लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. राजनीति में रामविलास पासवान ने 70 के दशक में कदम रखा था और फिर सियासत की बुलंदी साल दर साल चढ़ते गए. पासवान ने बिहार के हाजीपुर संसदीय सीट को अपनी कर्मभूमि बनाया, जिसके बाद वहां पर धरती गूंजे आसमान, हाजीपुर में रामविलास पासवान के नारे आम थे. हाजीपुर से उन्होंने ऐसी जीत दर्ज की जो विश्व रिकार्ड बन गई.
रामविलास पासवान 43 साल के अपने राजनीतिक सफर में कई उतार चढ़ाव भरे पड़ाव देखे. हाजीपुर में कई रिकॉर्ड पासवान के नाम हैं. यहां से सबसे अधिक मतों से जीतने का एक बार नहीं बल्कि दो बार उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया. दूसरी बार तो उन्होंने खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ा. पासवान आठ बार हाजीपुर से सांसद रहे हैं. देश के पांच प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अवसर भी उन्हें मिला. करीब-करीब हर सरकार में केंद्र में वे मंत्री रहे और हर बार हाजीपुर से सांसद रहे.
हाजीपुर में जातीय एवं दलीय राजनीति से इतर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. दो बार यहां से उन्हें हार का भी सामना पड़ा. पासवान अपने राजनीतिक जीवन में तीन बार छोड़ हाजीपुर से 1977 से 2019 तक रहे सांसद रहे हैं. मौजूदा समय में राज्यसभा सांसद थे. रामविलास पासवान ने पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में हाजीपुर संसदीय सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004 एवं 2014 में जीत दर्ज हासिल करने में कामयाब रहे.
पासवान ने 1991 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कराई थी. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में उन्हें हाजीपुर सीट से 1984 की लहर में हार का सामना करना पड़ा था. वहीं, 2009 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि यहीं से दो बार उन्होंने विश्व रिकार्ड भी जीत का बनाया है.
पासवान हाजीपुर संसदीय सीट से अपने पहले ही चुनाव में 1977 में 4 लाख 24 हजार मतों से चुनाव जीतकर उन्होंने अपना नाम गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया था. इसके बाद उन्होंने 1989 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा था. पासवान ने कांग्रेस के महावीर पासवान को 5 लाख 4 हजार 448 मतों के अंतर से हराया था. इस तरह से उन्होंने अपनी रिकॉर्ड मतों से मिली जीत से देश भर में एक अहम पहचान बनाई और बिहार ही नहीं देश में दलित चेहरे के तौर पर जगह बनाने में कामयाब रहे.
2009 में रामविलास पासवान को हार से झटका जरूर लगा था, लेकिन उन्होंने खुद को हाजीपुर से जोड़े रखा. हार के बाद हाजीपुर के मीनापुर में पासवान की पहली सभा हुई थी, जहां पासवान की आंखों में आंसू छलक आए थे. उन्होंने उस समय कहा था कि लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, बच्चे से गलती हो जाती है तो थप्पड़ मार देना चाहिए, लेकिन इतनी बड़ी सजा नहीं देनी चाहिए. मैंने हाजीपुर को अपनी मां माना है और इस धरती एवं यहां के लोगों का कर्ज वे मरते दम तक नहीं चुका पाएंगे. इसी का नतीजा था कि 2014 के चुनाव में उन्होंने हाजीपुर से एक बार फिर से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे. इस तरह से उन्होंने अपने आखिरी वक्त तक हाजीपुर से अपने आपको जोड़े रखा.