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Samastipur: बीजेपी और जेडीयू में सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुई बगावत

बीजेपी के बागी हुए कुछ कद्दावर नेताओं ने निर्णय लिया कि समस्तीपुर विधानसभा सीट से जदयू प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जाएगा. 

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निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का किया ऐलान
निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का किया ऐलान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी नेताओं ने बुलाई आपात बैठक
  • सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुई बगावत
  • निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का किया ऐलान

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी और जेडीयू के बीच समस्तीपुर जिले में सीट शेयरिंग को लेकर बगावत शुरू हो चुकी है. बीजेपी के बागी हुए कुछ कद्दावर नेताओं ने एक आपात बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि समस्तीपुर विधानसभा सीट से जदयू प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जाएगा. 

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उजियारपुर को लेकर भी विरोध
जिले की उजियारपुर सीट को लेकर भी बीजेपी नेताओं में काफी नाराजगी है. गुरुवार की शाम पटना में प्रो. शील कुमार राय को भाजपा की सदस्यता दिलाई गई है. ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि उजियारपुर सीट से बीजेपी प्रो. शील कुमार राय को प्रत्याशी बना सकती है. भाजपा की सदस्यता ग्रहण की जानकारी मिलते ही लॉकडाउन से पहले समस्तीपुर में एनआरसी और सीएए के खिलाफ चल रहे सत्याग्रह में शामिल हुए प्रो. शील कुमार राय की फ़ोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बीजेपी की खिल्ली उड़ाई जा रही है.

पिछले चुनाव में मिली थी हार 
बगावत कर रहे बीजेपी नेताओं ने बताया कि बिहार विधानसभा 2015 के चुनाव में समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू की पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कराकर प्रत्याशी बनाया गया था. उस समय भी पैराशूट से बीजेपी के द्वारा प्रत्याशी उतारने का आरोप लगा कर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने बगावत के बोल उठाये थे और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चंदन कुमार को उतारने का ऐलान कर दिया था, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ. लेकिन भाजपा प्रत्याशी रेणु कुशवाहा को राजद प्रत्याशी अख्तरुल इस्लाम शाहीन से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार फिर से वही कहानी दोहराई जा रही है.

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इन नेताओं की उम्मीदों पर फिरा पानी 
बताया गया है कि लंबे समय से बीजेपी के तीन कद्दावर नेता पूर्व जिलाध्यक्ष रामसुमरण सिंह, सरायरंजन के पूर्व प्रत्याशी रंजीत निर्गुणी और मनोज गुप्ता समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. तीनों ही नेता चुनाव को देखते हुए इस विधानसभा में सक्रिय थे. लॉकडाउन हो, बाढ़ जैसी आपदा हो या जलभराव की समस्या. ये तीनों नेता अपने खर्च पर क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने में जुटे थे. वहीं अचानक बीजेपी द्वारा ये विधानसभा सीट जेडीयू को दिए जाने से इन नेताओं की उम्मीद पर पानी फिर गया. 

ये नेता उतरे समर्थन में 
ये आपात बैठक भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामसुमरण सिंह, सरायरंजन विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी रंजीत निर्गुणी, प्रदेश भाजपा में पदधिकारी मनोज गुप्ता के नेतृत्व बुलाई गई थी. इसमें समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र के चार मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध का बिगुल फूंकते हुए निर्दलीय प्रत्याशी खड़ा करने का समर्थन किया है.  

मात्र 1827 वोट से हुई थी जेडीयू प्रत्याशी की हार
जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती पर उनके पुत्र रामनाथ ठाकुर समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से JDU की टिकट पर 2005 में जीत कर बिहार विधानसभा पहुंचे थे. नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बने, लेकिन 2010 के चुनाव में वे महज 1827 वोट से आरजेडी प्रत्याशी अख्तरुल इस्लाम शाहीन से हार गए. हार की वजह शिवसेना के चुनाव चिन्ह तीर धनुष से खड़े प्रत्याशी को मिले 8028 वोट को माना जा रहा था. इसके बाद नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा सांसद बना दिया. उसके बाद 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी से पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा और महागठबंधन की ओर से नीतीश समर्थित राजद प्रत्याशी अख्तरुल इस्लाम शाहीन चुनावी मैदान में उतरे थे. 2015 के आए रिजल्ट में आरजेडी प्रत्याशी अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने बीजेपी प्रत्याशी पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा को 31,080 वोट से शिकस्त दी थी. 2015 के बाद से बीजेपी के नेताओं ने समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र में पंचायत स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए कमर कस ली थी.

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