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लखीसराय जिला: बीजेपी के सामने दबदबा बनाए रखने की चुनौती

जिले के प्रमुख मंदिरों में अशोकधाम, भगवती स्थान बड़ैहया, श्रृंगऋषि, जलप्पा स्थान, अभयनाथ स्थान, माँ दुर्गा मंदिर तेतरहाट, महसौरा का दुर्गा मंदिर आदि प्रमुख हैं. अशोकधाम में सावन के महीने में काफी बड़ा मेला लगता है.

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bihar assembly election 2020
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • 3 जुलाई 1994 में लखीसराय अलग जिला बना था
  • जिले में कई मंदिर, दुर्गा पूजा है प्रसिद्ध
  • जिले में साक्षरता दर 62 फीसदी से ज्यादा है

बिहार का लखीसराय जिला नया है. दो विधानसभा सीटों वाले इस जिले में कई मंदिर हैं. खेती पर निर्भर इस जिले के जगदीशपुर गांव की दुर्गा पूजा देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. 

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बिहार का लखीसराय जिला मुंगेर से अलग कर 3 जुलाई 1994 को बनाया गया था. यह जिला अपने मंदिरों के लिए भी काफी प्रसिद्ध है. जिले के प्रमुख मंदिरों में अशोकधाम, भगवती स्थान बड़ैहया, श्रृंगऋषि, जलप्पा स्थान, अभयनाथ स्थान, माँ दुर्गा मंदिर तेतरहाट, महसौरा का दुर्गा मंदिर आदि प्रमुख हैं. अशोकधाम में सावन के महीने में काफी बड़ा मेला लगता है. यहां मुंडन संस्कार काफी लोग कराते हैं. दो विधानसभा सीटों वाले इस जिले में बीजेपी और आरजेडी के बीच ही मुख्य लड़ाई रहती है. 

सामाजिक तानाबाना
1228 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले की जनसंख्या 10 लाख है. यहां साक्षरता दर 62.42 फीसदी है. जिले में 95 फीसदी से ज्यादा आबादी हिंदू है. यहां मंदिरों की संख्या काफी ज्यादा है. हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं के लिए यह इलाका जाना जाता है. यहां की 72.62 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 27.38 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात कुल जनसंख्या में से क्रमशः 15.81 और 0.11 है.

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2015 का जनादेश
लखीसराय विधानसभा सीट की बात करें तो 2015 के चुनाव में यहां से बीजेपी के विनय कुमार सिन्हा को कुल 75901 वोट मिले थे. 69345 वोट के साथ दूसरे नंबर पर जेडीयू के रामानंद रहे थे. वहीं सूर्यगढ़ सीट की बात करें तो यहां से आरजेडी के प्रह्लाद यादव 82490 वोटों के साथ विजेता बने थे. बीजेपी प्रत्याशी प्रेम 52460 वोट ही पा सके थे.


 

 

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