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वैसे तो बिहार में 243 विधानसभा सीट है लेकिन कुछ ऐसी सीट है जो सुर्खियों में बनी रहती है. इसी में से एक सीवान सदर विधानसभा की सीट है. वैसे तो इस सीट पर बीते 15 साल से बीजेपी के व्यासदेव प्रसाद ने कब्जा जमाया है लेकिन इस बार सीवान सदर विधानसभा से व्यासदेव प्रसाद को टिकट मिलने पर संशय है.
व्यासदेव प्रसाद के खिलाफ माहौल
दरअसल, 15 साल से विधायक रहे बीजेपी के विधायक व्यासदेव प्रसाद के खिलाफ विधानसभा क्षेत्र में माहौल है. विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने की वजह से विधायक को अलग—अलग जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में इस बात की आशंका है कि बीजेपी एक बार फिर उन पर भरोसा दिखाए. वहीं, सेहत और ढलती उम्र भी बड़ा फैक्टर है, जिस वजह से व्यासदेव प्रसाद को टिकट मिलने की गुंजाइश कम है. इस बार सीवान सदर विधानसभा से बीजेपी के बबलू कुमार साह प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं.
कौन है बबलू कुमार साह
सीवान सदर में बीजेपी के युवा नेता बबलू कुमार साह 2017 से नगर परिषद के उपसभापति हैं. बबलू कुमार साह की बीजेपी में प्रखर हिंदुत्वादी चेहरे के तौर पर पहचान है. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य रहे हैं. बबलू कुमार साह साल 2005 से 2009 तक बजरंग दल के जिला संयोजक की भूमिका में थे. इसके बाद उन्हें विश्व हिंदू परिषद में दायित्व मिला.
साह के लिए फैक्टर
बबलू कुमार साह के साथ सबसे बड़ा फैक्टर स्थानीय स्तर पर बीजेपी के सीनियर नेताओं का समर्थन है. वहीं बबलू साह की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी पैठ है. पिछड़े समाज से आने की वजह से जातिय आधार पर भी बीजेपी के लिए बबलू साह सटीक उम्मीदवार साबित हो सकते हैं. इसके अलावा सीवान सदर में वैश्य समाज का रुख भी बीजेपी की ओर रहा है. यह फैक्टर बबलू साह के लिए काफी मददगार हो सकता है. आपको बता दें कि सीवान सदर में वैश्य समाज का वोटबैंक काफी अहम रोल निभाता रहा है.
और भी उम्मीदवार लिस्ट में
बबलू साह के अलावा सुधीर जायसवाल, सुभाष चौहान, प्रमील कुमार गोप और देवेन्द्र गुप्ता प्रबल दावेदार रहे हैं. वहीं, वर्तमान विधायक व्यासदेव प्रसाद के बेटे मुकेश कुमार बंटी भी बीजेपी की ओर से दावेदारी कर रहे हैं. इसके साथ ही बीजेपी के युवा नेता राहुल तिवारी भी चुनाव मैदान में उतरने को बेताब हैं. राहुल तिवारी के दादा जर्नादन तिवारी जनसंघ के कद्दावर नेता थे और सीवान से सांसद भी रह चुके हैं. नगर परिषद की चेयरमैन रह चुकीं अनुराधा गुप्ता भी बीजेपी की ओर से दावा कर रही हैं. अनुराधा गुप्ता वर्तमान में बीजेपी की जिला उपाध्यक्ष हैं. वह साल 2010 में जेडीयू में थीं और एकबार इन्होंने कांग्रेस पार्टी से टिकट हासिल करने का भी प्रयास किया था. आपको बता दें कि अनुराधा गुप्ता पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं और वह जमानत पर हैं.
सीवान सीट किसके खाते में?
स्थानीय पत्रकार सुधीर कुमार कहते हैं कि सीवान सदर सीट बीजेपी के ही खाते में रहने की संभावना है. सुधीर कुमार के मुताबिक बीजेपी शहरी क्षेत्र के सीट को छोड़ना नहीं चाहती है. एक तथ्य ये भी है कि जब 2015 में जेडीयू से अलग होकर बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी थी तब भी सीवान सदर की सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी. ऐसे में अब जेडीयू के साथ आने के बाद भी ये सीट बीजेपी अपने पास रखना चाहेगी.
राजद की ओर से कौन?
अगर राजद की बात करें तो सीवान सदर से अवध बिहारी चौधरी सबसे प्रबल दावेदार हैं. आपको बता दें कि पूर्व मंत्री अवध बिहारी चौधरी लगातार पांच बार विधायक रहे हैं. जिले में लालू यादव के यादव—मुस्लिम समीकरण को करीब दो दशक तक बनाए रखने का श्रेय भी पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन और अवध बिहारी चौधरी को ही जाता है. फिलहाल, अवध बिहारी चौधरी सीवान राजद के सबसे अनुभवी नेता हैं. अवध बिहारी चौधरी के अलावा अन्य कोई उम्मीदवार मजबूत दावेदार के तौर पर नहीं दिख रहा. बता दें कि 2015 विधानसभा चुनाव में राजद और जेडीयू का गठबंधन था. ऐसे में सीवान सदर सीट जेडीयू के खाते में गई थी. वहीं, अवध बिहारी चौधरी निर्दलीय मैदान में उतरे थे. हालांकि, व्यासदेव प्रसाद को जीत मिली थी.
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