एक तरफ दुनिया भर के साइंटिस्ट कोरोना वायरस की प्रभावी वैक्सीन को विकसित करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं. दवा कंपनियों में इस बात की होड़ मची हुई है कि कौन सबसे पहले और सबसे इफेक्टिव मेडिसीन बाजार में ला सकता है.
लेकिन बिहार के जमुई विधानसभा के मतदाता बड़े कॉन्फिडेंस के साथ बोलते हैं कि उन्हें कोरोना का इलाज पता है. कहते हैं कि, 'अगर उ रहता तो कोरोना एतना फइलबे नहीं करता.' जानिए कि कौन सी दवा से कोरोना के इलाज का दावा कर रहे हैं जमुई विधानसभा के लोग.
नीतीश रोक लगाकर सही नहीं किए: वोटर
जमुई विधानसभा में मतदाताओं का रूझान जानने के लिए हमारे सहयोगी 'बिहार तक' की टीम वहां पहुंची थी. यहां चाय की एक थड़ी पर जब लोगों से 15 साल आरजेडी बनाम 15 साल नीतीश के बारे में पूछा गया तो स्थानीय लोगों के विचार अलग-अलग थे. कुछ लोग नीतीश के पक्ष में थे लेकिन वो शराबबंदी के निर्णय को कोस रहे थे.
उन्होंने कहा कि शराब रहता तो कोरोना एतना फइलबे नहीं करता. सबसे ज्यादा नाराज दिखे स्थानीय मतदाता अजीत बरनवाल. अजीत ने कैमरे के सामने कहा कि दारु तो एक दवाई है. उ रहेगा तो कोरोना पकड़बे नहीं करेगा. नीतीश बहुत अच्छा काम किए हैं लेकिन शराब बंद करके सही नहीं किए मेरे लिए.'
शराबबंदी का ठीक से पालन नहीं
यहीं के मतदाता उमेश यादव नीतीश और लालू को बराबर मानते हैं लेकिन साफ कहते हैं कि हम तो आरजेडी को वोट देंगे. लालू ही हरिजनों को बोलने का अधिकार दिये. वो शराबबंदी के पक्ष में हैं लेकिन कहते हैं कि शराबबंदी का ठीक से पालन नहीं हो रहा. अब होम डिलीवरी हो रही है. 40 रुपया में मिलने वाला शराब अब 100 रुपया में चोरी छिपे मिल रहा है.
'अच्छा हुआ, नंगा नाच तो बंद हुआ'
जब अजीत शराब को कोरोना की दवाई बता रहे थे तो वहीं मौजूद एक बुजुर्ग मतदाता ने उनकी बात को काटा. वो बोले शराब बंद हुआ तो अच्छा हुआ. नहीं तो पहले सड़क पर नंगा नाच होता था. नीतीश इ काम बहुते अच्छा किए हैं. हमारा वोट तो उन्हीं को जाएगा. यहां कुछ और लोगों ने लॉकडाउन में जनधन योजना के खाते में मिले 500 रुपये के लिए नीतीश की तारीफ की.
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