बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तीन चरणों में हुए चुनावों में इस बार कुल 59.94 फीसदी वोटिंग हुई है. अब 10 नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की महारागंज विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 53.41% मतदान हुआ. महाराजगंज विधानसभा सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का दबदबा रहा है. पिछले 4 बार के विधानसभा चुनाव में जेडीयू लगातार जीतती रही है. हालांकि, 2014 के उपचुनाव में एक बार बीजेपी उम्मीदवार कुमार देवरंजन सिंह को जीत हासिल हुई जरूर थी लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में फिर वो हार गए और जेडीयू नेता हेम नारायण साह ने जीत हासिल की. हालांकि, इस बार बीजेपी और जेडीयू के एक साथ होने के कारण समिकरण पूरी तरह बदले हुए हैं. वहीं एनडीए में भी दोनों पार्टियों के बीच उम्मीदवारों की दावेदारी को लेकर खटपट हो सकती है. हेम नारायण साह के अलावा बीजेपी नेता और पूर्व विधायक कुमार देवरंजन सिंह भी इस बार दावेदारी ठोक सकते हैं.
देवरंजन साल 2010, 2014 और 2015 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. 2010 में डॉक्टर देवरंजन सिंह निर्दलीय मैदान में थे तो वहीं साल 2014 में महाराजगंज विधानसभा पर उपचुनाव में विधायक चुने गए. दरअसल, वर्ष 2010 में जदयू के दामोदर सिंह विजयी रहे थे लेकिन उनके निधन के बाद साल 2014 में लोकसभा चुनाव के साथ ही महाराजगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था. इस उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ.देवरंजन सिंह ने राजद के मानिकचंद राय को 4150 मतों से हरा दिया था. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हेम नारायण साह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
हालांकि इस बार दोनों पार्टियां साथ हैं और इस सीट पर जेडीयू का दबदबा रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार भी एनडीए की तरफ से हेम नारायण साह ही उम्मीदवार होंगे. लेकिन देवरंजन सिंह की पार्टी में अच्छी पकड़ होने के कारण बीजेपी भी चाहेगी कि इस बार यह सीट उनके पाले में जाए. इस सीट के इतिहास को देखें तो कांग्रेस को यहां से सिर्फ दो बार जीत मिली है. वहीं, जेडीयू 4 बार, जनता पार्टी 3 बार और जनता दल ने दो बार जीत हासिल की है.
सामाजिक ताना-बाना
महराजगंज लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले गोरियाकोठी विधानसभा क्षेत्र की आबादी करीब 410868 है और यहां 94.09 फीसदी आबादी ग्रामिण है, वहीं मात्र 5.91 फीसदी आबादी शहरी है. यहां 10.84 फीसदी लोग अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के हैं और 1.3 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से आते हैं.
2015 का जनादेश
2015 के चुनाव में इस सीट पर जेडीयू और बीजेपी आमने-सामने थी, जिसमें जेडीयू विधायक हेम नारायण साह को जीत मिली थी. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार कुमार देव रंजन सिंह को 20 हजार से ज्यादा मतों के बड़े अंदर से पटकनी दी थी. हेम नारायण साह को 68459 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी उम्मीदवार कुमार देवरंजन सिंह को 48167 वोट हासिल हुए थे.
दूसरे चरण में 3 नवंबर 2020 को इस सीट पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.
इस बार के मुख्य उम्मीदवार
मौजूदा विधायक का रिपोर्ट कार्ड
हेम नारायण साह सिवान के बंगरा के रहने वाले हैं. 1996 में बाजार समिति के अध्यक्ष भी रहे. इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने वाले हेम नारायण साह हाल के दिनों में कई सड़कों का शिलान्यास कर चुके हैं. इसके अलावा वो गांवों में घूम-घूम कर बैठक भी कर रहे हैं. अब देखना होगा कि 10 नवंबर को आने वाले चुनावों के नतीजों में इस सीट से लालटेन जलती है या फिर लगातार 5वीं बार ये सीट जेडीयू के खाते में जाती है.