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बिहार: न रामेश्वर चौरसिया, न ददन पहलवान, NDA के बागियों पर नहीं हुई जनता मेहरबान

बिहार में 2020 का जनादेश चुनाव से पहले पाला बदलने वाले नेताओं के लिए अच्छा संदेश लेकर नहीं आया. अगर बीजेपी और जेडीयू के बागियों की बात करें तो इनमें से ज्यादातर लोग चुनाव हार गए हैं. बता दें कि टिकट न मिलने से नाराज बीजेपी के कई नेता एलजेपी की तरफ से चुनाव लड़े थे.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी (फाइल फोटो-पीटीआई)
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी (फाइल फोटो-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चुनाव नतीजों में बुरे दिन बागियों के
  • NDA का नुकसान करने में सफल रहे
  • खुद चुनाव जीतने में रहे नाकाम

बिहार में 2020 का जनादेश चुनाव से पहले पाला बदलने वाले नेताओं के लिए अच्छा संदेश लेकर नहीं आया. अगर बीजेपी और जेडीयू के बागियों की बात करें तो इनमें से ज्यादातर लोग चुनाव हार गए हैं. बता दें कि टिकट न मिलने से नाराज बीजेपी के कई नेता एलजेपी की तरफ से चुनाव लड़े थे. इन नेताओं ने एनडीए को नुकसान तो जरूर पहुंचाया लेकिन खुद भी न जीत सके. 

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राजेंद्र प्रसाद सिंह: बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले राजेंद्र प्रसाद सिंह चुनाव से पहले एलजेपी में चले गए थे. एलजेपी ने उन्हें दिनारा सीट से उतारा. राजेंद्र प्रसाद सिंह 51313 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे और आरजेडी उम्मीदवार से हार गए. यहां जेडीयू कैंडिडेट तीसरे स्थान पर चला गया. 

रामेश्वर चौरसिया: सासाराम विधानसभा सीट से बीजेपी के बागी रामेश्वर चौरसिया की भी हार हुई है. वे तीसरे नंबर पर रहे. हालांकि बीजेपी में उनकी गिनती बड़े नेताओं में होती थी. लेकिन चुनाव से पहले वे पार्टी छोड़कर एलजेपी में शामिल हो गए थे.

डॉ उषा विद्यार्थी : चुनाव से पहले बीजेपी नेता डॉ उषा विद्यार्थी ने भी पार्टी छोड़ दी थी और एलजेपी में शामिल हो गई थीं. एलजेपी ने पालीगंज से उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे हार गईं, पालीगंज से वे तीसरे नंबर रहीं. इस सीट पर जेडीयू की भी हार हुई.

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इंदु देवी कश्यप: बीजेपी छोड़कर एलजेपी में आईं इंदु देवी कश्यप भी जहानाबाद सीट से चुनाव हार गई हैं. इस सीट से जेडीयू कैंडिडेट की भी हार हुई है.

रविंद्र यादव: चुनाव से पहले बीजेपी के बागियों में पूर्व विधायक रविंद्र यादव का भी नाम शामिल है. रविंद्र यादव एलजेपी में शामिल हुए थे. जिसके बाद पार्टी ने उन्हें झाझा से उम्मीदवार बनाया था. इससे पहले भी बीजेपी के टिकट पर वे झाझा से ही विधायक थे, लेकिन चुनाव में रविंद्र यादव की हार हुई है. झाझा सीट पर वह चौथे स्थान पर रहे.

मृणाल शेखर: बीजेपी छोड़ एलजेपी में आए मृणाल शेखर भी चुनाव हार गए हैं. मृणाल शेखर को एलजेपी ने अमरपुर से टिकट दिया था. वे तीसरे नंबर पर रहे. 

अब एक नजर जेडीयू के बागियों पर...

रवि ज्योति: विधायक रवि ज्योति इस बार कांग्रेस के टिकट पर राजगीर सीट से उतरे थे. उन्हें 51143 वोट भी मिले. लेकिन जेडीयू उम्मीदवार कौशल किशोर को 67191 वोट हासिल हुए और चुनाव में विजयी रहे. 

रामचंद्र साद: टिकट की जुगत में जेडीयू नेता रामचंद्र साद भी एलजेपी के टिकट पर अलौली सीट से चुनाव लड़े. इस सीट पर उनकी हार हुई और वे तीसरे नंबर पर रहे.

ललन भुइयां: जेडीयू से बगावत कर कुटुंबा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने उतरे ललन भुइयां चुनाव हार गए. कुटुंबा सीट पर वह तीसरे स्थान पर रहे.

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शैलेन्द्र प्रताप सिंह: जेडीयू से बगावत कर तरैया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने उतरे शैलेन्द्र प्रताप सिंह चुनाव हार गए हैं. इस सीट पर वह चौथे नंबर पर रहे.

मंजीत सिंह: जेडीयू के पूर्व विधायक मंजीत सिंह ने भी चुनाव से पहले पार्टी से बगावत कर दी, वे बीजेपी के कोटे में आई बैकुंठपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतर गए, इस सीट पर उन्हें अच्छे-खासे 43354 वोट भी मिले, लेकिन वे चुनाव हार गए, हालांकि उनकी बगावत का नतीजा बीजेपी को भुगतना पड़ा, इस सीट से बीजेपी कैंडिडेट की हार हुई. जबकि आरजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की.

भगवान सिंह कुशवाहा: जेडीयू से टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने जेडीयू से इस्तीफा देकर एलजेपी का दामन थाम लिया था. वे जगदीशपुर सीट से जेडीयू के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन इस चुनाव में उनकी हार हुई है. हालांकि वोट कटने की वजह से यहां जेडीयू कैंडिडेट की भी बुरी तरह से हार हुई. यहां भगवान सिंह कुशवाहा दूसरे नंबर पर रहे, जबकि जेडीयू उम्मीदवार तीसरे नंबर पर थीं. यहां से आरजेडी कैंडिडेट ने जीत हासिल की. 

ददन पहलवान: इस चुनाव में ददन पहलवान को भी हार का सामना करना पड़ा है. ददन पहलवान जेडीयू में थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया, इसके बाद वे डुमरांव सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े. इस चुनाव में उनकी बुरी हार हुई और उन्हें मात्र 9166 वोट मिले. 

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बता दें कि बीजेपी और जेडीयू के बागियों को सबसे ज्यादा ठौर एलजेपी ने दी थी. लेकिन इन सभी उम्मीदवारों को चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा.

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