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गोपालगंज, ये जिला बिहार की राजनीति के लिए काफी हॉट टॉपिक रहता है. दरअसल, ये पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी का गृह जिला है तो वहीं गन्ने की खेती के लिए भी चर्चा में रहा है. वैसे तो इस जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प लड़ाई गोपालगंज सदर की सीट पर होने की उम्मीद है. ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि गोपालगंज सदर सीट से लालू यादव के साले अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. बिहार की सियासत में लंबे समय तक लालू परिवार के साथ रहे साधु यादव अब बसपा के साथ खड़े हैं. इस बार उन्होंने मायावती की पार्टी बसपा से नामांकन किया है. बता दें कि बसपा, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और ओवैसी की AIMIM गठबंधन चुनाव लड़ रही है. इस गठबंधन को ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट नाम दिया गया है.
साधु यादव की टक्कर सुभाष सिंह से!
साधु यादव का कहना है कि गोपालगंज विधानसभा सीट पर उनकी लड़ाई बीजेपी उम्मीदवार सुभाष सिंह है. दरअसल, गोपालगंज विधानसभा पर करीब 15 साल से सुभाष सिंह का दबदबा है. यही वजह है कि एक बार फिर बीजेपी ने सुभाष सिंह पर भरोसा दिखाया है. अगर महागठबंधन की बात करें तो इस सीट पर कांग्रेस ने आसिफ गफूर को मैदान में उतारा है. हालांकि, पहले चर्चा थी कि ये सीट राजद के खाते में जाएगी और महंत सत्यदेव दास को टिकट मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
एक और दावेदार बनेगा मुसीबत
इस सीट से राजू कुमार यादव भी टिकट की दावेदारी ठोक रहे थे लेकिन अब वह बागी रुख अख्तियार करते हुए चुनाव मैदान में उतरे हैं. राजू कुमार यादव करीब 17 साल से राजद में थे. राजू यादव के चुनाव लड़ने से महागठबंधन उम्मीदवार की मुसीबत बढ़ने की आशंका है. आपको यहां बता दें कि राजू 2016 में जिला परिषद का चुनाव भी लड़ चुके हैं. वह थावे प्रखंड अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
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2015 विधानसभा चुनाव के नतीजे
गोपालगंज विधानसभा सीट पर 2015 में बीजेपी के सुभाष सिंह ने जीत हासिल की थी. तब सुभाष सिंह को 78491 वोट हासिल हुए थे. वहीं दूसरे नंबर पर रहे आरजेडी के रेयाजुल हक को 73417 वोट मिले थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में गोपालगंज में 298694 मतदाता थे. वहीं कुल 172533 लोगों ने मतदान किया था. 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां 57.79% मतदान हुआ था. 2015 में बीजेपी को 45.49% और आरजेडी को 42.55% वोट मिले थे.