बिहार विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है. इन 78 सीटों पर कुल 1208 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 110 महिला उम्मीदवारों की साख दांव पर लगी है. ऐसे में सबसे ज्यादा नजर उन सीटों पर है, जहां दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियां चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. इन नेताओं के सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की चुनौती है.
गायघाट: कोमल सिंह
मुजफ्फरपुर जिले की गयाघाट विधानसभा सीट काफी चर्चा में है. यहां से एलजेपी के टिकट पर कोमल सिंह चुनावी मैदान में है, जिनके पिता दिनेश सिंह जेडीयू से एमएलएसी हैं और मां वीणा देवी वैशाली सीट से एलजेपी की सांसद हैं. बेटी के पक्ष में वोट मांगने के लिए जेडीयू ने दिनेश सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. ऐसे में कोमल सिंह के सामने अपने पिता और मां की राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती है. कोमल सिंह के खिलाफ जेडीयू ने माहेश्वर प्रसाद को उतारा है जबकि आरजेडी से निरंजन राय मैदान में है.
बता दें कि माहेश्वर प्रसाद 2015 में आरजेडी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्होंने जेडीयू का दामन थाम लिया था. इस तरह से कोमल सिंह के सामने दो दिग्गज मैदान में है, जिसके चलते गयाघाट का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. ऐसे में देखना है कि गयाघाट सीट पर जीत का परचम कौन फहराता है?
सिमरी बख्तियारपुर: यूसुफ सलाउद्दीन
सहरसा जिले के अंतर्गत आने वाली सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं. यहां से आरजेडी के टिकट पर यूसुफ सलाउद्दीन चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके पिता महबूब कौसर खगड़िया लोकसभा सीट से एलजेपी के सांसद हैं. वहीं, एनडीए गठबंधन में यह सीट वीआईपी के पास है. वीआईपी से यहां पर मुकेश सहनी खुद चुनावी मैदान में हैं. 2015 में विधानसभा चुनाव में सिमरी बख्तियारपुर से आरजेडी के जफर इस्लाम ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार यूसुफ सलाउद्दीन मैदान में है, जिनके सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती है.
बिहारीगंज: सुभाषिनी यादव
सुभाषिनी अपने पिता शरद यादव के संसदीय क्षेत्र रहे मधेपुरा इलाके की बिहारीगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रही हैं, जिनका मुकाबला जेडीयू के निरंजन कुमार मेहता से माना जा रहा है. हालांकि, जेडीयू यहां पर पिछले दो चुनाव से लगातार जीत दर्ज कर रही है जबकि इससे पहले आरजेडी का तीन बार कब्जा रहा है. इस तरह से बिहारीगंज सीट पर सभी की निगाहें लगी है और सुभाषिनी यादव के सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती है. मधेपुरा से शरद यादव चार बार सांसद रहे हैं.
ठाकुरगंज: सऊद आलम
किशनगंज जिले की ठाकुरगंज विधानसभा सीट पर मौलाना असरारुल हक के बेटे सऊद आलम अपने पिता की राजनीतिक विरासत को पाने के लिए आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. मौलाना असरारुल हक किशनगंज सीट से दो बार सांसद रहे हैं. यहां पर उनके खिलाफ जेडीयू ने अपने मौजूदा विधायक नौशाद आलम को उतार रखा है जबकि एआइएमआइएम से महबूब आलम और निर्दलीय गोपाल अग्रवाल ताल ठोक रहे हैं. इसके अलावा विगत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती आ रही एलजेपी भी दमखम से मैदान में है. एलजेपी से कलीमउद्दीन ने ठाकुरगंज सीट पर उतरकर लड़ाई को रोचक बना दिया है.
मधेपुरा: निखिल मंडल
बिहार चुनाव के तीसरे चरण में सभी की नजरें मधेपुरा विधानसभा सीट पर है. इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में मधेपुरा सीट से 20 साल के बाद पप्पू यादव चुनाव लड़ रहे हैं. 2015 के चुनाव में मधेपुरा सीट से आरजेडी प्रत्याशी चंद्रशेखर जीते थे. इस बार के विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से चंद्रशेखर मैदान में है जबकि जेडीयू ने निखिल मंडल को अपना उम्मीदवार बनाया है. निखिल मंडल के सामने अपने पिता और दादा की राजनीतिक विरासत बचाने की चिंता है. निखिल के पिता मनिंद्र कुमार मंडल फरवरी 2005 और उसी साल अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में जीते थे. निखिल मंडल बीपी मंडल के पोते हैं, जिनकी रिपोर्ट पर देश में ओबीसी समुदाय को आरक्षण मिला था. पिछले दो चुनाव से यहां चंद्रशेखर का कब्जा है, जिसके चलते निखिल के सामने कड़ी चुनौती है.
तस्लीमुद्दीन के दो बेटों की बीच जंग
अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट पर बीजेपी, आरजेडी और AIMIM के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है. आरजेडी से सरफराज आलम और बीजेपी से रंजीत यादव मैदान में हैं जबकि शाहनवाज आलम AIMIM से किस्मत आजमा रहे हैं. सरफराज आलम और शाहनवाज आलम सगे भाई है और पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं. जोकीहाट की सियासत तस्लीमुद्दीन के परिवार के इर्द-गिर्द रही है, लेकिन इस बार दोनों भाई के उतरने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.