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चिराग बोले- लोग कह रहे मैं PM को मक्खन लगाने की पराकाष्ठा पार कर रहा, उनका दिया सम्मान कैसे भूलूं

बिहार चुनाव में एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने के फैसले पर आजतक के साथ खास बातचीत में एलजेपी के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, 'पापा ने कहा था कि तुम डर क्यों रहे हो अकेले जाने से. 2005 में देखो. मुझे कोई डर नहीं था और अकेले गया. तुम क्यों डर रहे हो.

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एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि फैसले से पापा खुश होंगे (फाइल-पीटीआई)
एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि फैसले से पापा खुश होंगे (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'पापा ने कहा था कि तुम डर क्यों रहे हो अकेले जाने से'
  • 'पापा मुझ पर खुश होंगे कि उनके बेटे ने फैसला ले लिया'
  • 'वोटकटवा कहना उचित नहीं, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सही नहीं'
  • प्रधानमंत्री भी किसी धर्मसंकट में न फंसेः चिराग पासवान

बिहार विधानसभा चुनाव के शोर के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार तारीफ पर कहा कि लोग कहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री की तारीफ कर मक्खन लगाने की पराकाष्ठा पार कर रहा हूं, लेकिन क्या कर सकता हूं, जब पापा बीमार थे कोई हमारे साथ नहीं था तो प्रधानमंत्री मेरे साथ खड़े थे. दिन में कम से कम 2 बार फोन आता था. जो सम्मान प्रधानमंत्री ने हमें दिया वो कैसे मैं भूल जाऊं.

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बिहार चुनाव में एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने के फैसले पर आजतक के साथ खास बातचीत में एलजेपी के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, 'पापा ने कहा था कि तुम डर क्यों रहे हो अकेले जाने से. 2005 में देखो. मुझे कोई डर नहीं था और अकेले गया. तुम क्यों डर रहे हो. तुम अभी जवान हो. तुम क्यों बार-बार बैठकें कर रहे हो. फैसले से पहले हम लगातार संसदीय बोर्ड और कई तरह की बैठकें कर रहे थे.'

चिराग ने आजतक को दिए खास इंटरव्यू में बताया लगातार बैठकें करने पर पापा ने मुझसे कहा था कि अकेले निकलो और अकेले चलने से डरो नहीं. अगर तुम्हारी राह सही है? खास बात यह है कि तुम्हें इस पर विश्वास होना चाहिए. कल को यह नहीं होना चाहिए कि अपने निर्णय पर तुम पछताओ कि तुमने उस वक्त वो वक्त था कि निर्णय लेने का था और निर्णय नहीं लिया. तुम्हें लगता है कि निर्णय लेना चाहिए तो तुम्हें जरूर निर्णय लेना चाहिए.

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मां ने कहा कि पापा के पास जाओः चिराग

उन्होंने आजतक से कहा, 'मुझे याद है कि यही वो समय था जब पापा वेंटिलेटर पर थे और मुझे फैसला लेना था और समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. उस दिन पापा से बात नहीं हो पा रही थी. समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं, किसके पास जाऊं, पापा को बता नहीं सकता था वो बेहोश थे. मां ने कहा कि पापा के पास जाओ उनसे बताओ वो बेहोश हैं लेकिन सुनेंगे और समझेंगे.'

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चिराग ने अलग होने के फैसले पर कहा, 'उस रात मुझे याद है कि घंटों तक पापा का हाथ पकड़कर उनके बेड के पास बैठा रहा और सारी बातें बताता रहा. मुझे लगता है कि वो मेरे साथ हैं. वो खुश होंगे. मुझे लगता है कि उन्हें गर्व होगा. मुझ पर खुश होंगे कि उनके बेटे ने फैसला लिया. उसने वही फैसला लिया जो उन्होंने 2005 में लिया था. अब उम्मीद है कि उनके आशीर्वाद से फैसला सही होगा.'

हमें डर नहींः चिराग

गठबंधन के बिना जाने के फैसले पर कहा, 'हमें डर नहीं है. एक फीसदी का डर नहीं हैं. हालांकि उनकी कमी जरूर खलती है. उनसे घंटों बैठकर बात करता था. जब से मैं राजनीति में आया. लंबे समय मेरी उनसे बातचीत मम्मी के जरिए ही होती थी. मुझे उनसे कुछ कहना होता था कि मम्मी के जरिए कहता था. अभी भी जब भी अकेला होता हूं कि उनकी तस्वीरों के पास जाकर उन्हें निहारता हूं और बैठता हूं मुझे उम्मीद है कि वो हमेशा मेरे साथ हैं.'

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बीजेपी की ओर से एलजेपी को वोटकटवा पार्टी कहे जाने पर चिराग ने कहा, 'मुझे इस बात का दुख है लेकिन नाराजगी नहीं है. नाराजगी इसलिए नहीं है क्योंकि मुझे पता है कि आवाज भले ही उन नेताओं की है लेकिन वो शब्दावली कहां से आ रही है. वो सोच कहां से आ रही है. मुख्यमंत्री और जो उनकी कार्यशैली को जानता है वो जानता है कि वो खुद कभी कुछ नहीं कहते. वो दूसरों से बोलवाते हैं.'

चिराग ने कहा, 'जो भी नेता इस तरह की तमाम बातें कह रहे हैं. वही अभी 10 दिन पहले तक मेरे पिताजी के निधन पर ढेर सारी बातें कह रहे थे और अब वे उन्हीं की बनाई पार्टी को वोटकटवा कह रहे हैं. मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे दिलासा दे रहे थे, लेकिन मुझे इस बात से दुख हो रहा है कि वो जहां कहीं भी होंगे उन्हें दुख हो रहा होगा. अगर हम वोटकटवा पार्टी थे तो पिछले 2014 से क्यों साथ थे. क्यों साथ-साथ हमें रखा. हम लोग साथ में मंच पर रहे.

'प्रधानमंत्री करते थे दिन में 2 बार फोन'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार तारीफ किए जाने को लेकर चिराग ने सफाई देते हुए कहा, 'लोग कहते हैं कि मैं प्रधानमंत्री की तारीफ कर मक्खन लगाने की पराकाष्ठा पार कर रहा हूं, लेकिन क्या कर सकता हूं, जब पापा बीमार थे कोई हमारे साथ नहीं था तो प्रधानमंत्री मेरे साथ खड़े थे. जब आईसीयू के बाहर खड़ा होकर मैं रोता था तो प्रधानमंत्री ने मुझे साहस दिया. दिन में कम से कम 2 बार फोन आता था. जो सम्मान प्रधानमंत्री ने हमें दिया वो कैसे मैं भूल जाऊं.'

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उन्होंने कहा, 'मेरी वजह से कोई भी अपने धर्मसंकट में न पड़े. आप जो चाहें कहिए. मुझे पता है कि हर गठबंधन का अपना धर्म होता है. वो कुछ भी कह सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भी किसी तरह के धर्मसंकट में न पड़े और अपने गठबंधन के धर्म का पालन करें. लेकिन वोटकटवा कहना उचित नहीं है और अब जब पापा नहीं हैं तो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है. 

किंगमेकर बनने की भूमिका नहीं मिलने पर चिराग ने कहा कि पापा बोलते थे कि शेर का बच्चा है तो जंगल चीरकर निकलेगा और गीदड़ होगा तो मारा जाएगा, मैं भी खुद को परखने निकला हूं.

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