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कृषि बिल बिहार में क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा? सुशील मोदी ने बताया

बिहार के किसानों को पिछले 15 साल से छूट मिली हुई है कि वो अपना अनाज कहीं भी बेच सकते है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में जो लोग इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाना चाहते हैं उन्हें करारा झटका मिलेगा

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बिहार के किसानों के लिए मुद्दा नहीं है कृषि बिल (फोटो- पीटीआई)
बिहार के किसानों के लिए मुद्दा नहीं है कृषि बिल (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि बिल का विरोध कर रहे सभी विपक्षी दल
  • पंजाब-यूपी के किसान सड़कों पर कर रहे प्रदर्शन
  • बिहार में किसानों को क्यों नहीं पड़ रहा फर्क?

कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल रोज सदन के अंदर हंगामा कर रहे हैं. किसान सड़क पर हैं और 25 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन के मूड में हैं. हालांकि ज्यादातर प्रदर्शन पंजाब, हरियाण और यूपी के किसान कर रहे हैं. बिहार के किसानों पर नए कृषि बिल का कोई खास असर नहीं दिख रहा है. क्योंकि अध्यादेश में किसानों द्वारा मंडियों में अनाज बेचने की बाध्यता खत्म की गई है. बिहार में यह बाध्यता पहले ही खत्म कर दी गई थी. नीतीश कुमार ने साल 2005 में सरकार में आते ही बिहार की सभी बाजार समितियों को भंग करने का आदेश दिया था. सरकार के मुताबिक इन बाजार समितियों में किसानों का शोषण होता था.

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बिहार के किसानों को पिछले 15 साल से छूट मिली हुई है कि वो अपना अनाज कहीं भी बेच सकते है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में जो लोग इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाना चाहते हैं उन्हें करारा झटका मिलेगा. क्योंकि ये चुनावी मुद्दा है ही नही. बल्कि यह किसानों के हक की बात है. हालांकि सच्चाई यही है कि बिहार में MSP का लाभ केवल 10% किसानों को ही मिलता है. 

बिहार में पैक्स (सहकारी समिति) के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रोक्योरमेंट किया जाता है. लेकिन सभी किसानों से सरकार खरीदारी नहीं कर पाती है. इसलिए किसान बिचौलियों को अपना आनाज कम दामों में बेचने पर मजबूर हैं. सरकार ने इनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की है. सरकार ने किसानों को भी ये छूट दी है कि उन्हें देश मे जहां भी अच्छे दाम मिलें वो अनाज बेच सकते हैं.  

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सोनपुर के किसान मिथिलेश सिंह का कहना है कि किसानों को कैसे पता चलेगा कि कहां का रेट क्या है? बिहार के किसानों को इस अध्यादेश से ना तो बहुत लाभ होगा और ना ही नुकसान होगा. जो लोग कॉन्ट्रैक्ट लेकर लार्ज स्केल पर खेती करते हैं उन्हें जरूर इसका लाभ मिलेगा. इसलिए इस मामले को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जा सकता है. अलबत्ता एनडीए राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश के साथ हुए दुर्व्यवहार को जरूर मुद्दा बनाएगी. 

सुशील मोदी ने कहा कि हरिवंशजी के साथ विपक्ष ने जो दुर्व्यवहार किया वो बिहार का अपमान है. हरिवंशजी जैसे शिष्ट व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार करने के बावजूद आरजेडी ने खेद तक प्रकट नहीं किया.


 

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