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दरौंधा विधानसभा सीटः बीजेपी से व्यास सिंह मैदान में, क्या दोहरा पाएंगे जीत?

2015 में इस सीट से विधायक बनने वाली कविता सिंह ने 2019 के लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की ओर से चुनाव लड़ा और बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शेहाब को भारी मतों से हराकर जीत हासिल की थी.

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Daraundha assembly election 2020, MLA Karnjeet Singh Alias
Daraundha assembly election 2020, MLA Karnjeet Singh Alias
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2015 कविता सिंह ने जीता विधानसभा चुनाव
  • 2019 में सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव
  • बीजेपी के बागी नेता व्यास सिंह ने कविता सिंह के पति को हराया

बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तीन चरणों में हुए चुनावों में इस बार कुल 59.94 फीसदी वोटिंग हुई है. अब 10 नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की दरौंधा विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 50.98% मतदान हुआ. बिहार के सीवान लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले दरौंदा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. महज 12 वर्ष पहले अस्तित्व में आए इस विधानसभा सीट की चुनावी चर्चा दिल्ली तक सुनाई देती रही है. इस सीट पर अभी तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए और दोनों ही बार नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड (JDU) का कब्जा रहा. हालांकि, 2015 में जीत हासिल करने वाली कविता सिंह के 2019 में सीवान लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद यहां उपचुनाव हुए और इस उपचुनाव में भी जबरदस्त रोमांच रहा. 

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सामाजिक ताना-बाना
दारौंदा विधानसभा क्षेत्र बिहार के सीवान जिले में स्थित है और सिवान लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यहां की 100 फीसदी आबादी ग्रामिण है. वहीं, कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी का हिस्सा 11.78 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात 3.22 फीसदी है. इस सीट पर 2015 के विधानसभा चुनावों में 52.49% वोटिंग हुई थी. वहीं 2019 के लोकसभा चुनावों में वोटिंग परसेंटेज 51.8 फीसद रहा था.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
2008 में भारत के परिसीमन आयोग के आदेशों के लागू होने के बाद दारौंदा अस्तित्व में आया. इस सीट पर 2010 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए और जद (यू) की जगमातो देवी को दारौंदा के पहले विधायक होने का सम्मान मिला. उन्होंने 49,115 वोट पाकर जीत हासिल की और राजद के बिनोद कुमार सिंह को 31,135 मतों के अंतर से हराया. दारौंदा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,67,066 वोटर हैं, जिसमें 1,40,923 पुरुष और 1,26,138 महिलाएं शामिल हैं.

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2010 के विधानसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुए और जेडीयू उम्मीदवार जगमातो देवी ने आरजेडी के विनोद कुमार सिंह को 31 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से मात दी. इसी के साथ जगमातो देवी इस सीट से पहली विधायक चुनी गईं. हालांकि, उनके निधन के बाद बहू कविता सिंह ने उनकी राजनीतिक विरासत को संभाला और 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार जीतेंद्र स्वामी को 13 हजार वोटों से हरा दिया.

इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की ओर से कविता सिंह को उम्मीदवार बनाया गया और उन्होंने बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शेहाब को भारी मतों से हराकर जीत हासिल की.

2015 का जनादेश
2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से पूर्व विधायक जगमातो देवी की बहू और दबंग कहलाने वाले अजय सिंह की पत्नी कविता सिंह ने जेडीयू की तरफ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी. ये वो समय था जब जेडीयू-आरजेडी एक थे और बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे थे. 2015 में जेडी (यू) की कविता सिंह को 43.67 फीसदी वोट मिले थे, वहीं, भाजपा को 34.95 फीसदी वोट मिले थे. 2015 में विधायक का चुनाव जीतने वाली कविता सिंह ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 16.42 फीसदी वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. 

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दूसरे चरण में 3 नवंबर 2020 को इस सीट पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

इस बार के मुख्य उम्मीदवार

  • बीजेपी - करणजीत उर्फ व्यास सिंह
  • लेफ्ट - अमरनाथ यादव
     

दरौंदा विधानसभा उपचुनाव
कविता सिंह के सांसद बनने के बाद ये विधानसभा सीट खाली हो गई. इसके बाद इस पर उपचुनाव हुए. इस उपचुनाव में एनडीए गठबंधन की ओर से कविता सिंह के पति और इलाके के दबंग कहे जाने वाले जेडीयू के अजय सिंह मैदान में थे. वहीं आरजेडी ने उमेश सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था. लेकिन इन दोनों को चारो खाने चित करते हुए बीजेपी के बागी नेता करणजीत उर्फ व्यास सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की. व्यास सिंह ने उपचुनाव से कुछ दिन पहले ही बीजेपी से दूरी बना ली थी.

दरअसल, चुनाव से पहले दरौंदा सीट जदयू के खाते में गई थी और जदयू ने कविता सिंह के पति अजय सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था. इधर, बीजेपी ने गठबंधन में होने के कारण व्यास सिंह को अजय सिंह का समर्थन करने कहा लेकिन व्यास सिंह ने पार्टी की एक न सुनी और बगावती तेवर अपना लिए. बीजेपी के लाख कहने के बावजूद व्यास सिंह ने पार्टी के खिलाफ जाकर निर्दलीय चुनाव लड़ा.

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इस दौरान पार्टी ने उन्हें सदस्यता खत्म करने की धमकी भी दी लेकिन वो अपनी जीद पर अड़े रहे. अंत में उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इसके बाद व्यास सिंह और मुखर हो गए और बीजेपी व जेडीयू के खिलाफ जबरदस्त हवा बना डाली. परिणाम ये हुआ कि उपचुनाव में व्यास सिंह को जीत हासिल हुई. हालांकि, इस जीत के बाद उन्हें दोबारा बीजेपी में शामिल कर लिया गया. हालांकि, इस बार भी अजय सिंह और व्यास सिंह के रिश्तों के बीच की खाई बीजेपी और जेडीयू के लिए परेशानी का सबब बन सकती है.

मौजूदा विधायक का रिपोर्ट कार्ड
कर्णजीत सिंह उर्फ ​​व्यास सिंह इस विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने दरौंदा विधानसभा की पूर्व विधायक कविता सिंह के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद हुए उपचुनाव में हिस्सा लिया और तमाम विरोध के बावजूद जीत हासिल की. व्यास सिंह जमीन पर काफी एक्टिव रहते हैं और सोशल मीडिया पर भी उनकी मौजदूगी बनी रहती है. इन दिनों वो लगातार विकास कार्यों का शिलान्यास करते दिख जाते हैं. 

 

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