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चिराग पासवान बोले- नीतीश की संकीर्ण सोच, हरियाणा-पंजाब में उद्योग लग सकते हैं तो बिहार में क्यों नहीं

चिराग ने आगे कहा कि मौजूदा सीएम के नेतृत्‍व में बिहार का विकास संभव है ही नहीं. यदि नली-गली और चापाकल पर गर्व करना विकास है तो नीतीश जी को दिल्‍ली-मुम्‍बई की ओर देखना चाहिए. लेकिन उन्‍हें विकास की नहीं बल्कि जात-पात की राजनीति करनी आती है. जिसकी बदौलत वह कुर्सी पर बैठे हैं.

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चिराग पासवान.
चिराग पासवान.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चिराग बोले - विकास को लेकर नीतीश कुमार की संकीर्ण सोच.
  • हरियाणा और पंजाब में उद्योग लग सकते हैं तो बिहार में क्यों नहीं.
  • हमारी पार्टी पर सवर्णों को टिकट देने का आरोप लगा जो गलत है.

मोदी से कोई बैर नहीं, नीतीश की अब खैर नहीं. ये नारा देने वाले जदयू प्रमुख चिराग पासवान इन दिनों मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, उनकी सरकार और उनके निर्णयों के खिलाफ हल्‍ला बोल फार्मूले पर काम कर रहे हैं. इसी बीच एक लोकल मीडिया हाउस को दिए अपने इंटरव्‍यू में उन्‍होंने सीधे तौर पर कहा कि बिहार में उद्योग न लगाने के पीछे सीएम नीतीश कुमार ने जो तर्क दिया है, वह उनकी संकीर्ण सोच को साफ दर्शाता है. नीतीश जी कहते हैं कि बिहार में उद्योग इसलिए नहीं लग सकते क्योंकि यहां का भूगोल ऐसा नहीं है. यदि सागर किनारे के राज्‍य ही उद्योग लगाने का आधार हैं तो पंजाब और हरियाणा में उद्योग कहां से आ रहे हैं. 

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सोशल इंजीनियरिंग भी जातिवाद 

चिराग ने आगे कहा कि मौजूदा सीएम के नेतृत्‍व में बिहार का विकास संभव है ही नहीं. यदि नली-गली और चापाकल पर गर्व करना विकास है तो नीतीश जी को दिल्‍ली-मुम्‍बई की ओर देखना चाहिए. लेकिन उन्‍हें विकास की नहीं बल्कि जात-पात की राजनीति करनी आती है. जिसकी बदौलत वह कुर्सी पर बैठे हैं. जिसे वह सोशल इंजीनियरिंग करते हैं, वह भी जाति की राजनीति है. आपको बिहार की 12 करोड़ जनता की बेहतरी करना था लेकिन आपने दलित को अतिदलित और पिछड़ों और अतिपिछड़ों में बांट दिया.  

हमारे लिए गरीबी ही एक मात्र जाति 

एक इंटरव्‍यू में चिराग ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जदयू के लिए टिकट बंटवारे में जातीय आधार कभी नहीं रहा. पिताजी (स्‍व. राम विलास पासवान) कहते थे कि बेटा इस देश में सिर्फ एक जाति है और वो है गरीबी. हमेशा समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्‍यक्ति के बारे में सोचना. ये पिताजी की सोच ही थी कि हमारी पार्टी पर सवर्णों को टिकट देने का आरोप लगा जबकि पिताजी हमेशा गरीबों की लड़ाई लड़ने वालों को अपने साथ रखते थे. चाहे वो किसी भी जाति धर्म का क्‍यों न हो.

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