपरा विधानसभा सीट पर इस बार की चुनावी भिडंत मुख्य रूप से बीजेपी के डॉ. सीएन गुप्ता और आरजेडी के रणधीर कुमार सिंह के बीच है. डॉ. सीएन गुप्ता इस सीट के मौजूदा विधायक भी है. 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजद के रणधीर कुमार सिंह को ही हराया था. अब इस बार दोबारा से इन दोनों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. 

शिवहर: चेतन आनंद
जेल में बंद बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को आरजेडी ने शिवहर सीट से जबकि उनकी पत्नी लवली आनंद को साहरसा सीट से उतारा है. चेतन आनंद का मुकाबला जेडीयू के मौजूदा विधायक मो. शरफुद्दीन से है. इस सीट पर इस बार एलजेपी के प्रत्याशी विजय कुमार पांडेय न केवल जेडीयू और आरजेडी को कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं, बल्कि लड़ाई को त्रिकोणीय भी बना रहे हैं. ऐसे ही साहरसा सीट पर लवली आनंद के सामने बीजेपी से आलोक रंजन और निर्दलीय  किशोर कुमार मुन्ना मैदान में हैं. हालांकि, साहरसा सीट पर तीसरे चरण में वोटिंग होनी है. 

रोसड़ा: कृष्ण राज
रोसड़ा सुरक्षित विधानसभा सीट पर एलजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. यहां से एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष प्रिंस राज के बड़े भाई कृष्ण राज को मैदान में है, जो चिराग पासवान के चचेरे भाई है. बीजेपी से वीरेंद्र कुमार और कांग्रेस ने नागेंद्र विकल को मैदान में उतारकर यहां की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है.

बड़रिया: बच्चा पांडेय
बड़हरिया विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर बच्चा पांडेय चुनावी मैदान में हैं, जो बीजेपी के एमएलसी चुन्ना पांडेय के भतीजे हैं. यहां जेडीयू से मौजूदा विधायक श्याम बहादुर सिंह, आरएलएसपी से वंदना कुशवाहा और एलजेपी से बीर बहादुर सिंह किस्मत आजमा रहे हैं.

दरभंगा ग्रामीण: फराज फातमी
जेडीयू के टिकट पर दरभंगा ग्रामीण से पूर्व केंद्रीय मंत्री एए फातमी के पुत्र फराज फातमी मैदान में उतरे हैं, जिनके खिलाफ आरजेडी के मौजूदा विधायक ललित यादव एक बार फिर से मैदान में हैं. 

केसरिया: कमला मिश्रा 
केसरिया सीट पर पूर्व सांसद कमला मिश्रा मधुकर की पुत्री शालिनी मिश्रा जेडीयू प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं. वहीं, आरजेडी से संतोष कुशवाहा, एलजेपी से राम शरण यादव और आरएलएसपी से महेश्वर सिंह मैदान में हैं. 2015 में आरजेडी के राजेंद्र प्रसाद ने जीत दर्ज की थी. 

परबत्ता: डॉ. संजीव कुमार
परबत्ता विधानसभा सीट पर आरजेडी और जेडीयू के बीच टक्कर है. आरजेडी ने  दिगंबर प्रसाद तिवारी और जेडीयू ने डॉ. संजीव कुमार को मैदान में उतारा है. जबकि एलजेपी ने आदित्य कुमार शियोर और आरएलएसपी ने अंगद कुमार कुशवाहा को टिकट दिया है. यहां से पूर्व मंत्री आरएन सिंह के बेटे संजीव सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है. 

राजगीर: कौशल किशोर 
राजगीर विधानसबा सीट पर जेडीयू के टिकट पर हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के पुत्र कौशल किशोर उर्फ मणिकांत मैदान में है, जिनके खिलाफ कांग्रेस के रवि ज्योति की साख दांव पर लगी है. रवि ज्योति पुलिस की नौकरी छोड़ कर 2015 में राजनीति में आए थे और राजगीर सुरक्षित सीट से जेडीयू विधायक बने थे, लेकिन जेडीयू ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया है, जिसके चलेत कांग्रेस से हैं. वहीं, कौशल किशोर के पिता इस सीट से बीजेपी के टिकट पर कई बार विधायक रहे हैं. 

 

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