बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के प्रथम चरण के मतदान की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ऐसे में नक्सल प्रभावित क्षेत्र औरंगाबाद में शांतिपूर्ण चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती है. जिला प्रशासन द्वारा इस बार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 11 हेलीपैड बनाने की योजना है, जिससे जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर की लैंडिग कराई जा सकेगी.
बिहार के औरंगाबाद में 28 अक्टूबर को चुनाव है. औरंगाबाद नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है. यहां नक्सलियों की गतिविधियों से मतदान भी प्रभावित होता है. इन नक्सल गतिविधियों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है.
नक्सली चुनाव प्रभावित कर सकते हैं
औरंगाबाद में बने दो हजार 537 मतदान केंद्रों में से प्रशासन ने 601 केंद्र चिन्हित किए हैं, जहां नक्सली चुनाव प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए इन मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल की तैनाती रहेगी. जिला प्रशासन द्वारा पैरामिलिट्री फोर्स की 20 कंपनियों की मांग की गई है. इसके साथ ही नक्सल प्रभावित एरिया में हेलीपैड बनाने की तैयारी की जा रही है.
प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना
एसपी सुधीर पोरिका ने बताया कि जिले में 601 मतदान केंद्र नक्सल प्रभावित हैं. चिन्हित किए गए सभी नक्सल प्रभावित मतदान केंद्र पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती रहेगी. हर बूथ के भवन की छत पर मोर्चा बनाकर सुरक्षाबलों की तैनाती की जाएगी. चुनाव के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्र में 11 हेलीपैड बनाए जा रहे हैं, जहां जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर की लैंडिग कराई जा सकेगी.